Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • जिंदगी भर वो परायी दोस्ती होने लगी
    शेरो-शायरी

    जिंदगी भर वो परायी दोस्ती होने लगी | Zindagi shayari in Hindi

    ByAdmin September 21, 2020November 15, 2022

    जिंदगी भर वो परायी दोस्ती होने लगी ( Zindagi bhar wo parai dosti hone lagi )      जिंदगी भर वो परायी दोस्ती होने लगी इस क़दर उससे मेरी दुश्मनी होने लगी   कर गया रिश्ता वफ़ाये घायल देकर बेदिली अब भुलाने को उसी ही मयकशी होने लगी   इसलिए मैं लौट आया गांव अपनें…

    Read More जिंदगी भर वो परायी दोस्ती होने लगी | Zindagi shayari in HindiContinue

  • ये चक्कर नया-नया है
    शेरो-शायरी

    ये चक्कर नया-नया है | Amit Ahad Ki Shayari

    ByAdmin September 21, 2020November 15, 2022

    ये चक्कर नया-नया है ( Ye chakkar naya-naya hai )    दुनिया की सैर का ये चक्कर नया-नया है जिस ओर देखता हूँ मंज़र नया-नया है   बिल्कुल अलग जहां से हालत है मेरे दिल की अन्दर से ये पुराना बाहर नया- नया है   बेचैन इसलिए हूँ मख़मल की सेज पर मैं मेरे लिये…

    Read More ये चक्कर नया-नया है | Amit Ahad Ki ShayariContinue

  • अब तो उसी की आरजू होने लगी
    शेरो-शायरी

    अब तो उसी की आरजू होने लगी | Aarzoo shayari in Hindi

    ByAdmin September 20, 2020November 15, 2022

    अब तो उसी की आरजू होने लगी ( Ab to usi ki aarzoo hone lagi )    प्यार की ही ये किसी से गुफ़्तगू होने लगी रात दिन अब तो उसी की आरजू होने लगी   खो गया मिलकर हंसी मुखड़ा मुझसे जो भीड़ में शहर की अब हर गली में जुस्तजू होने लगी  …

    Read More अब तो उसी की आरजू होने लगी | Aarzoo shayari in HindiContinue

  • अस्तीन के सांप
    कविताएँ

    अस्तीन के सांप | Poem aasteen ke saanp

    ByAdmin September 20, 2020November 15, 2022

     अस्तीन के सांप  ( Aasteen ka saanp )    मेरे अपनों ने मुझे,अपनों से दूर कर दिया || 1.कुछ अपने जो पराये हो गए,पराये मेरे अपने हो गए | अपनों को खो दिया पराया मान,वो अब सपने रह गए | कुछ खास अपनों को जी-जान से,अपना बनाना चाहा | सरेआम दगा दे गए दिखाबा किया,बस…

    Read More अस्तीन के सांप | Poem aasteen ke saanpContinue

  • वक्त के सामने सर झुकाना पङा
    शेरो-शायरी

    वक्त के सामने सर झुकाना पङा | Waqt shayari

    ByAdmin September 20, 2020November 13, 2022

    वक्त के सामने सर झुकाना पङा ( Waqt ke samne sar jhukana pana )    वक्त के सामने सर झुकाना पङा। मूढ के साथ भी है निभाना पङा।। हो गया है ज़माने में पैसा बङा। दौर माता- पिता का पुराना पङा।। मतलबी हो गए आज रिश्ते सभी। नेह भाई -बहन को गँवाना पङा।। यारियाँ भी…

    Read More वक्त के सामने सर झुकाना पङा | Waqt shayariContinue

  • आप कहके मुकर जाइये।।
    कविताएँ

    आप कहके मुकर जाइये। Poem on mukar jaiye

    ByAdmin September 20, 2020November 13, 2022

    आप कहके मुकर जाइये ( Aap kahke mukar jaiye )      अब इधर न उधर जाइये। आप दिल में उतर जाइये।।   आईना भी जले देखकर, इस कदर न संवर जाइये।।   हमको अच्छा लगेगा बहुत, आप कहके मुकर जाइये।।   आखिरी इल्तिजा आपसे, मेरे घर से गुज़र जाइये।।   गांव है शेष भोले…

    Read More आप कहके मुकर जाइये। Poem on mukar jaiyeContinue

  • बिहार में पुल बह रहे हैं!
    कविताएँ

    बिहार में पुल बह रहे हैं | Kavita Bihar mein

    ByAdmin September 20, 2020November 13, 2022

    बिहार में पुल बह रहे हैं! ( Bihar mein pul bah rahe hain )  बिहार में विकास की गंगा नहीं पुल बह रहे हैं, नेता प्रतिपक्ष तो यही कह रहे हैं। बाढ़ से नवनिर्मित पुलों का ढ़हना जारी है, ढ़हने में अबकी इसने हैट्रिक मारी है। पहले सत्तरघाट- फिर किशनगंज और अब अररिया, के पुल…

    Read More बिहार में पुल बह रहे हैं | Kavita Bihar meinContinue

  • जो पेड़ था नीम का
    शेरो-शायरी

    जो पेड़ था नीम का | Poem on neem ka ped

    ByAdmin September 20, 2020November 13, 2022

     जो पेड़ था नीम का ( Jo ped tha neem ka )   गांव में मेरे पेड़ था नीम का कट गया वो जो पेड़ था नीम का   खेला करते थे जहां सब प्यार से वो नहीं है जो पेड़ था नीम का   बन गये पक्के मकां देखो जिधर गिर गया वो जो …

    Read More जो पेड़ था नीम का | Poem on neem ka pedContinue

  • मुहब्बत की बस ये कमाई रही
    शेरो-शायरी

    मुहब्बत की बस ये कमाई रही | Amit Ahad Ki Ghazal

    ByAdmin September 20, 2020November 9, 2022

    मुहब्बत की बस ये कमाई रही ( Muhabbat ki bas ye kamai rahi )     मुहब्बत की बस ये कमाई रही मुकद्दर में अपने जुदाई रही   बुरे लोगों से दूर हम तो रहे शरीफों से बस आशनाई रही   बहन की ये राखी का देखो कमाल सदा मुस्कुराती कलाई रही   ग़लत काम…

    Read More मुहब्बत की बस ये कमाई रही | Amit Ahad Ki GhazalContinue

  • दोस्त बनकर के रहो मत
    शेरो-शायरी

    दोस्त बनकर के रहो मत | Ghazal dost banker

    ByAdmin September 19, 2020November 9, 2022

    दोस्त बनकर के रहो मत ( Dost banker ke raho mat )    दोस्त बनकर के रहो मत दुश्मनी मुझसे करो मत   प्यार की आंखें मिलाओ मुंह चढ़ाकर के चलो मत   दिल से ही अपनें भुला दो हिज्र में उसके जलो मत   पढ़ ली है आंखें तुम्हारी और कुछ भी यूं कहो…

    Read More दोस्त बनकर के रहो मत | Ghazal dost bankerContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 794 795 796 797 798 … 832 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search