Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • Sab kuchh badal gaya ab
    कविताएँ

    सब कुछ बदल गया अब | Kavita sab kuchh badal gaya ab

    ByAdmin July 23, 2022

    सब कुछ बदल गया अब ( Sab kuchh badal gaya ab )   सब कुछ बदल गया अब तो बदला आलम सारा कहां गई वो प्रीत पुरानी बहती सद्भावों की धारा   दूर देश से चिट्ठी आती पिया परदेश को जाना पनघट गौरी भरें गगरिया हंस-हंसकर बतलाना   बदल गया अब रहन सहन सब शिक्षा…

    Read More सब कुछ बदल गया अब | Kavita sab kuchh badal gaya abContinue

  • Poem anakahee
    कविताएँ

    अनकही | Poem anakahee

    ByAdmin July 23, 2022

    अनकही ( Anakahee )   चलिये ना कुछ बात करें मैं अपने दिल की बात कहूँ कुछ छुपे हुए से राज कहूँ तुम अपने मन की परते खोलो सहज जरा सा तुम भी हो लो मैं अपनी कहानी कह दूंगी जो बंधी है मन के भीतर गिरहें सभी मैं खोलूंगी तुम भी अपने घाव दिखाना…

    Read More अनकही | Poem anakaheeContinue

  • Dhoondne se kahin nahin milti
    शेरो-शायरी

    ढ़ूढ़ने से कही नहीं मिलती | Dhoondne se kahin nahin milti

    ByAdmin July 22, 2022July 22, 2022

    ढ़ूढ़ने से कही नहीं मिलती ( Dhoondne se kahin nahin milti )     ढ़ूढ़ने से कही नहीं मिलती! ऐ ख़ुदा अब ख़ुशी नहीं मिलती   उम्रभर साथ दे वफ़ाओ से कोई ऐसी दोस्ती नहीं मिलती   रह गया है फ़रेब आंखों में अब सच्ची आशिक़ी नहीं मिलती   टूटे दिल को क़रार आये कुछ…

    Read More ढ़ूढ़ने से कही नहीं मिलती | Dhoondne se kahin nahin miltiContinue

  • Poem khafa
    शेरो-शायरी

    खूब रहते अपने ख़फ़ा घर में | Poem khafa

    ByAdmin July 21, 2022

    खूब रहते अपने ख़फ़ा घर में ( Khoob rahte apne khafa ghar mein )   ख़ूब रहते अपनें ख़फ़ा घर में ! अपनों की सहते है जफ़ा घर में   और तो झूठे है दिखाता सच आइना जो मेरे लगा घर में   ग़म दिल में अश्क़ है निगाहों में प्यार कब अपनों से मिला…

    Read More खूब रहते अपने ख़फ़ा घर में | Poem khafaContinue

  • Geet Aya Sawan Jhoom Ke
    गीत

    आया सावन झूम के | Geet Aya Sawan Jhoom Ke

    ByAdmin July 20, 2022July 19, 2023

    आया सावन झूम के ( Aya Sawan Jhoom Ke ) ( 1 )    इठलाता बल खाता आया झूमता मदमाता आया। झूम झूमकर सावन आया हरियाला सावन हर्षाया। आया सावन झूम के लहर लहर लहराता सा रिमझिम रिमझिम बरखा लाया। उमड़ घुमड़ छाई बदरिया अंबर में बादल घिर आया। फूल खिले चमन महकाया बहारों ने…

    Read More आया सावन झूम के | Geet Aya Sawan Jhoom KeContinue

  • Na hi inkar na hi izhar
    कविताएँ

    ना ही इंकार ना ही इजहार | Na hi inkar na hi izhar

    ByAdmin July 20, 2022

    ना ही इंकार ना ही इजहार ( Na hi inkar na hi izhar )   ना ही इन्कार किया और ना ही इजहार किया। तुझको आँखों में बसा कर सिर्फ इन्तजार किया। मै भटकता ही रहा शाख, से टूटे पत्तो की तरह, तुझमे भी प्यार जगे, वक्त का एतबार किया।   उम्मीदों से भरे कलश…

    Read More ना ही इंकार ना ही इजहार | Na hi inkar na hi izharContinue

  • Kalam ka pujari
    कविताएँ

    कलम का पुजारी | Kalam ka pujari | Kavita

    ByAdmin July 20, 2022

    कलम का पुजारी ( Kalam ka pujari )   नजर उठाकर देखो जरा, पहचान लीजिए। कलम का पुजारी हूं, जरा ध्यान दीजिए।   शब्दों की माला लेकर, भाव मोती पिरोता हूं। कागज कलम लेकर, मैं सपनों में खोता हूं।   गीत गजल छंद मुक्तक, दोहा चौपाई गाउं। मनमंदिर मांँ शारदे, पूजा कर दीप जलाऊं।  …

    Read More कलम का पुजारी | Kalam ka pujari | KavitaContinue

  • Bhole baba bam bam
    कविताएँ

    भोले बाबा बम बम | Bhole baba bam bam

    ByAdmin July 19, 2022November 1, 2022

    भोले बाबा बम बम ( Bhole baba bam bam )   अगम अगोचर अविनाशी शिव शंकर भोलेनाथ जगतपति जगपालन कर्ता विघ्नहर्ता विश्वनाथ   शंकर बाबा डमरू वाले हे नीलकंठ नटराज भोले बाबा खोल पलकिया पूर्ण कर दो काज भोले बम बम भोले बम बम   हे कैलाशी हे सुखराशि हे अंतर्यामी घट घटवासी सकल विश्व…

    Read More भोले बाबा बम बम | Bhole baba bam bamContinue

  • Poem kache makan
    कविताएँ

    कच्चे मकान बरसाती रातें | Poem kache makan

    ByAdmin July 19, 2022

    कच्चे मकान बरसाती रातें ( Kache makan barsati raatein )   चलो कच्चे मकानों में, गरीबों के ठिकानों में। बरसाती राते देखो, उनकी जिंदगानी है।   छप्पर टपके पानी, नैन टपकता नीर। जलमग्न हो कुटिया, भरे बस्ती में पानी है।   दिल पर कैसी गुजरे, बरसाती काली रातें। अंधियारा घट छाए, बस्तियों की कहानी है।…

    Read More कच्चे मकान बरसाती रातें | Poem kache makanContinue

  • हमने जाते हुए रास्ते को मुड़कर देखा है
    शेरो-शायरी

    हमने जाते हुए रास्ते को मुड़कर देखा है | Suneet Shayari

    ByAdmin July 18, 2022August 3, 2022

    हमने जाते हुए रास्ते को मुड़कर देखा है ( Hamane jaate hue raste ko mud kar dekha hai )   हमने जाते हुए रास्ते को मुड़कर देखा है निगाह में मंज़िल नहीं कोई, मगर बड़ी हसरत से देखा है आरजू सायों की लेकर , धुप में चल दिए थे कभी उसे मेरे हिस्से के बादलों…

    Read More हमने जाते हुए रास्ते को मुड़कर देखा है | Suneet ShayariContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 584 585 586 587 588 … 834 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search