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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Geet bhoole se chehre
    कविताएँ

    भूले से चेहरे | Geet bhoole se chehre

    ByAdmin April 19, 2022

    भूले से चेहरे  ( Bhoole se chehre )     भूले  से  चेहरे  कितने  ही, आँखों में घिर आए हैं ! अपना भी चेहरा है उनमें, या हम फिर भरमाए हैं !!   प्रातः कीआशा बन आये, हैं जग में कब से उजियारे लेकिन अबभी अन्धियारों से,भरे हुए घरके गलियारे मैं अपने आँगन में बैठा…

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  • Poem pathar dil
    कविताएँ

    पत्थर दिल | Poem pathar dil

    ByAdmin April 18, 2022

    पत्थर दिल ( Pathar dil )   पत्थर फेंक दो मेरे यार पत्थर दिल मत बनो। जोड़ो दिलों के तार बिना बात भी मत तनो।   मत बिछाओ राहों में कंटको के ढेर कभी। मुस्कुरा कर थोड़ा देखो खिलेंगे फूल तभी।   कमियों को नहीं तारीफों के पुल सजाओ। प्यार के मोती सुहाने प्रेम से…

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  • Ghazal zindagi meri
    शेरो-शायरी

    जिंदगी मेरी अकेले कट रही है | Ghazal zindagi meri akele kat rahi hai

    ByAdmin April 18, 2022April 18, 2022

    जिंदगी मेरी अकेले कट रही है  ( Zindagi meri akele kat rahi hai )     जिंदगी मेरी अकेले कट रही है ! भेज कोई तो ख़ुदाया अब परी है   तोड़कर वादे वफ़ा सब प्यार के वो भर गया है वो निगाहों में नमी है   इसलिए हल काम कोई भी न होता के…

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  • Dewali essay in Hindi
    निबंध

    दीपावली पर निबंध | Dewali essay in Hindi

    ByAdmin April 17, 2022October 31, 2022

    दीपावली पर निबंध ( Essay in Hindi on Dewali )   प्रस्तवना – भारत त्योहारों की भूमि है। हालांकि कोई भी त्योहार दिवाली से बढ़ कर नही है। यह निश्चित रूप से भारत के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। यह शायद दुनिया का सबसे चमकीला त्योहार है। आजकल तो विभिन्न धर्मों के लोग…

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  • हीरो के भाई का मुंडन | Vyang hero ke bhai ka mundan
    व्यंग्य

    हीरो के भाई का मुंडन | Vyang hero ke bhai ka mundan

    ByAdmin April 17, 2022April 17, 2022

    हीरो के भाई का मुंडन ( Hero ke bhai ka mundan ) मैं संगम पर अपना सिर मुंडवा रहा था। मेरे वालिद का इन्तकाल जो हो गया था। अभी आधा सिर ही मुंडा था, कि एक खुशखबरी पास के रखे ट्रान्जिस्टर नें दी । “मेरे आदर्श” “मेरे प्यारे” हीरो बिग ए की मां का देहावसान…

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  • Ghazal yahan ho rahi khoob ab mayakashi hai
    शेरो-शायरी

    यहाँ हो रही ख़ूब अब मयकशी है | Ghazal yahan ho rahi khoob ab mayakashi hai

    ByAdmin April 16, 2022

    यहाँ हो रही ख़ूब अब मयकशी है ! ( Yahan ho rahi khoob ab mayakashi hai )   यहाँ हो रही ख़ूब अब मयकशी है ! न  कोई  बची  गांव  की वो गली है   हुई बात ऐसी यहाँ कल अपनों में यहाँ गोलियां ख़ूब देखो चली है   मिले दोस्ती का भला हाथ कैसे…

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  • Ghazal mausam gulabi kahan hai
    शेरो-शायरी

    मौसम गुलाबी कहाँ है | Ghazal mausam gulabi kahan hai

    ByAdmin April 15, 2022

    मौसम गुलाबी कहाँ है ( Mausam gulabi kahan hai )   मुहब्बत ऐ मौसम गुलाबी कहाँ है! मेरे पास उसकी निशानी कहाँ है   उसी का यहाँ नाम बदनाम यूं ही वही दोस्त देखो शराबी कहाँ है   क्यों परदेश जाकर मुझे भूल बैठे कि चिट्टी वो आयी तुम्हारी कहाँ है   सहे ख़ूब ग़म…

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  • Dr. Bhimrao Ambedkar par kavita
    कविताएँ

    डॉक्टर भीमराव अंबेडकर | Poem Dr. Bhimrao Ambedkar

    ByAdmin April 15, 2022

    डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ( Dr. Bhimrao Ambedkar )   संविधान निर्माता नमन वंदन हे राष्ट्र रतन भारत पंचशील सिद्धांत अपनाया बौद्ध धर्म में हुये रत   समानता भाईचारा मानवतावाद के पथ प्रदर्शक छुआछूत मिटाने का प्रचार प्रसार किया भरसक   पत्रकार संपादक बने कलम के सजग सिपाही समता समाचार निकाला पक्षधर दीन ए इलाही  …

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  • Khushi se bahut badnaseeb hoon
    ग़ज़ल

    ख़ुशी से बहुत बदनसीब हूँ | Badnaseeb Shayari

    ByAdmin April 14, 2022July 12, 2023

    ख़ुशी से बहुत बदनसीब हूँ ( Khushi se bahut badnaseeb hoon )     ख़ुशी से बहुत बदनसीब हूँ बड़ा जिंदगी में ग़रीब हूँ   वफ़ा पर तू मेरी यकीन कर तेरा एक सच्चा हबीब हूँ   भला चाहता हूँ सदा तेरा नहीं दोस्त कोई रकीब हूँ   वही दिल दुखा अब रहा मेरा यहाँ…

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  • Poem manzil
    कविताएँ

    मंजिल | Poem manzil

    ByAdmin April 13, 2022

    मंजिल ( Manzil )   मंजिल अपनी निश्चित है,और भाव भी मन मे सुदृढ़ है। रस्ता तय करना है केवल,जो मंजिल तक निर्मित है।   जो मिलता ना रस्ता तो फिर, खुद ही नया बनाएगे। कर्मरथि हम मार्ग बनाकर, खुद मंजिल तक जाएगे।   टेढी मेढी हो पगदण्डी या फिर कंटक राहों मे। हम पर्वत…

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