Chhand dakiya

डाकिया | Chhand dakiya

डाकिया

( Dakiya )

मनहरण घनाक्षरी

 

सुख-दुख के संदेश,
खुशियों के प्यार भरे।
डाकिया का इंतजार,
होता घर द्वार था।

 

आखर आखर मोती,
चिट्ठी की महक लाता।
इक छोटा पोस्टकार्ड,
कागज में प्यार था।

 

चूड़ियों की खनक भी,
बुलंदी की ललक भी।
खुशियों का खजाना वो,
डाक लाता जब था।

 

वो मामूली खत नहीं,
भरी प्रेम रसधार‌
वो भी एक जमाना था,
डाकिया लाता तार‌‌।

 

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

मुझे हक है | Poem Mujhe Haq Hai

Similar Posts

  • शालीनता | देव घनाक्षरी | Chhand Shalinta

    शालीनता ( Shalinta )   शालीनता सुशीलता सौम्य स्वभाव बनाए संस्कार हमारे शुभ हो कीर्ति पताका गगन   विनय धीरज धर भाव विमल धार लो उर आनंद बरसे हरसे मन का चमन   बहती पावन गंगा प्रेम सिंधु ले हिलोरे सत्कार मिले सबको, कर जोड़ करें नमन   सुंदर सी सोच रख विनम्र हो भाव…

  • नसीहतें | Nasihaten Chhand

    नसीहतें ( Nasihaten )     नसीहतें मां-बाप की सुन लेना एक बार जिंदगी सुधर जाए एतबार कीजिए   भला चाहते आपका अपने ही देते सीख बड़ों की नसीहतों को सम्मान दीजिए   नसीहतें ना दीजिए कर्म भी जग में करे हुनर दिखला कर खूब यश लीजिए   जिंदगी की जंग में भी हौसला रखना…

  • ठिठुरन | Thithuran par chhand

    ठिठुरन ( Thithuran )   सर्द हवा ठंडी ठंडी, बहती है पुरजोर। ठिठुरते हाथ पांव, अलाव जलाइए। कोहरा ओस छा जाए, शीतलहर आ जाए। कंपकंपी बदन में, ठंड से बचाइए। सूरज धूप सुहाती, ठण्डक बड़ी सताती। रजाई कंबल ओढ़, चाय भी पिलाइए। बहता हवा का झोंका, लगता तलवारों सा। ठिठुरती ठंडक में, गर्म मेवा खाइए।…

  • फूलों की कली | Phoolon ki kali | Chhand

    फूलों की कली ( Phoolon ki kali ) मनहरण घनाक्षरी   महक गई वादियां, महका चमन सारा। फूलों की कलियां खिली, मधुर चली बहार।   मधुबन में बहारें, झौंका मस्त पवन का। कलियों ने महकाया, लो आने लगी बहार।   विविध भांति पुष्पो ने, सुगंधित कलियों ने। मदमस्त किया समां, सुहानी लगी बयार।   महकते…

  • गाँव | Gaon par chhand

    गाँव ( Gaon ) मनहरण घनाक्षरी   टेडी मेडी पगडंडी, खलिहानों की वो क्यारी। ठंडी-ठंडी बहारों में, गांव चले आइए।   मीठे मीठे बोल मिले, सद्भाव प्रेम गांव में। हरे भरे पेड़ पौधे, ठंडी छांव पाइए।   खुली हवा में सांस लो, हरियाली का आनंद। चौपाल में चर्चा चले, प्रेम बरसाइये।   सुख-दुख बांटे सब,…

  • नवदुर्गा उपासना | Navdurga Upasana

    नवदुर्गा उपासना ( मनहरण घनाक्षरी ) नाम नव दुर्गा रूप, पूजे सुर मुनि भूपपहाड़ों वाली मां तेरा, शैलपुत्री नाम है। दूसरा अनूप रूप, ब्रह्मचारिणी है मैयाकमंडल कर तेरे, दूजे कर माल है। चंद्रघंटा रूप तेरा, तीसरा सलोना मैया,सिंह की सवारी तेरे, हाथ में कमान है। चौथा है कुष्मांडा रूप, पांचवा स्कंद मैया,छठा है कात्यायनी मां,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *