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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • हृदय मेरा पढ़ पाए
    कविताएँ

    हृदय मेरा पढ़ पाए | kavita

    ByAdmin August 10, 2021

    हृदय मेरा पढ़ पाए ( Hriday mera padh paye )   अन्तर्मन में द्वंद बहुत है, जाकर किसे दिखाए। ढूंढ रहा हूँ ऐसा मन जो, हृदय मेरा पढ़ पाए।   मन की व्याकुलता को समझे,और मुझे समझाए। राह दिखे ना प्रतिद्वंदों से, तब मुझे राह दिखाए।   बोझिल मन पर मन रख करके,हल्के से मुस्काए।…

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  • सावन आया उमड़ घुमड़
    कविताएँ

    सावन आया उमड़ घुमड़ | Geet

    ByAdmin August 10, 2021

    सावन आया उमड़ घुमड़ ( Sawan aya umad ghumad )   बरस रही है राष्ट्रधारा, सावन उमड़ा आता। रिमझिम रिमझिम मेघा बरसे, उर आनंद समाता   काली बदरिया उमड़ घुमड़, घूम घूम घिर आये। हरियाली से भरी धरा, सबको सावन भाये।   झूम झूम मस्ती में गाते, सब मिलकर नया तराना। मंद मंद बहारें बहती,…

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  • "घरेलू हिंसा" पर निबंध
    निबंध

    Essay In Hindi | “घरेलू हिंसा” पर निबंध

    ByAdmin August 9, 2021August 9, 2021

    “घरेलू हिंसा” पर निबंध ( Essay in Hindi on domestic violence ) प्रस्तवना :- घरेलू हिंसा से तात्पर्य उस हिंसा और दुर्व्यवहार से है जो घरेलू हिंसा जैसे विवाह के बाद में होती है। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि घरेलू हिंसा केवल शारीरिक नहीं है, बल्कि किसी भी प्रकार का व्यवहार है जो पीड़ित…

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  • शिव महिमा
    कविताएँ

    शिव महिमा | Shiv Mahima Par Kavita

    ByAdmin August 9, 2021

    शिव महिमा  ( Shiv Mahima Par Kavita )   हिम शिखरों से भोले के, जयकारे आते है, शंख और डमरू मिलकर, शिव कीर्तन गाते हैं।   शिव ही गगन धरा भी शिव ही, हमें बताते है, गान संग है गीत भी शिव, हम महिमा गाते हैं।   पंचतत्व निर्मित शिव से, शिव रूप दिखाते है,…

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  • कजरी 'सावन'
    कविताएँ

    कजरी सावन | Sawn Par Kavita

    ByAdmin August 9, 2021August 24, 2022

    कजरी ‘सावन’ ( Kajari savan )   अबकी सावन में हमै चाही चीज मनमानी सैंया। बरसइ रिमझिम पानी सैया, सबदिन कहां जवानी सैंया ना।। सासु ससुर तीरथ यात्रा पर चार महीने डटे रहें। ननद रहे ससुराल में अपने जेठ भी घर से हटे रहें। पास पड़ोसी घर न आवै दूर-दूर ही कटे रहें। नदी नार…

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  • बचपन के दिन
    कविताएँ

    बचपन के दिन | kavita

    ByAdmin August 9, 2021

    बचपन के दिन ( Bachapan ke din ) पलकों  पे  अधरों  को  रख कर, थपकी देत सुलाय। नही रहे अब दिन बचपन के, अब मुझे नींद न आय।   सपने  जल गए भस्म बन गई, अब रोए ना मुस्काए, लौंटा दो कोई  बचपन के दिय, अब ना पीड़ सहाय।   किससे मन की बात कहे,…

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  • क्रांतिवीर
    कविताएँ

    क्रांतिवीर | Kranti Diwas Par Kavita

    ByAdmin August 9, 2021

    क्रांतिवीर ( क्रांति दिवस पर अमर शहीदों के जज्बातों को सादर वंदन )   है हिमालय सा हौसला, सागर सी गहराई है। क्रांति काल में वीरों ने, प्राणों की भेंट चढ़ाई है। हंसते-हंसते झूल गए, वो क्रांतिवीर कमाल हुए। राजगुरु सुखदेव भगतसिंह, भारत मां के लाल हुए।   आजादी का दीवाना, वो जिद पर अड़…

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  • स्वतंत्रता दिवस/15 अगस्त
    निबंध

    स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त पर निबंध | 15 August par nibandh

    ByAdmin August 8, 2021December 7, 2022

    निबंध: स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त ( Independence day 15 August : Essay In Hindi ) प्रस्तवना ( Preface ) :- 15 अगस्त 1947 भारत के स्वर्णिम इतिहास में अंकित है। यह वह दिन है जब भारत को 200 साल के ब्रिटिश शासन से आजादी मिली थी। यह एक कठिन और लंबा अहिंसक संघर्ष था जिसमें…

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  • सुमन हिय के खिल गये
    कविताएँ

    सुमन हिय के खिल गये | Geet

    ByAdmin August 8, 2021

    सुमन हिय के खिल गये ( Suman hiye ke khil gaye )   मुस्कान लबों पर आए, सब मिल गीत गाए। खुशियों की बारिश में, हमको नहाना है। उर प्रेम भाव पले, आशाओं के दीप जगे। प्यार भरे दीप हमें, दिलों में जगाना है।   भाव उर में खिल उठे, सपने सुनहरे सजाना है। रौनक…

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  • नीरज चोपड़ा
    कविताएँ

    नीरज चोपड़ा | Niraj Chopra Par Kavita

    ByAdmin August 8, 2021August 8, 2021

    नीरज चोपड़ा ( Niraj Chopra Par Kavita )   सुहाषिनी सुदर्शनी सी लगी, लो शुभ बिहान आ गया।   सौभाग्य से स्वर्णीम पदक ले, भारत का लाल आ गया।   गर्वित  हुआ  आनन्द  मन  उल्लास,  वृहद  छा  गया,   भगवा भवानी भारती के, सौन्दर्य निखर के आ  गया।     कवि :  शेर सिंह हुंकार देवरिया…

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