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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Saraswati Vandana
    कविताएँ

    हे माँ ! सरस्वती वरदायिनी ! | Saraswati Vandana

    ByAdmin February 6, 2022

    हे माँ ! सरस्वती वरदायिनी ! ( He Maa ! Saraswati Varadayini ! )     हे माँ ! सरस्वती वरदायिनी ! जगत चेतना बोध प्रदायिनी वीणा पाणी हंस वाहिनी जनमानस उरलोक निवासिनि अपने कल्याणी आँचल में मुझको लेकर पावन कर दो !   ध्यान तुम्हारा कर पाऊॅं मैं शरण तुम्हारी आ पाऊॅं मैं चरण…

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  • Essay in Hindi on digital India
    निबंध

    निबंध : डिजिटल इंडिया | Essay in Hindi on digital India

    ByAdmin February 6, 2022December 3, 2022

    निबंध : डिजिटल इंडिया ( Digital India : Essay in Hindi )   प्रस्तावना ( Preface ) :- डिजिटल इंडिया भारत सरकार की एक नई पहल है। जिसका उद्देश्य भारत को समृद्ध बनाना है। डिजिटल इंडिया के माध्यम से देश को विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।…

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  • Ghazal jhooth gharon par kaabij tha
    शेरो-शायरी

    झूठ घरों पर काबिज़ था | Jhooth Shayari

    ByAdmin February 6, 2022January 29, 2023

    झूठ घरों पर काबिज़ था ( Jhooth gharon par kaabij tha )     झूठ घरों पर काबिज़ था करना यूँ नाजाइज़ था   साथ न दे वो मुश्किल में रब अपना तो हाफ़िज़ था   झूठ फ़रेबी था दिल से समझा जिसको वाइज़ था   चाहे  वो जो काम ग़लत मंजूर न वो हरगिज़…

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  • कश्ती और पतवार | Poem on kashti aur patwar
    कविताएँ

    कश्ती और पतवार | Poem on kashti aur patwar

    ByAdmin February 5, 2022February 6, 2022

    कश्ती और पतवार ( Kashti aur patwar )     साहिल से कहने लगी कश्ती बड़े प्यार से। आगे बढ़ती मैं सदा मांझी की पतवार से।   नैया पार लगाये मांझी ले करके पतवार। भवसागर पार लगाए जग का वो करतार।   मंझधार में डूबी नैया बिन नाविक पतवार। जिंदगी के सफर में सदा बांटो…

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  • देखो योगी आया है | Poem On Yogi Adityanath
    कविताएँ

    देखो योगी आया है | Poem On Yogi Adityanath

    ByAdmin February 5, 2022February 6, 2022

    देखो योगी आया है ( Dekho yogi aya hai )   भगवा चोला भगवा साफा,भगवा ध्वज लहराया है। रूद्रों की वो माला पहन के, देखो योगी आया है।   काशी मथुरा और अयोध्या को, चमकाने आया है। धर्म सनातन का परचम, जग में लहराने आया है।   उठो सनातन वंशी तुम आर्यो के वंशज सजक…

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  • मैं भारतीय हूं | Poem Main Bharatiya Hoon
    कविताएँ

    मैं भारतीय हूं | Poem Main Bharatiya Hoon

    ByAdmin February 5, 2022February 6, 2022

    मैं भारतीय हूं ( Main Bharatiya Hoon )     मैं भारतीय हूं सभी धर्मों का सदा आदर करता हूं। संस्कृति उपासक हूं शुभ कर्मों से झोली भरता हूं।   शौर्य पराक्रम स्वाभिमानी रगों से गहरा नाता है। रणभूमि में जोहर दिखलाना शमशीरों से आता है।   अतिथि आदर करना पावन परिपाटी वतन की। उस…

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  • लबों पर रोज़ ये चर्चा रहा है | Ghazal
    शेरो-शायरी

    लबों पर रोज़ ये चर्चा रहा है | Ghazal

    ByAdmin February 4, 2022May 31, 2022

    लबों पर रोज़ ये चर्चा रहा है ( Labon par roz ye charcha raha hai )     लबों पर रोज़ ये चर्चा रहा है उसी से अब नहीं रिश्ता रहा है   नहीं वो पास में ये ही सही अब ग़ज़ल  मैं याद में सुनता रहा है   मिली है कब वफ़ा सच्ची किसी…

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  • Poem on anger in Hindi
    कविताएँ

    क्रोध | Poem on Anger in Hindi

    ByAdmin February 3, 2022January 29, 2023

    क्रोध ( Krodh )   क्रोध की अपनी सीमा है और, क्रोध की भी मर्यादा है। सही समय पर किया क्रोध, परिणाम बदलता जाता है।   राघव ने जब क्रोध किया तब, सागर भय से कांप उठा, स्वर्ग पधारे जटायु जब, क्रोधित हो रावण से युद्ध किया।   समय पे क्रोधित ना होने का, दण्ड…

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  • mandakini ek kavya tarang
    साहित्यिक गतिविधि

    अलायंस क्लब अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ दयाशंकर जांगिड़ ने किया मंदाकिनी एक काव्य तरंग साझा संकलन का विमोचन

    ByAdmin February 3, 2022

    अभिव्यक्ति प्रकाशन द्वारा प्रकाशित संकलन मंदाकिनी एक काव्य तरंग में नवलगढ़ के कवि रमाकांत सोनी की साझा संकलन में रचनाएं प्रकाशित हुई। शुभचिंतकों व मित्रों ने हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। डा मनीष शर्मा, डा मीनाक्षी शर्मा,डा अरविंद वशिष्ठ, सज्जन जोशी,संत कुमार सारथी, सुरेश कुमार जांगिड़, काशीनाथ मिश्रा, महेश कुमार मिश्रा, श्रीकांत पारीक, महेश कुमार…

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  • Poem on shakuntal
    कविताएँ

    शकुंतला | Poem on shakuntala

    ByAdmin February 3, 2022February 3, 2022

    शकुंतला ( Shakuntala )     गुमनाम हुआ इस तन से मन, बस ढूंढ रहा तुमको प्रियतम। चक्षु राह निहारे आ जाओ, निर्मोही बन गए क्यों प्रियतम।   क्या प्रीत छलावा था तेरा, या मुझमें ही कुछ दोष रहा। क्यों शकुंतला को त्याग दिया, यह यौवन काल हुआ प्रियतम।   क्यों भूल गए हे नाथ…

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