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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • श्राद्ध पक्ष
    कविताएँ

    श्राद्ध पक्ष | Shradh Paksha Kavita

    ByAdmin September 22, 2021September 23, 2021

    श्राद्ध पक्ष ( Shradh Paksh )   पुरखों  को  सम्मान  दें,  हैं  उनके ही अंश। तर्पण कर निज भाव से, फले आपका वंश।।   बदला  सारा  ढंग  है,  भूल  गए  सत्कार। तर्पण कर इतिश्री किया, छूट गए संस्कार।।   तब  कौवों  ने  बैठ के, रच दी सभा विशाल। श्राद्ध पक्ष अब आ गए, समय बड़ा…

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  • आह ग़म की रोज़ मिलती खूब है
    शेरो-शायरी

    आह ग़म की रोज़ मिलती खूब है | Sad ghazal

    ByAdmin September 22, 2021September 22, 2021

    आह ग़म की रोज़ मिलती खूब है  ( Aah gam ki roz milti khoob hai )   आह ग़म की रोज़ मिलती ख़ूब है! आँखें  रहती  रोज़  गीली  ख़ूब है   ए ख़ुदा भर दें ख़ुशी दिल में मेरे रहती दिल  में  ग़म  की गाह जलती ख़ूब है   नफ़रतों के ख़ंजर मारे है इतने…

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  • Essay In Hindi on GST
    निबंध

    जीएसटी पर निबंध | Essay In Hindi On GST

    ByAdmin September 21, 2021November 1, 2022

    जीएसटी पर निबंध ( Essay In Hindi On GST )   प्रस्तावना ( Preface ) :- GST (Goods and Services Tax ) वस्तु एवं सेवा कर का संक्षिप्त नाम है। भारत मे GST 01 जुलाई 2017 को लागू किया गया। यह एक समान अप्रत्यक्ष कर है, जो केंद्र और राज्य दोनों सरकारों द्वारा अलग-अलग चरणों में…

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  • मोहब्बत उसे भी थी
    कविताएँ

    मोहब्बत उसे भी थी | Prem Kavita

    ByAdmin September 21, 2021

    मोहब्बत उसे भी थी ( Mohabbat use bhi thi )   हां मोहब्बत उसे भी थी, वो प्यार का सागर सारा। उर तरंगे ले हिलोरे, अविरल बहती नेह धारा।   नेह सिंचित किनारे भी, पल पल में मुस्काते थे। मधुर स्नेह की बूंदे पाकर, मन ही मन इतराते थे।   कोई चेहरा उस हृदय को,…

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  • दिल फिदा यूं हुआ देखते देखते
    शेरो-शायरी

    दिल फिदा यूं हुआ देखते देखते | Ghazal

    ByAdmin September 21, 2021

    दिल फिदा यूं हुआ देखते देखते ( Dil fida yun hua dekhte dekhte )   दिल फ़िदा यूं हुआ देखते देखते ! बन  गया  आशना  बोलते बोलते   चाहता हूँ बने उम्रभर अब मेरा थक गया हूँ उसे सोचते सोचते   प्यार का सिलसिला चल पड़ा नफ़रत की दीवारे तोड़ते तोड़ते   बस गया शहर…

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  • महल अपनी गाते हैं
    कविताएँ

    महल अपनी गाते हैं | Kavita

    ByAdmin September 20, 2021

    महल अपनी गाते हैं ( Mahal apni gate hain )   ऊंचे महलों के कंगूरे, आलीशान दमक वाले। रौब जमाते मिल जाते, चकाचौंध चमक वाले।   मेहनतकश लोगों पर भारी, अकड़ दिखाते हैं। मोन रहती मजबूरी तब, महल अपनी गाते हैं।   शानो शौकत ऊंचा रुतबा, ऊंचे महल अटारी। झोपड़ियों को आंख दिखाते, बन ऊंचे…

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  • मुकदमा कंप्यूटर पर
    व्यंग्य

    मुकदमा कंप्यूटर पर | Vyang

    ByAdmin September 20, 2021September 21, 2021

    मुकदमा कंप्यूटर पर ( Vyang : Mukadma computer par )   भोपाल गैस त्रासदी की बरसी मंह बाये मातम के रूप में खडी रहती है । शोक, संवेदनाएं और श्रद्धांजलियां अपनी जगह है मगर पूरे घटनाक्रम पर प्रस्तुत है यह व्यंग्य । जय किशन जी का एक कारखाना चूहा मार दवा बनाने का भी था…

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  • यादें
    कविताएँ

    यादें | Kavita

    ByAdmin September 20, 2021

    यादें ( Yaaden )   बड़ी सुहानी लगती यादें, प्रेम भरी मनभावन सी। उर उमंग हिलोरे लेती, झड़ी बरसते सावन सी।   सुख-दुख के मेंघ मंडराये, यादें बस रह जाती है। घड़ी घड़ी पल पल रहकर, यादें पुरानी आती है।   हंसी खुशी के सुंदर पल, रह रहकर याद आते हैं। जैसे बहती सरिता धारा,…

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  • Bewafa shayari | ऐसा रोज़ मैं सिलसिला देखता हूँ
    शेरो-शायरी

    Bewafa shayari | ऐसा रोज़ मैं सिलसिला देखता हूँ

    ByAdmin September 20, 2021

    ऐसा रोज़ मैं सिलसिला देखता हूँ ( Aisa roz main silsila dekhta hoon )   ऐसा रोज़ मैं सिलसिला देखता हूँ ख़ुशी का बहुत रास्ता देखता हूँ   बहारों  में  बू  बेवफ़ाई  की महके वफ़ा का मैं मौसम ख़फ़ा देखता हूँ   नज़र आती है बेवफ़ा क्यों वो सूरत जब  भी  मैं  ये  आईना  देखता …

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  • निबंध : असहमति या मतभेद लोकतंत्र की नींव
    निबंध

    निबंध : असहमति या मतभेद लोकतंत्र की नींव | Essay In Hindi

    ByAdmin September 19, 2021

    निबंध : असहमति या मतभेद लोकतंत्र की नींव ( Disagreements or differences Foundations of democracy : Essay in Hindi )   प्रस्तवना : अभिव्यक्ति की लोकतंत्र स्वतंत्रता एक मानवाधिकार है। यह वह आधार है जिस पर लोकतंत्र का निर्माण होता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का कोई भी प्रतिबंध लोकतंत्र पर प्रतिबंध लगाता है। लोकतंत्र दुनिया…

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