Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • Bhakti Geet
    कविताएँ

    आट्टुकाल माता | Bhakti Geet

    ByAdmin August 22, 2022August 22, 2022

    आट्टुकाल माता- भक्तिगीत   कुछ नहीं जानती आट्टुकाल माते कुछ नहीं जानती आट्टुकाल माते अनजानी राहों पर उंगली पकड़ ले जाने से अविचल चित्त से मैं साथ आयी। (कुछ)   आदि मध्यान्त ज्ञान स्वरूपे आकुलताओं को दूर करने तू आयी। जानती हूँ मैं तेरी अभौम शक्ति , जानती हूँ तुझे आदि पराशक्ति । ( कुछ…

    Read More आट्टुकाल माता | Bhakti GeetContinue

  • मौन | Kavita maun
    कविताएँ

    मौन | Kavita maun

    ByAdmin August 21, 2022

    मौन ( Maun )   एक समय के बाद बहुत उत्पीड़न अन्तत: मौन की ओर हमें ले जाता है। और मौन? निराशा की ओर। निराशा किसी अपने से नहीं, ईश्वर के किसी निर्णय से नहीं। मात्र खुद से। अकेले रहते रहते हमारी आत्मा इतनी कुण्ठित होती जाती है, कि हमारा क्रोध, प्रतिशोध, आकाँक्षायें सब कुछ…

    Read More मौन | Kavita maunContinue

  • Poem shantidoot
    कविताएँ

    शांतिदूत | Poem shantidoot

    ByAdmin August 21, 2022August 21, 2022

    शांतिदूत ( Shantidoot )   शांति दूत सृष्टि नियंता माधव हस्तिनापुर आए खबर फैल गई दरबारों में मैत्री का संदेशा लाए   महारथियों से भरी सभा स्वागत में दरबार सजा दिया संदेशा पांडवों का केशव क्या है कहो रजा पुत्र मोह में बंधे हुए धृतराष्ट्र कुछ कह नहीं पाते थे अधिकार आधा पांडवों का देते…

    Read More शांतिदूत | Poem shantidootContinue

  • Poem zameer
    कविताएँ

    ज़मीर | Poem zameer

    ByAdmin August 21, 2022August 21, 2022

    ज़मीर ( Zameer )   आज फिर से ज़मीर का इक सवाल उठाती हूं मंचासीन के कानों तक ये आवाज़ पहुंचाती हूं   उनके स्वार्थ से बुझ गए हैं कुछ दीप खुशियों के ज़रा ठहरो कि पहले उनकी ज्योत जलाती हूं।   बना कर कुटुम्ब विशाल फिर क्यूँ आपस में लड़ते हो जिम्मेदारियाँ निभाने की…

    Read More ज़मीर | Poem zameerContinue

  • Ghazal e ishq
    शेरो-शायरी

    फूल सा इक शख़्स मुझको चाहता है | Ghazal-e-ishq

    ByAdmin August 21, 2022August 20, 2022

    फूल सा इक शख़्स मुझको चाहता है ( Phool sa ik shakhs mujhko chahta hai )     फूल सा इक शख़्स मुझको चाहता है पर किसी पत्थर से मेरा दिल लगा है   हिज्र उसका मुझको दीमक की तरह से दिन ब दिन अन्दर ही अन्दर खा रहा है   हो गया है मुझमें…

    Read More फूल सा इक शख़्स मुझको चाहता है | Ghazal-e-ishqContinue

  • Tumhara ghar bhi jal jayega
    शेरो-शायरी

    तुम्हारा घर भी जल जाएगा |Tumhara ghar bhi jal jayega

    ByAdmin August 21, 2022

    तुम्हारा घर भी जल जाएगा ( Tumhara ghar bhi jal jayega )     तुम्हारा घर भी जल जाएगा , क्यों हो आग लगाते ।   नासमझ बन जाने की जिद, उन्हे भला कैसे समझाते।   नाम तुम्हारा ही आता , बताओं कैसे जख्म दिखाते।   टूटती नहीं ख़ाबो की ताबीर, मुझसे किया वादा कोई…

    Read More तुम्हारा घर भी जल जाएगा |Tumhara ghar bhi jal jayegaContinue

  • Bharat ke insan jago
    कविताएँ

    हे! भारत के इंसान जगो, मैं तुम्हे जगाने आया हूं | Kavita

    ByAdmin August 21, 2022August 21, 2022

    *हे! भारत के इंसान जगो, मैं तुम्हे जगाने आया हूं।” ( He! Bharat ke insan jago, main tumhe jagane aya hoon )     हे! भारत के इन्सान जगो ,मैं तुम्हें जगाने आया हूं। भारत मां का बेटा हूं, देवों ने यहां पठाया हूं।। परशुराम का फरसा जागे श्रीराम, के वाण यहां। चक्र सुदर्शन श्रीकृष्ण…

    Read More हे! भारत के इंसान जगो, मैं तुम्हे जगाने आया हूं | KavitaContinue

  • Aise rang bharo
    कविताएँ

    ऐसे रंग भरो | Aise rang bharo | Kavita

    ByAdmin August 21, 2022

    ऐसे रंग भरो ( Aise rang bharo )   दिक्-दिगंत तक कीर्ति-गंध से सुरभित पवन करो ! दमक उठे जननी का आंचल , ऐसे रंग भरो !!   झिलमिल-झिलमिल उड़े गगन में मां का आंचल धानी । लिखो समय के वक्षस्थल पर ऐसी अमिट कहानी ।। ऊर्ध्व भाग में रंग शौर्य का केसरिया लहराये ।…

    Read More ऐसे रंग भरो | Aise rang bharo | KavitaContinue

  • Jaise tum ho paas kahin
    शेरो-शायरी

    जैसे तुम हो पास कही | Jaise tum ho paas kahin

    ByAdmin August 21, 2022

    जैसे तुम हो पास कही ( Jaise tum ho paas kahin )   ऐसा क्यो महसूस हो रहा, जैसे तुम हो पास कही। तेरे तन की खूशबू लगता’ मुझको जैसे पास अभी। शायद  है  ये  वहम  मेरा  या, मेरा पागलपन है, हुंकार हृदय तुझमे ही डूबा,तुझको ये एहसास नही।   इक कोरा कागज हूँ मैं…

    Read More जैसे तुम हो पास कही | Jaise tum ho paas kahinContinue

  • Prakriti par kavita
    कविताएँ

    प्रकृति | Prakriti par Kavita

    ByAdmin August 21, 2022November 14, 2023

    प्रकृति ( Prakriti )   इस प्रकृति की छटा है न्यारी, कहीं बंजर भू कहीं खिलती क्यारी, कल कल बहती नदियां देखो, कहीं आग उगलती अति कारी।   रूप अनोखा इस धरणी का, नीली चादर ओढ़े अम्बर, खलिहानों में लहलाती फसलें, पर्वत का ताज़ पहना हो सर पर।   झरनों के रूप में छलकता यौवन,…

    Read More प्रकृति | Prakriti par KavitaContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 578 579 580 581 582 … 836 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search