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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Kavita mausam suhana hai
    कविताएँ

    मौसम सुहाना है मधुबन खिल सा जाए | Kavita mausam suhana hai

    ByAdmin June 1, 2022December 4, 2022

    मौसम सुहाना है मधुबन खिल सा जाए ( Mausam suhana hai madhuban khil sa jae )   मौसम सुहाना है मधुबन खिल सा जाए बरसे प्रेम सलोना वादियां भी महक जाए चल कहीं दूर निकल जाए   मन की उमंगे सारी प्रीत की वो बातें प्यारी कितने हंसी वो लम्हे सुहानी वो यादें हमारी चंचल…

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  • Tambaku tere karan
    कविताएँ

    तंबाकू तेरे कारण | Geet tambaku tere karan

    ByAdmin May 31, 2022

    तंबाकू तेरे कारण ( Tambaku tere karan )   रूठ गई है मुझसे अम्मा रूठा सारा परिवार घर का रहा ना घाट का में फिरता हूं लाचार तंबाकू तेरे कारण, तंबाकू तेरे कारण।   पड़ा नशे में धुत रहा ना रही सुध बुध खाने की भुगत रहा परिणाम सारे लत गले लगाने की गुटका पान…

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  • Kavita dabe pair
    कविताएँ

    दबे पैर | Kavita dabe pair

    ByAdmin May 31, 2022May 31, 2022

    दबे पैर ( Dabe pair )   वो दबे पैर अंदर आयी जैसे बंद कमरों में ठंड की एक लहर चुपके से आ जाया करती है और बदल गयी सारे रंग मेरे जीवन के, जैसे पहली बारिश धरा को बदल ज़ाया करती है अंकुर फूटे भावनाओं के और मदिरा सी मस्ती छा गयी कुछ ना…

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  • Journalism Day Kavi Sammelan
    साहित्यिक गतिविधि

    पत्रकारिता दिवस के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन

    ByAdmin May 31, 2022October 27, 2022

    ” पत्रकारिता दिवस के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन “   हिन्दी पत्रकारिता दिवस की पूर्व संध्या पर “अंतरराष्ट्रीय साहित्य संगम” (साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था) के तत्वावधान में डॉ. ओमप्रकाश पांडेय की अध्यक्षता एवं डॉ. मुन्ना लाल प्रसाद के संचालन में गूगल मीट के माध्यम से पहले सत्र में एक ऑनलाइन “हिन्दी पत्रकारिता: दिशा एवं दशा”…

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  • Ghazal gali uski
    शेरो-शायरी

    गली उसकी बहुत पहरा रहा है | Ghazal gali uski

    ByAdmin May 30, 2022May 31, 2022

    गली उसकी बहुत पहरा रहा है ( Gali uski bahot pahra raha hai )     गली उसकी बहुत पहरा रहा है यहाँ माहौल कुछ ऐसा रहा है   बढ़ी है  इसलिए दूरी उसी से उसी का नर्म कब लहज़ा रहा है   दवाई ले नहीं पाया मगर यूं नहीं कल जेब में पैसा रहा…

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  • Kare kajrare naina
    कविताएँ

    कारें कजरारे नैना | Kare kajrare naina | Kavita

    ByAdmin May 30, 2022

    कारें कजरारे नैना ( Kare kajrare naina )   काली आंखें तिरछे नैना दमक रहा आनन सारा प्रीत भरी इन आंखों में झलक रही प्रेम रसधारा   झील सी आंखें गहरी गहरी डूब न जाना नैनों में मादकता भरे ये लोचन अंदाज मस्ताना नैनों में   नैन कटीले काले कजरारे चले नैना तीर कटार मृगनयनी…

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  • Ghazal kami dil mein
    शेरो-शायरी

    कमी दिल में | Ghazal kami dil mein

    ByAdmin May 29, 2022May 29, 2022

    कमी दिल में ( Kami dil mein )     कमी दिल में तुम्हारी ही यहाँ हो सनम मेरे चले आओ जहाँ हो   ख़ुशी के फूल क्या मुझपर बरसेंगे यहाँ  तो रोज़ ग़म की ही ख़िज़ाँ हो   ख़फ़ा होकर वही बैठा बहुत है यहाँ जिसकी यादें दिल में रवाँ हो   तुम्हारे बिन…

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  • Mere mann ka shor
    कविताएँ

    मेरे मन का शोर | Mere mann ka shor | Kavita

    ByAdmin May 29, 2022

    मेरे मन का शोर ( Mere mann ka shor )   विचारों की उथल-पुथल उमड़ा मेरे मन का शोर कल्पनाओं ने उड़ान भरी आया भावों का दौर   भावो का ज्वार हिलोरे ले रहा हलचल मची मन में उमंगे उठ रही नित नई साहस भर रहा नस-नस में   प्रचंड भाव प्रवाह मन का तूफान…

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  • Manav tan
    छंद

    मानव तन | Manav tan | Chhand

    ByAdmin May 28, 2022October 12, 2022

    मानव तन ( Manav tan ) मनहरण घनाक्षरी     नश्वर सी यह काया, तन को हमने पाया। देह गात स्वरूप को, दाग ना लगाइए।   कंचन सी काया मिली, पंचतत्वों का शरीर। मानव तन भाग्य से, हरि कृपा पाइए।   चंद सांसों का खेल है, आत्मा का जुड़ा है तार। मानुष जन्म में मिला,…

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  • Poem bas wo biki nahi
    कविताएँ

    बस वो बिकी नहीं | Poem bas wo biki nahi

    ByAdmin May 28, 2022

    बस वो बिकी नहीं ( Bas wo biki nahi )   श्रृंगार की गजल कोई, हमने लिखी नहीं। सूरत हुजूरे दिल की, जबसे दिखी नहीं ॥   बिक गई थी लाखो में, इक तस्वीर बेहया, जिसमें लिखा था मां, बस वो बिकी नहीं ॥   हंसते रहे तमाम उम्र, जिसको छिपाके हम, हमसे वो बातें…

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