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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • यहाँ रोज़ लब पे ख़ामोशी रही है!
    शेरो-शायरी

    Sad Shayari -यहाँ रोज़ लब पे ख़ामोशी रही है!

    ByAdmin January 14, 2021February 28, 2021

    यहाँ रोज़ लब पे ख़ामोशी रही है! ( Yahaan Roz Lab Pe Khamoshi Rahi Hai )   यहां रोज़ लब पे ख़ामोशी रही है! कहीं प्यार की ही लबों पे हंसी है     किसी ने तोड़ा प्यार से ही भरा दिल आंखों में भरी प्यार की ही नमी है   उदासी ख़ामोशी भरी जिंदगी…

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  • जरअ मत ! 
    कविताएँ

    Ja-Ra-Mat Bhojpuri Kavita -जरअ मत !

    ByAdmin January 14, 2021February 28, 2021

    जरअ मत !  ** (भोजपुरी भाषा में) ******   ना त राख हो जइब, कोयला नियर खाक हो जइब। बाॅडी मास ( Body, Mass ) सब हो जाई हवा, एकर नइखे कवनो दवा। इ प्रकृति के नियम बा- जे जरी ऊ साफ होई, जरला पर राख होई। हवा उड़िया ले जाई, अस्तित्व तोहार मिटाई। त…

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  • यादें यूँ भी पुरानी चली आई
    कविताएँ

    Geet by Dr. Alka Arora | यादें यूँ भी पुरानी चली आई

    ByAdmin January 14, 2021July 21, 2023

    यादें यूँ भी पुरानी चली आई ( Yaaden Yoon Bhi Purani Chali Aai )     मन की बाते बताये तुम्हें क्या है ये पहली मुहब्बत हमारी भले दिन थे वो गुजरे जमाने मीठी मीठी सी अग्न लगाई   हम तो डरते हैं नजदीक आके जान ले लो – ऐ जान हमारी कब से बैठे…

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  • जिंदगी कटी पतंग है
    कविताएँ

    Hindi Poetry On Life -जिंदगी कटी पतंग है

    ByAdmin January 14, 2021February 28, 2021

    जिंदगी कटी पतंग है ( Jindagi Kati Patang Hai )     जिंदगी कटी पतंग है, कठिनाइयों से तंग है!! छोर का पता नहीं कुछ डोर का पता नहीं जाएगी किधर किसी ओर का पता नहीं पता नहीं दूर कब , कब अपने संग है …   जिंदगी कटी पतंग है … कभी पास में…

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  • मकर संक्रांति ( हाइकु )
    हाइकु

    मकर संक्रांति ( हाइकु )

    ByAdmin January 14, 2021December 12, 2023

    मकर संक्रांति ( हाइकु )   १. संक्रांति पर्व गुड़ तिल चुड़ा का- महत्त्व बड़ा। २. उत्तरायण सूर्य की रश्मियों में- तेज बहुत। ३. दिखे आकाश पतंगबाजी कला- उड़ाएं बच्चे। ४. डुबकी लगे जलधि सरोवर- आलस्य मिटे। ५. दान ध्यान में दीन हीन की सेवा- रखें अग्रणी। ६. जीवन तणे सूरज सा चमके- आशीष यही।…

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  • मकर संक्रांति
    कविताएँ

    Hindi Poem Makarsankranti – मकर संक्रांति

    ByAdmin January 14, 2021January 15, 2025

    मकर संक्रांति ( 2 ) सूर्य देव ने मकर राशि में प्रवेश कर मकर संक्रांति के आने के दी है खबर सोंधी सोंधी गुड़ की वो महक कूटे जाते हुए तिल का वो संगीत मौज-मस्ती बेसुरे कंठो का गीत गंगा स्नान खिचड़ी का वो स्वाद आज होगी आकाश में पतंगबाजी रंग बिरंगी पतंग से भरा…

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  • Aankhen Unki Hai Maikhane
    शेरो-शायरी

    Romantic Ghazal -आँखें उनकी है मयखाने

    ByAdmin January 14, 2021October 26, 2022

    आँखें उनकी है मयखाने ( Aankhen Unki Hai Mainkhane )     आँखें उनकी है मयखाने। ओठ लगे जैसे पैमाने।।   गालों की रंगत है ऐसी। लाल -गुलाबी रँग मस्ताने।।   थाम दिलों को रह जाते है। जब लगते जुल्फ़े बिखराने।।   ढांप कभी आंचल से सर को। लगते मन ही मन शर्माने।।   घायल…

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  • जिंदगी की ही नहीं कोई सहेली है यहां
    शेरो-शायरी

    Sad Ghazal -जिंदगी की ही नहीं कोई सहेली है यहां

    ByAdmin January 14, 2021February 28, 2021

    जिंदगी की ही नहीं कोई सहेली है यहा     जिंदगी की ही नहीं कोई सहेली है यहां कट रही ये जिंदगी आज़म अकेली है यहां   खा गया हूँ मात उल्फ़त में किसी से मैं यारों प्यार की इक चाल मैंनें भी तो खेली है यहां   नफ़रतों की ही मिली है चटनी खाने…

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  • Makar Sankranti Parv
    निबंध

    Essay In Hindi On Makar Sankranti | मकर संक्रांति पर निबंध

    ByAdmin January 13, 2021December 7, 2022

    मकर संक्रांति पर निबंध ( Makar Sankranti par nibandh )   प्रस्तावना  ( Preface )  :- मकर संक्रांति भारत के प्रमुख त्योहारों मे से एक खास त्यौहार है। यह देश भर में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाती है। लेकिन कभी-कभी यह 13 जनवरी या फिर 15 जनवरी…

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  • खंजर
    कविताएँ

    खंजर

    ByAdmin January 13, 2021January 16, 2021

    खंजर **   नरम  पत्तों  के  शाख से हम भी बहुत ही कोमल थे पर। है छीला लोगो ने यू बार-बार की अब हम,खंजर से हो गये।   ** जिसे  ही  माना  अपना  उसने  ही  आजमाया  इतना। कि शेर हृदय के कोमल भाव भी सूख के,पिंजर से हो गये।   ** मिट  गये  भाव  सुधा …

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