• जो चला गया | Jo chala gaya | Poem in Hindi

    1. जो चला गया   जो चला गया हैं छोड़ तुझे,उस मोह में अब क्या पड़ना हैं। जीवन सूखी बगिया में,  सब रंग तुम्हे ही भरना हैं। आसूं का संचय करो हृदय में, जिष्णु सा सम्मान भरो, इतिहास अलग ही लिखना है, अवनि को तुमको छूना है।   2. हमीं से मोहब्बत    हमीं से…

  • है तुझे भी इजाजत | Geet hai tujhe bhi ijazat

    है तुझे भी इजाजत ( Hai tujhe bhi ijazat )   उतर आओ चांदनी सी मिल जाए जब भी फुर्सत। महकती वादियों में मिलना, है तुझे भी इजाजत। है तुझे भी इजाजत,है तुझे भी इजाजत   रुप का श्रंगार हो तुम, गुल गुलशन बहार हो तुम। कुदरत का कोई अजूबा, प्यार का इजहार हो तुम।…

  • डाकिया | Chhand dakiya

    डाकिया ( Dakiya ) मनहरण घनाक्षरी   सुख-दुख के संदेश, खुशियों के प्यार भरे। डाकिया का इंतजार, होता घर द्वार था।   आखर आखर मोती, चिट्ठी की महक लाता। इक छोटा पोस्टकार्ड, कागज में प्यार था।   चूड़ियों की खनक भी, बुलंदी की ललक भी। खुशियों का खजाना वो, डाक लाता जब था।   वो…

  • दिल तोड़कर | Geet dil tod kar

    दिल तोड़कर ( Dil tod kar )   दिल तोड़कर ग़म से ही प्यार कर दिया! दिल इस क़दर  मेरा आजार कर दिया ये क्या हाये  तूने ये यार कर दिया क्यूं बेसहारा यूं  बेदर्द कर दिया   ये जिंदगी अकेली ऐसी हो गयी के भीड़ में तन्हाई का अहसास हो ऐसा मिला मुहब्बत में…

  • फुरसत मिली | Poem fursat mili

    फुरसत मिली ( Fursat mili )   फुरसत मिली, पढ़ लूं तहरीरें लिखी जो पानियों ने पानी पर सुना है जनमों से सब्र लिये बहता है कोई आबशार किसी के लिये कहीं पर बरसता अब्र, गीली ज़मीं, पर प्यास लिये मेरा मन, पानी, पानी बहता दरिया शायद मेरे लिये यहीं पर…. उफ़ुक उधर भी था,…

  • दिव्य भूमि | Kavita divya bhumi

    1.दिव्य भूमि   दिव्य भूमि साकेत जहाँ पर, राम ने जन्म लिया था। कलयुग में वो भाग्य पे अपने, जार जार रोया था।   सृष्टि के साथ ही उदित हुआ,उस नगर का नाम था काशी। नराधमों ने काशी की महिमा को बना दिया दासी।   नाम बदल दी धर्म बदल दी, इतिहास मिटा दी सारी।…

  • मुझे हक है | Poem Mujhe Haq Hai

     मुझे हक है ( Mujhe Haq Hai )   दिल के सारे राज जानूं कैसी दिल की धड़कन है। मनमंदिर में पूजन कर लूं दीपक ले मेरा मन है।   सुबह शाम जब देखूं दिल में होती धक धक है। तेरा प्रेम मेरी जिंदगी है प्रियतम मेरे मुझे हक है।   डगर डगर पे तेरे…

  • सारा आकाश हमारा है | Kavita sara akash hamara hai

    सारा आकाश हमारा है ( Sara akash hamara hai )     उत्साह उमंगे उर भर लो सुंदर सारा नजारा है साहस भरकर देख लो सारा आकाश हमारा है   बुलंदियों की ओर बढ़ो हौसलों के साथ चलो लक्ष्य साध लो जीवन में तूफानों के संग पलो   संघर्षों से ही मंजिल का मिलता हमें…

  • मर्यादा | Muktak maryada

    मर्यादा ( Maryada )   सत्य शील सद्भावो के जग में फूल खिलाना है प्यार के मोती अनमोल खुशियों का खजाना है मर्यादा पालक रामचंद्र जी महापुरुष कहलाए पावन वो परिपाटी हमें जन्म-जन्म निभाना है   हर्ष खुशी आनंद बरसे प्रेम की बहती हो धारा जहां मर्यादा जिंदा है सुख सागर उमड़े सारा अनीति अनाचार…

  • बिछा लो प्रेम की चादर | Kavita bichha lo prem ki chadar

    बिछा लो प्रेम की चादर ( Bichha lo prem ki chadar )     बिछा सकते हो तो बिछा लो प्यार की चादर। गोद में पलकर हुए बड़े कर लो उनका आदर। बिछा लो प्रेम की चादर   आंधी तूफानों में भी हम आंचल की छांव में सोए। साहस संबल मांँ ने दिया पुचकारा जब…