Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • पुलवामा शहीदों को नमन
    कहानियां

    पुलवामा शहीदों को नमन | Poem on pulwama shahido ko naman

    ByAdmin February 13, 2022February 13, 2022

    पुलवामा शहीदों को नमन ( Pulwama shahido ko naman )   पुलवामा में शहीद हो गए वंदन उन रणवीरों को मातृभूमि शीश चढ़ाये सब देशप्रेम रणधीरों को   कश्मीर की केसर क्यारी में वीर कई बलिदान हुए आतंकी हमलों ने घायल भारत माँ को घाव दिए   दहल उठा देश सारा दुश्मन की गहरी चालों…

    Read More पुलवामा शहीदों को नमन | Poem on pulwama shahido ko namanContinue

  • Mujhe bhi yaad kar lena
    कविताएँ

    मुझे भी याद कर लेना | Geet

    ByAdmin February 13, 2022

    मुझे भी याद कर लेना ( Mujhe bhi yaad kar lena )   मेरे आँगन का सावन जब लिये बरसात आयेगा इस फुलवारी में आकर के गुलो गुलशन महकायेगा मैं तुझको याद करूंगी तुम्हारे दर पर आँधी की जब होंगी दस्तक बेशुमार दबाकर सारी हलचल तुम मुझे बस गुनगुना लेना मुझे भी याद कर लेना…

    Read More मुझे भी याद कर लेना | GeetContinue

  • Suryakant bali dirghatama
    साहित्यिक गतिविधि

    सूर्यकांत बाली के वैदिक उपन्यास “दीर्घतमा” पर परिचर्चा

    ByAdmin February 12, 2022February 13, 2022

    “सुनो पाञ्चजन्य का नाद तो है स्वर सिंहनादी ललकारो का अबकी बार प्रहार कड़ा हो फन कुचलो मक्कारों का” बसंत महोत्सव पर कवियों ने भी बिखेरा काव्य रंग छिंदवाड़ा – साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग का उपक्रम पाठक मंच द्वारा लेखक सूर्यकांत बाली के वैदिक उपन्यास “दीर्घतमा” पर परिचर्चा एव बसंत…

    Read More सूर्यकांत बाली के वैदिक उपन्यास “दीर्घतमा” पर परिचर्चाContinue

  • Poem on bahon mein
    कविताएँ

    बांहों में | Poem on bahon mein

    ByAdmin February 12, 2022

    बांहों में ( Bahon mein )   धरा गगन से कह रही लो आ गया मधुमास प्रियतम ले लो बाहों में मदमाता बसंत खास   लिपट लता सी प्रीत भरे कुदरत करती श्रंगार आलिंगन आतुर सरिताये चली सिंधु के द्वार   दीपक बाती का मिलन जग रोशन हो सारा प्रेम की रसधार बहती ऐसा हो…

    Read More बांहों में | Poem on bahon meinContinue

  • Parchai chhand
    कविताएँ

    परछाई | जलहरण घनाक्षरी | Parchai chhand

    ByAdmin February 12, 2022

    परछाई ( Parchai )   चल पड़ती साथ में साया बन परछाई अपनी छवि जग में पहचान बनाइए   हरदम देती साथ हर राह डगर पे अपनी परछाई को उज्जवल बनाइए   मां की परछाई बेटी खुशियों का है खजाना हर खुशी उन्नति में साथ सदा निभाइये   रोशन जीवन सारा परछाई दे सहारा समय…

    Read More परछाई | जलहरण घनाक्षरी | Parchai chhandContinue

  • Essay in Hindi on environment vs development
    निबंध

    निबंध : पर्यावरण बनाम विकास | Essay in Hindi on environment vs development

    ByAdmin February 12, 2022November 1, 2022

    निबंध : पर्यावरण बनाम विकास ( Essay in Hindi on environment vs development )   पर्यावरण और विकास को अक्सर अलग-अलग और एक दूसरे का विरोधी समझा जाता है। लेकिन अगर इन दोनों को साथ लाए बिना वर्तमान पर्यावरण और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना होगा तो काफी कठिन स्थिति बन जाएगी। अक्सर बहुत कम…

    Read More निबंध : पर्यावरण बनाम विकास | Essay in Hindi on environment vs developmentContinue

  • Poem on bhookh aur pet
    कविताएँ

    भूख और पेट | Poem on bhookh aur pet

    ByAdmin February 12, 2022

    भूख और पेट ( Bhookh aur pet )   सड़क पुल नदियों को निगले डकार नहीं लेते आंधी है या कोई तूफान बहार आने नहीं देते   कुछ को धन की भूख है कुछ का पेट बहुत बड़ा जाने कितने ही घोटालों का हंगामा हो गया खड़ा   भुखमरी बेरोजगारी अब गरीबी दूर होनी चाहिए…

    Read More भूख और पेट | Poem on bhookh aur petContinue

  • Poem on paras
    कविताएँ

    पारस | Poem on paras

    ByAdmin February 11, 2022

    पारस ( Paras )   करामात होती पारस में जब लोहे को छू लेता है। कुदरत का खेल निराला धातु स्वर्ण कर देता है।   छूकर मन के तारों को शब्द रसीले स्नेहिल भाव। रसधार बहती गंगा सी रिश्तो में हो नेह जुड़ाव।   प्यार भरे दो बोल मीठे पारस सा असर दिखाते हैं। कल…

    Read More पारस | Poem on parasContinue

  • daga shayari
    शेरो-शायरी

    हाँ कभी भी न देना दग़ा तू मुझे | Daga shayari

    ByAdmin February 11, 2022October 20, 2022

    हाँ कभी भी न देना दग़ा तू मुझे ( Haan kabhi bhi na dena daga tu mujhe )   हाँ कभी भी न देना दग़ा तू मुझे प्यार करना वफ़ा से सदा तू मुझे   जीस्त से दूर हो ग़म सभी उम्रभर आज ऐसी कोई दे दुआ तू मुझे   प्यार का ही चढ़ा है…

    Read More हाँ कभी भी न देना दग़ा तू मुझे | Daga shayariContinue

  • Poem on world of hate in Hindi
    कविताएँ

    नफरत की दुनिया | Poem on world of hate in Hindi

    ByAdmin February 10, 2022

    नफरत की दुनिया ( Nafrat ki duniya )   कितनी अजीब है यह कितनी लगे बेगानी नफरत की यह दुनिया ये कैसी है कहानी   झूठ कपट भरा पड़ा इस मतलबी संसार में नफरतों का जहर घुला लोगों के व्यवहार में   तीर सरीखे बोल कड़वे शक की सुई घूमती वहम की कोई दवा नहीं…

    Read More नफरत की दुनिया | Poem on world of hate in HindiContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 632 633 634 635 636 … 836 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search