दिल अपना ग़रीब है
दिल अपना ग़रीब है ख़ुशी से दिल अपना ग़रीब है कब दिल अपना खुशनसीब है गिला क्या करुं ग़ैर से भला यहां तो अपना ही रकीब है किसे मैं हाले दिल सुनाऊँ अब नहीं कोई भी अपना हबीब है तन्हा हूँ नगर में बहुत यहां नहीं कोई मेरे करीब है…
दिल अपना ग़रीब है ख़ुशी से दिल अपना ग़रीब है कब दिल अपना खुशनसीब है गिला क्या करुं ग़ैर से भला यहां तो अपना ही रकीब है किसे मैं हाले दिल सुनाऊँ अब नहीं कोई भी अपना हबीब है तन्हा हूँ नगर में बहुत यहां नहीं कोई मेरे करीब है…
एक तरफा प्यार है जिसके दिल में एक तरफा प्यार है अश्क आंखों में ही उसकी यार है जख़्म इतनें है मिले रूह तक कर गया वो जिंदगी को आजार है ख़्वाब टूटे है आंखों से ऐसे कल नींद से आंखें मेरी बेदार है प्यार की बातें न थी लब…
तेरी ये बातें ( हाइकु ) 1 तेरी ये बातें है झुठे सनम ये तेरे वो वादे 2 देखी है रोज़ मैंनें तो ए सनम तेरी ही राहें 3 दिया है दग़ा प्यार में ही निकली दिल से आहें 4 गुम कहीं वो ढूंढ़ती है उसको रात दिन…
हर घड़ी ग़म तेरे उठाने है हर घड़ी ग़म तेरे उठाने है अश्क आंखों से अब गिराने है तोड़ी सारी रस्में उसी ने थी वादे फ़िर भी हमें निभाने है आपकी याद में सनम अब तो दिल को ताउम्र ग़म उठाने है इक दिन सबको झूठी मुहब्बत के गुजरे वो…
शरद का चाँद ***** शरद का चाँद लिए दिखा आज अंबर, चांदनी में नहाया जग दिख रहा अतिसुंदर। जगमगा रहा जग सारा रौशनी में नहाकर, कभी छत तो कभी आंगन से- निहार रहा हूं नीलांबर। पछुए की छुअन से सिहरन सी हो रही है, देख चांदनी , चकोरी विभोर हो रही है। उमड़ रहा नयनों…
हाथ में वरना मेरे ख़ंजर नहीं हाथ में वरना मेरे ख़ंजर नहीं! दुश्मनों के छोड़ता मैं सर नहीं कट रही है जिंदगी फुटफाट पे मासूमों पे सोने को बिस्तर नहीं लौट आया शहर से मैं गांव फ़िर ढूंढ़ता से भी मिला वो घर नहीं सिर्फ़ आता मंजर नफ़रत का नजर…
हाँ वो कितनी कली देखो हसीन है हाँ वो कितनी कली देखो हसीन है! अल्लाह की क़सम वो बहतरीन है अल्लाह दिल से उसको ही भुला दें तू उसकी तरफ़ मेरा हर पल ज़हीन है की प्यार से कैसे जोते भला यारों नफ़रत में बट गयी यारों ज़मीन है हमला…
दिलों को तोड़ने वाले कहां इंसान होते है दिलों को तोड़ने वाले कहां इंसान होते है। नहीं ईंसानियत की वो कभी पहचान होते है।। लगाकर ठेस वो दिल को दिवानों की तरह अक्सर। खुशी इज़हार करते है बहुत शैतान होते है।। कभी अहसान मानेंगे नहीं चाहे करो कुछ भी। भुला दे बात …