हमने जाते हुए रास्ते को मुड़कर देखा है
हमने जाते हुए रास्ते को मुड़कर देखा है

हमने जाते हुए रास्ते को मुड़कर देखा है

( Hamane jaate hue raste ko mud kar dekha hai )

 

हमने जाते हुए रास्ते को मुड़कर
देखा है
निगाह में मंज़िल नहीं कोई, मगर बड़ी
हसरत से देखा है
आरजू सायों की लेकर , धुप में चल दिए
थे कभी
उसे मेरे हिस्से के बादलों को भी चुराते
देखा है…
न हिज़्र का मलाल कोई, न तमन्ना वसल
की
पत्थर सा था यार , अब पत्थरों से दिल
लगा के देखा है

?

Suneet Sood Grover

लेखिका :- Suneet Sood Grover

अमृतसर ( पंजाब )

यह भी पढ़ें :-

मन हो जब | Poem man ho jab

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here