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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • मुसाफिर
    कविताएँ

    Hindi Kavita On Life | Hindi Kavita -मुसाफिर

    ByAdmin January 22, 2021February 25, 2021

    मुसाफिर ( Musafir ) … मुसाफिर तंन्हा हूँ मै, साथ चलोगे क्या, तुम  मेेरे। है मंजिल दूर, सफर मुश्किल , क्या साथ चलोगे मेरे। यही है डगर, एक मंजिल है तो फिर, साथ चलो ना, सफर कट जायेगा दोनो का, हमसफर बनोगे मेरे। … करेगे दुख सुख की बातें, बातों से खनक बढेगी। हमारे दिल…

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  • गणतंत्र दिवस
    कविताएँ

    India Republic Day Kavita | गणतंत्र दिवस

    ByAdmin January 22, 2021October 27, 2022

    गणतंत्र दिवस ( India Republic Day )   भारत माता के मस्तक पर, रोली अक्षत चंदन की। संविधान के पावन पर्व पर, वंदन और अभिनंदन की।   वर्षों के तप और धैर्य से, वीरों के लहू और शौर्य से, माताओं के जिन पुत्रों ने, चलना सही न सीखा था, अंग्रेजों से लड़ लड़ कर, ये…

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  • संसय
    कविताएँ

    Sansaya Hindi kavita On Life – संसय

    ByAdmin January 22, 2021October 20, 2023

    संसय ( Sansaya Kavita)   मन के रावण को मारे जो, राम वही बन पाएगा, वरना सीता  को रावण से, कैसे  कौन  बचाएगा।   कुछ नर में रावण बसते है, कुछ नारी में सूर्पनखा, संस्कार को त्याग दिया तो, धर्म को कौन बचाएगा। दीपक के जलने से  बुझता, अन्धकार  रूपी  माया, मन मे जगता ज्ञान…

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  • मैने पाया  बहुत, मैने  खोया बहुत। जिन्दगी तेरे दर , मैने  रोया  बहुत। ख्वाब मैने बुना,जो हुआ सच मगर। वो मुकम्मिल नही, मैने ढोया बहुत।
    कविताएँ

    Sad Hindi Poem -बीते लम्हें

    ByAdmin January 21, 2021February 25, 2021

    बीते लम्हें ( Beete Lamhen Kavita )      मैने पाया  बहुत, मैने  खोया बहुत। जिन्दगी तेरे दर , मैने  रोया  बहुत।   ख्वाब मैने बुना, जो हुआ सच मगर। वो मुकम्मिल नही, मैने ढोया बहुत।   शेर से बन गया, लो मै हुंकार अब। सब समझते रहे, मै हूँ  बेकार अब।   मै  सींचा …

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  • उल्फ़त की सर्दी लग गयी है मुझे
    शेरो-शायरी

    Love Shayari -उल्फ़त की सर्दी लग गयी है मुझे

    ByAdmin January 21, 2021February 25, 2021

    उल्फ़त की सर्दी लग गयी है मुझे   ( Ulfat Ki Sardi Lag Gayee Hai Mujhe )     उल्फ़त की सर्दी लग गयी है मुझे! अब महसूस वो हो रही है मुझे   न जाने हवायें ये  कैसी चली किसी की अब दीवानगी है मुझे   करे है जो तल्ख़े ज़बां रात दिन उसी…

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  • तांडव ( फ़िल्म समीक्षा )
    सिनेमा

    Tandav Film Review -तांडव ( फ़िल्म समीक्षा )

    ByAdmin January 21, 2021February 25, 2021

    तांडव ( फ़िल्म समीक्षा ) ( Tandav – Film Review )   “तांडव” देखी। राजनीति का फुल डोज है इसमें। यद्यपि यह आते ही विवादों में उलझ गयी लेकिन सच कहूं तो कुछ द्विअर्थी डायलॉग और एकाध आपत्तिजनक द्रश्यों के अलावा विरोध करने के लिए कुछ खास नही है। चूंकि यह एक राजनीतिक सीरीज है…

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  • जंगल में चुनाव
    कहानियां | व्यंग्य

    व्यंग्यात्मक लघुकथा | जंगल में चुनाव

    ByAdmin January 20, 2021May 13, 2024

    जंगल में चुनाव ( व्यंग्यात्मक लघुकथा ) ( Jangal Mein Chunav ) शहर की भीड़-भाड़ से दूर किसी जंगल में एक शेर रहता था । जिसका नाम शेरख़ान था । अब वह बहुत बुढ़ा हो चुका था इसलिए उसे अपने खाने-पीने  व शिकार करने में बहुत परिश्रम करना पड़ता था। परन्तु शेरख़ान के जवानी के दिनों…

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  • कैसे-कैसे लोग
    कविताएँ | व्यंग्य

    Hindi Kavita By Binod Begana -कैसे-कैसे लोग

    ByAdmin January 20, 2021February 25, 2021

    कैसे-कैसे लोग ( Kaise-Kaise Log )     अक्ल के कितने अंधे लोग। करते क्या-क्या धंधे लोग।   मासूमों के खून से खेले, काम भी करते गंदे लोग।   रौब जमा के अबलाओं पर, बनते हैं मुस्तंडे लोग।   तन सुंदर कपड़ों से ढकते, मन से लेकिन नंगे लोग।   अपनाते दौलत की खातिर, बुरे-बुरे …

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  • बावरा मन
    कविताएँ

    Romantic Poetry In Hindi -बावरा मन

    ByAdmin January 20, 2021February 25, 2021

    बावरा मन ( Bawara Man )     बावरा   मन   मेरा,  हर  पल  ढूंढे   तुमको। नैना द्वारे को  निहारे, एकटक देखे  तुमको।   प्रीत  कहते  है  इसे, या  कि कोई रोग है ये। जो  झलकता तो नही, दर्द  का संयोग है ये।   कहना चाहूं कह न पाऊं, ऐसा  मनरोग है ये। झांझरी सा मन…

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  • खिल रहा वो फ़ूल गुलाब का
    शेरो-शायरी

    Ghazal By Aazam Nayyar -खिल रहा वो फ़ूल गुलाब का

    ByAdmin January 20, 2021February 25, 2021

    खिल रहा वो फ़ूल गुलाब का ( Khil Raha Wo Phool Gulab Ka )     खिल रहा वो  फ़ूल गुलाब का ! हुस्न हो जैसे आफ़ताब का   इक खिला फ़ूल वो देखकर याद आया चेहरा ज़नाब का   हाँ बुरा सी  लगेगी नजर कर ले तू ये चेहरा हिजाब का   प्यार का…

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