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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Ghazal na khushiyan mili
    शेरो-शायरी

    न खुशियां मिली | Ghazal na khushiyan mili

    ByAdmin June 6, 2022June 6, 2022

    न खुशियां मिली ( Na khushiyan mili )     न खुशियां मिली आस पास में कटे रोज़ दिन अब उदास में   बुझा प्यास रब भेज कोई अब मुहब्बत कि जिस डूबा प्यास में   दिखाते वही दुश्मनी मुझे देखे बैठे पास पास में   न पीने कि वो दे गया क़सम भरा जाम…

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  • Paryavaran sanrakshan par kavita
    कविताएँ

    पर्यावरण | Paryavaran sanrakshan par kavita

    ByAdmin June 5, 2022

    पर्यावरण ( Paryavaran )   विविध जीवों का संरक्षण मान होना चाहिए। स्वस्थ पर्यावरण का संज्ञान होना चाहिए।। अधिक वृक्ष लगा करके धरती का श्रृंगार हो, वृक्षों की उपयोगिता पर ध्यान बार बार हो। वृक्ष, प्राणवायु फल छाया लकड़ियां देते हैं, उसके बदले हम उन्हें सोचो भला क्या देते हैं। दस पुत्र समान द्रुम हैं…

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  • Ghazal kamee dil mein tumhari
    शेरो-शायरी

    कमी दिल में तुम्हारी | Ghazal kamee dil mein tumhari

    ByAdmin June 5, 2022June 5, 2022

    कमी दिल में तुम्हारी ( Kamee dil mein tumhari )   कमी दिल में तुम्हारी ही  यहाँ हो सनम मेरे चले आओ जहाँ हो   ख़ुशी के फूल क्या मुझपर बरसेंगे यहाँ  तो रोज़ ग़म की ही ख़िज़ाँ हो   ख़फ़ा होकर वही बैठा बहुत है यहाँ जिसकी यादें दिल में रवाँ हो   तुम्हारे…

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  • Ghazal pyar se iqrar
    शेरो-शायरी

    प्यार से इक़रार किया रिश्ता नहीं | Ghazal pyar se iqrar

    ByAdmin June 4, 2022June 4, 2022

    प्यार से इक़रार किया रिश्ता नहीं! ( Pyar se iqrar kiya rishta nahi )     प्यार से इक़रार किया रिश्ता नहीं!  हम सफ़र वो ही बना मेरा नहीं   देखिए किस बात का उसको गरूर प्यार वो इक़रार क्यों करता नहीं   टूटे रिश्तें फ़िर नहीं जुड़ते कभी रूठना यूं ही मगर अच्छा नहीं…

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  • Jayamala ki rasm kavita
    कविताएँ

    जयमाला की रस्म | Jayamala ki rasm kavita

    ByAdmin June 3, 2022

    जयमाला की रस्म ( Jayamala ki rasm kavita )   सुबह से ही सजने लगा जयमाल का मंच, यह विवाह की रस्म है या धन का प्रपंच। शाम तक सज धज के मंच तैयार हुआ, निर्जीव फूलों से सजीवता का कार्य हुआ।   अब लगने लगा है स्वर्ग का यह सिंहासन, इससे सुंदर नहीं बैठने…

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  • इज्जत बहुत गुलाब को
    शेरो-शायरी

    इज्जत बहुत गुलाब को, दी हमको सिर्फ धूल | Ghazal

    ByAdmin June 3, 2022

    इज्जत बहुत गुलाब को, दी हमको सिर्फ धूल ( Izzat bahut gulab ko, di humko sirf dhool )   इज्जत बहुत गुलाब को, दी हमको सिर्फ धूल ! करने को फिर शिकायतें , आये हैं कुछ बबूल !!   रब से अता उस जैसे ‌ ही, काॅंटे हमारे पास ! क्यों वो है दिलफरेब पै,…

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  • Nasha par kavita
    कविताएँ

    ना नशा करो ना करने दो | Nasha par kavita

    ByAdmin June 2, 2022

    ना नशा करो ना करने दो ( Na nasha karo na karne do )   नशा करो ना करने दो समझा दो सबको प्यार से क्यों मौत को गले लगाते क्यों खेल रहे अंगार से   जूझ रहे जो पड़े मौत से हाल जरा जाकर देखो टीबी कैंसर का कारण है गुटखा जर्दा सब फेंको…

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  • Do joon ki roti
    कविताएँ

    दो जून की रोटी | Do joon ki roti | Kavita

    ByAdmin June 2, 2022

    दो जून की रोटी ( Do joon ki roti )     रोटियाँ…रोटियाँ… रोटियाँ… रोटियाँ….   आगे पीछे उसके दुनिया है घूमती वास्ते उसी के, चरणों को चूमती बेमोल बेंच देता है, ईमान आदमी सामने नजर के,जब वो है घूमती।।   उपदेश सारे बंद किताबों में कीजिए भूख में नजर बस, आती है रोटियां।।  …

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  • Aam kavita
    कविताएँ

    आम | Aam kavita

    ByAdmin June 1, 2022

    आम ( Aam )   खाओ ताजा-ताजा आम कहते फलों का राजा आम। कुछ कच्चा कुछ पक्का आम कुछ खट्टा कुछ मीठा आम।। बागों में जब बौरे आम कोयल बोले सुबह और शाम । देख टिकोरा तोड़े छोरा भूल के घर का सारा काम।। लंगड़ा चौसा और दशहरी ना जाने हैं कितने नाम । बने…

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  • Aaya mahina june ka
    कविताएँ

    आया महीना जून का सूरज उगले आग | Aaya mahina june ka | Chhand

    ByAdmin June 1, 2022

    आया महीना जून का सूरज उगले आग ( Aaya mahina june ka suraj ugale aag )   आया महीना जून का, सूरज उगले आग। चिलचिलाती धूप में, बाहर ना जाइए।   गरम तवे सी धरती, बरस रहे अंगारे। आग के गोले सी लूएं, खुद को बचाइए।   गर्मी के मारे पखेरू, उड़ते फिरे बेहाल। पानी…

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