नया साल | Poem Naya Saal
नया साल ( Naya Saal ) सर्द सी इस शाम में सोचा कुछ तेरे नाम लिख दूँ….. शायद लफ्ज़ों की गर्मी से पिघल जाये जमी है जो बर्फ तेरे मेरे दरमियां गिले शिकवे जो हो ‘ गर चले जायें साथ ही जाते हुये साल के…. क्यों न आगाज़ करें इक…
नया साल ( Naya Saal ) सर्द सी इस शाम में सोचा कुछ तेरे नाम लिख दूँ….. शायद लफ्ज़ों की गर्मी से पिघल जाये जमी है जो बर्फ तेरे मेरे दरमियां गिले शिकवे जो हो ‘ गर चले जायें साथ ही जाते हुये साल के…. क्यों न आगाज़ करें इक…
शेर की कविताए ( Sher ki kavitayen ) हाँ दबे पाँव आयी वो दिल में मेरे, दिल पें दस्तक लगा के चली फिर गयी। खोल के दिल की कुण्डी मैं सोचूँ यही, मस्त खूँशबू ये आके कहाँ खो गयी॥ हाँ दबे पाँव…. सोच मौका दोबारा मिले ना मिले, ढूँढने मैं लगा जिस्म सें…
इसलिए फूल भेजा नहीं प्यार का ( Isaliye phool bheja nahin pyar ka ) इसलिए फ़ूल भेजा नहीं प्यार का! था फ़रेबी से भरा दिल बहुत यार का इसलिए ख़त लिख पाया नहीं हूँ उसे बेवफ़ा दिल है उस यार दिलदार का रिश्ता रखना है तो रख वरना तोड़ दें यूं…
रंग ( Rang ) रंगो की समझ हो तो तस्वीर बना दो। छंदो की समझ हो तो फिर गीत बना दो। जज्बात मे लहर हो तो प्यार तू कर ले, जो कुछ नही आता तो दिवाना बना दो। दिल पे तुम्हारी चाहतो के जो निशान है। वो घाव बडे गहरे है और लाइलाज…
नहीं दिल तू कभी अपना ख़फ़ा रखना ( Nahi dil tu kabhi apna khafa rakhna ) नहीं दिल तू कभी अपना ख़फ़ा रखना मुहब्बत का हमेशा वास्ता रखना हमेशा साथ रहना हम सफ़र बनकर नहीं मुझसे कभी खुद को जुदा रखना मुसीबत दूर तुझसे ही रहेगी हर लबों पे रोज़ तू…
विरह ( Virah ) वो अपनी दुनिया में मगन है, भूल के मेरा प्यार। मैं अब भी उलझी हूँ उसमें, भूल के जग संसार। याद नही शायद मैं उसको,ऋतु बदला हर बार। विरह वेदना में लिपटी मैं, प्रीत गयी मैं हार। मैं राघव की सिया बनी ना, जिसकी प्रीत सहाय। मैं कान्हा…
देशी प्रोड्यूसर की गांधी ( Deshi producer ki Gandhi ) देशी प्रोडयूसर अभी तक पश्चाताप कर रहा है। उसे इस बात को अब तक मलाल है कि एक विदेशी प्रोडयूसर भारत आया, उसने हमारे पूज्य बापू पर गांधी फिल्म बनाई और यहाॅं के बाक्स आफिस और वहाॅ के आठ आस्कर लूट लिये । गांधी पर…
हुंकार भरो ( Hunkar bharo ) तेल फुलेल क्रीम कंघी से, नकली रूप बनाओगे। या असली सौन्दर्य लहू का, आनन पे चमकाओगे। रक्त शिराओ के वेगों को, रोक नही तुम पाओगे। क्राँन्ति युक्त भारत पुत्रों के,सामने गर तुम आओगे। हम आर्यो के वंशज है जो, दुर्गम पथ पर चल कर भी।…
उल्फ़त में ( Ulfat mein ) उल्फ़त में ऐ यार किसी की ऐसा लूटे है क्या हाल सुनाये इतना अंदर से टूटे है क्या है तेरा मेरा रिश्ता समझें क्या तुझको ख़्वाबों से तेरे रोज़ सनम हम महके है जो चाहे हम हल हो पाता काम नहीं कोई दौड़े है बद क़िस्मत…
ये मोहब्बत की दुनिया ( Ye mohabbat ki duniya ) सोनू रब से मुझे कुछ भी नहीं बस तेरी मोहब्बत चाहिए मेरे बुझे हुए दिल में तुमने मोहब्बत के दीप को जलाया भावनाओं को भरकर अपनी मोहब्बत का जादू चलाया मोहब्बत में मैंने सब हारना चाहा मगर सब कुछ है पाया तुम मोहब्बत…