ऐ जिन्दगी | Zindagi Par Shayari
ऐ जिन्दगी ( Ai Zindagi ) जिंदगी हर दिन एक जंग सी लगती है, कभी पहलू में मेरे तो , कभी तेरे लगती है, कभी पास आके बैठ, तो बताए हमे कितनी बेरहम लगती है, हर दिन ये मुझसे मेरे ही जवाबो पे एक नया सवाल पूछती है, की तू तो…
ऐ जिन्दगी ( Ai Zindagi ) जिंदगी हर दिन एक जंग सी लगती है, कभी पहलू में मेरे तो , कभी तेरे लगती है, कभी पास आके बैठ, तो बताए हमे कितनी बेरहम लगती है, हर दिन ये मुझसे मेरे ही जवाबो पे एक नया सवाल पूछती है, की तू तो…
रात्रिकाल ( Raatrikaal ) दिन भर करते काम जो,अब हो आई शाम। थके थके से चल रहे, छोड़के सारा काम।। सूरज ढलने से हुई, ठंडी तपती धूप। रात सुहानी आ गई ,बिखरी छटा अनूप।। चूल्हा घर-घर जल रहा,रोशन घर परिवार। कोई पशु को नीरता, कर रहा सार संभार।। टिमटिम तारे कर…
कुर्सी की लड़ाई ( Kursi ki ladai ) बड़े-बड़े दिग्गज उतरेंगे, महासमर चुनाव में। कुर्सी की खातिर नेताजी, होंगे खड़े कतार में। राजनीति की सेंके रोटियां, सत्ता के गलियारों में। वोटों का बाजार गर्म हो, वादों की भरमारों से। कुर्सी की लड़ाई में फिर, उठा पटक जारी होगी। शह मात का खेल…
खुदा की लिखी कोई तहरीर तुम हो ( Khuda ki likhi koi tahreer tum ho ) खुदा की लिखी कोई तहरीर तुम हो या किसी भूले ख्वाब की ताबीर हो तुम तस्सव्वुर में आये किसी ख्याल की तदबीर हो या तकाज़ा मेरी तकदीर का हो तुम मेरी किसी तमन्ना की जैसे तासीर…
अफसर और सूअर ( vyang Hindi : Afsar aur suar ) अफसर को सूअर से घिन आती थी । केवल सूअर को सूअर से घिन नहीं आती । कुछ आदमियों को सूअर से घिन आती है। अफसर आदमियों से ऊपर होंता है अतः उसे आदमियों और सूअर दोनो से घिन आती है। अफसर ने सुन…
झोपड़ी में बसते हैं भगवान ( Jhopdi mein baste hain bhagwan ) मेहनत मजदूरी जो करते, सदा चलते सीना तान। अटल रह सच्चाई पर, सबका करे आदर सम्मान। शील स्वभाव विनय भाव, ईमानदारी गुण प्रधान। घट घटवासी परम प्रभु, झोपड़ी में बसते भगवान। सबसे हिल मिलकर रहे, मदद करे अपना जान। ऊंच…
श्राद्ध पक्ष ( Shradh Paksh ) पुरखों को सम्मान दें, हैं उनके ही अंश। तर्पण कर निज भाव से, फले आपका वंश।। बदला सारा ढंग है, भूल गए सत्कार। तर्पण कर इतिश्री किया, छूट गए संस्कार।। तब कौवों ने बैठ के, रच दी सभा विशाल। श्राद्ध पक्ष अब आ गए, समय बड़ा…
आह ग़म की रोज़ मिलती खूब है ( Aah gam ki roz milti khoob hai ) आह ग़म की रोज़ मिलती ख़ूब है! आँखें रहती रोज़ गीली ख़ूब है ए ख़ुदा भर दें ख़ुशी दिल में मेरे रहती दिल में ग़म की गाह जलती ख़ूब है नफ़रतों के ख़ंजर मारे है इतने…
जीएसटी पर निबंध ( Essay In Hindi On GST ) प्रस्तावना ( Preface ) :- GST (Goods and Services Tax ) वस्तु एवं सेवा कर का संक्षिप्त नाम है। भारत मे GST 01 जुलाई 2017 को लागू किया गया। यह एक समान अप्रत्यक्ष कर है, जो केंद्र और राज्य दोनों सरकारों द्वारा अलग-अलग चरणों में…
मोहब्बत उसे भी थी ( Mohabbat use bhi thi ) हां मोहब्बत उसे भी थी, वो प्यार का सागर सारा। उर तरंगे ले हिलोरे, अविरल बहती नेह धारा। नेह सिंचित किनारे भी, पल पल में मुस्काते थे। मधुर स्नेह की बूंदे पाकर, मन ही मन इतराते थे। कोई चेहरा उस हृदय को,…