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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Bhakt prahlad chhand
    छंद

    भक्त प्रह्लाद | Bhakt Prahlad

    ByAdmin March 17, 2022January 29, 2023

    भक्त प्रह्लाद ( Bhakt prahlad )     होलिका भी जल गई, प्रह्लाद को भर गोद, हर्ष जग में छा गया, सब होली मनाइए।   सद्भाव की घटाएं भी, लाई रंगों की बहार, घट घट हर्ष छाया, मस्त होकर गाइए।   सच्चे भक्त प्रह्लाद जो, प्रभु का करते ध्यान, दीनानाथ रक्षा करें, हरि ध्यान लगाइए।…

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  • Poem holika dahan
    कविताएँ

    होलिका दहन | Poem Holika Dahan

    ByAdmin March 17, 2022March 24, 2024

    होलिका दहन ( Holika Dahan ) ( 2 )  करना है काम एक आज होलिका दहन में जलानी है कमी एक जो भि है निज के मन में अधर्म पर धर्म की जीत का प्रमाण समक्ष होगा करें दूर कल क्यों, आज के दिन हि प्रत्यक्ष होगा तब हि इन शुभ कामनाओं का कोई अर्थ…

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  • Wafa ghazal
    शेरो-शायरी

    मुझे कब मगर वो वफ़ा दे गया | Wafa ghazal

    ByAdmin March 17, 2022

    मुझे कब मगर वो वफ़ा दे गया ( Mujhe kab magar wo wafa de gaya )     मुझे कब मगर वो वफ़ा दे गया वफ़ा में मुझे वो दग़ा दे गया   जिसे रात दिन चाह मैंनें बहुत मुझे हिज्र की वो सजा दे गया   ख़ुशी के दिये फूल उसको बहुत मुझे वो…

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  • Poem Rangotsav Holi
    कविताएँ

    रंगोत्सव होली | Poem Rangotsav Holi

    ByAdmin March 17, 2022

    रंगोत्सव होली ( Rangotsav Holi )   जोश जुनून उमंग जगाता, तन मन को हर्षाता। रंगों का त्योहार होली, सद्भाव प्रेमरस बरसाता।   गाल गुलाबी दमकते, गोरी के गुलाल लगाकर। पीला रंग प्रेम झलकाता, घर में खुशियां लाकर।   स्वाभिमान शौर्यता लाता, रक्तवर्ण महावीरों में। तलवारों का जोश उमड़ता, जोशीले रणधीरों में।   सुखद अनुभूति…

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  • Kavita bolti aankhen
    कविताएँ

    बोलती आंँखें | Kavita bolti aankhen

    ByAdmin March 16, 2022March 16, 2022

    बोलती आंँखें ( Bolti Aankhen )   बोलती आंँखें सब बातें, मन के भावों को दर्शाती। हर्ष और आनंद मौज में, झूम झूमकर इठलाती।   आंँख दिखाते आज बेटे, बुड्ढे मांँ और बाप को। संस्कारों को भूलकर, वो बड़ा समझते आपको।   मांँ की आंखों में नेह की वर्षा, हो रही आज भी। उमड़ रहा…

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  • राजगुरु सुखदेव भगत सिंह | Kavita Rajguru Sukhdev Bhagat Singh
    कविताएँ

    राजगुरु सुखदेव भगत सिंह | Kavita Rajguru Sukhdev Bhagat Singh

    ByAdmin March 16, 2022

    राजगुरु सुखदेव भगत सिंह ( Rajguru Sukhdev Bhagat Singh )     हिम्मत बुलंद अपनी, पत्थर सी जान रखते हैं। दिल में बसाए हम, प्यारा हिंदुस्तान रखते हैं।   क्या आंख दिखाएगा कोई, हमवतन परस्तों को। हम सर पे कफन हथेली पे, अपनी जान रखते हैं।   रख हिमालय सा हौसला, सागर सी गहराई है।…

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  • Grand and huge poetry seminar on Brajbhoomi platform on Holi festival
    साहित्यिक गतिविधि

    होली पर्व पर ब्रजभूमि पटल पर भव्य एवं विराट काव्य गोष्ठी

    ByAdmin March 16, 2022

    होली पर्व पर ब्रजभूमि पटल पर भव्य एवं विराट काव्य गोष्ठी मथुरा (उ.प्र.) ब्रजभूमि साहित्यिक मंच मथुरा (उ.प्र.) पटल द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह पर कवयित्रियों की विराट एवं भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें देश के हर कोने देश-विदेशों से सुप्रसिद्व एवं महती (महान) कवयित्रियों ने ब्रजभूमि के पटल को सम्पूर्ण प्राकृतिक…

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  • Babul kavita
    कविताएँ

    बाबुल | Babul kavita

    ByAdmin March 16, 2022

    बाबुल ( Babul )   बाबुल याद घणी सताये, बाबुल मन मेरा घबराये। जिस आंगन में पली-बढ़ी, आंखों में उतर आए रे। बाबुल मन मेरा घबराये, बाबुल मन मेरा घबराये।   मां की सीख हर्ष भर देती,घर संसार सुख कर देती। आंगन की तुलसी तेरे, खुशियों से झोली भर लेती।   मेरा रूठना और मनाना,…

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  • Kavita holi aayi
    कविताएँ

    होली आई | Kavita holi aayi

    ByAdmin March 16, 2022

    होली आई  ( Holi Aayi )   होली आई, होली आई रंग-बिरंगी ख़ुशियाँ लाई ।   हाथों में लें लो पिचकारी, रंग डालने की करो तैयारी ।   पानी से भर रखें हैं ग़ुब्बारें दिल में उठे प्रेम की फुहारें ।   सबके चेहरे रंगों से भरे हैं, मस्ती में सब झूम रहे हैं ।…

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  • Tilak Bridge Ke Cactus
    व्यंग्य

    तिलक ब्रिज के कैक्टस | Vyang

    ByAdmin March 15, 2022

    तिलक ब्रिज के कैक्टस ( Tilak Bridge Ke Cactus ) साहित्यकार रचना लिख कर केवल रचना दान में पटक कर रखे तो किसी को आपत्ति नही होती है पर रचना लिख कर गरम मेल की तरह वलात कानों में पकड कर उढ़ेले तो हत्या या आत्मा करने को मन होता है। पर जब दोनो नही…

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