• हिज़्र भी वस्ल सा लगा है ये

    हिज़्र भी वस्ल सा लगा है ये इक नया तजरिबा हुआ है येहिज़्र भी वस्ल सा लगा है ये अश्कों को भी समेट कर रखतालोग कहते हैं मसख़रा है ये वास्ते तेरे बस ग़ज़ल कहतेइस सुख़न -साजी ने किया है ये दाल रोटी के रोज़ चक्कर मेंइश्क़ तो अब हुआ हवा है ये गुम तो.होशो-ख़िरद…

  • अखिल विश्व में

    अखिल विश्व में अखिल विश्व में ऐसा मौसम ,फूले और फले ।पुरवाई से पछियाओ भी ,खुलकर मिले गले।। छोटे और बड़े का कोई ,कभी न दम्भ भरे ।एक दूसरे के भावों का ,आदर हुआ करे ।मानवता का दीप क्षितिज पर ,जगमग सदा जले ।।अखिल विश्व में —– कोयल कुहके महके अमुआ ,बजे नित मल्हार ।शब्दों…

  • गोंद के लड्डू

    गोंद के लड्डू गोंद के लड्डू, मीठे से स्वाद,सर्दी की सर्द रातों में, गर्मी का फरमाया आबाद।ताजगी से भरी, एक खजाना छुपा,इनमें तो बसी है, सेहत की हर एक ख़ुशबू। गोंद के लड्डू, नारी की सेहत के लिए वरदान,बचपन से बुढ़ापे तक, सबके लिए बनाए गए इनका अनोखा सामान।खुशबू बिखेरे इनसे, स्वाद में कुछ खास…

  • प्रोफेसर डॉ. सुनीता सिंह ‘सुधा’ जीवन दर्शन | Professor Dr. Sunita Singh Sudha Jivan Darshan

    पता —-नाम — डा. सुनीता सिंह ‘सुधा’प्रोफेसर, हिंदी विभागमानविकी संकायओम स्टर्लिंग ग्लोबल विश्वविद्यालय ,हिसार — 125001 (हरियाणा)मोबा० : 9671619238मेल — sksinghsingh4146@gmail.com〰〰〰〰〰〰〰〰 प्रोफेसर (डा.) सुनीता सिंह ‘सुधा’शिक्षाविद,कवयित्री,ग़जलकर,कहानीकार का जीवन दर्शन :- प्रोफ़ेसर डाक्टर सुनीता सिंह इक्कीसवीं सदी की सुप्रसिद्ध कवयित्री, साहित्यकार, लेखिका, कहानीकार,गजलकार, छंदकार व शिक्षाविद हैं | प्रोफेसर ( डा.) सुनीता सिंह ‘सुधा’ हिंदी साहित्य…

  • मन की पुकार | Man ki Pukar

    मन की पुकार हर धड़कन तेरे नाम से धड़कती है,तेरी यादों की लौ दिल में चमकती है।आज भी तेरी हंसी का दीवाना हूँ मैं,तुझसे बेशुमार प्यार निभाना चाहता हूँ मैं। तेरे कदमों की आहट अब भी सुनाई देती है,मेरे ख्वाबों में हर रात तू ही दिखाई देती है।तेरे बिना हर लम्हा अधूरा सा है मेरा,आज…

  • कर दे जो दूर ग़म

    कर दे जो दूर ग़म कर दे जो दूर ग़म को किसी में हुनर नहींयारब क्या ग़म की रात की होगी सहर नहीं तड़पे जिगर है मेरा ये उनको ख़बर नहींये आग इश्क़ की लगी शायद उधर नहीं घर से निकलना आज तो मुश्किल सा हो गयामहफ़ूज नफ़रतों से कोई रहगुज़र नहीं चलती है चाल…

  • एक ही भूल | Ek hi Bhool

    एक ही भूल आज बरसों बाद तुम्हारा दीदार हुआ,दूरियाँ बनी हुई थी फिर से प्यार हुआ। लबों को तुम्हारे लबों का स्पर्श हुआ,बदन की महक का यूँ एहसास हुआ। ग़र ये ख़्वाब है तो ख़्वाब ही रहने दो,मैं सो रहा हूँ सोया हुआ ही रहने दो । चली क्यों नही जाती हो मेरी बातों से,जिस…

  • करूं भी तो क्या | Karoon Bhi to Kya

    करूं भी तो क्या हम सबकी जिंदगी भी एक सर्किल की तरह है,इसी में हम सब उलझें और घूमते रहते हैं हरदम।लाइन पर सीधा चलना तुम भी भूले और हम भी,अपने ही कामों में उलझे रहते हैं अब तो हरदम।। हम सबका था रंगीन जीवन अब बेरंग हो गया है,कलर प्लेट में है,या प्लेट कलर…

  • किसको दिल की पीर सुनाएं

    किसको दिल की पीर सुनाएं एक ख़ता की लाख सज़ाएं।किसको दिल की पीर सुनाएं। कोई नहीं इब्न-ए-मरियम सा।ज़ख़्म जिगर के किसको दिखाएं। जान ही जाते हैं जग वाले।राज़-ए-मुह़ब्बत कैसे छुपाएं। नफ़रत के सहरा में आओ।उल्फ़त के कुछ फूल खिलाएं। ख़ाली से बेगार भली है।मुफ़्त न अपना वक़्त गंवाएं। क़रिया-क़रिया पेड़ लगा कर।आबो-हवा को मस्त बनाएं।…

  • हमने तो | Hamne to

    हमने तो हमने कुछ और ढूँढा था तुझमेंहमने समझा थाप्यार का समन्दर हो तुमख़बर नहीं थीउजड़े सहरा का मंज़र हो तुमहम तो समझे थेकि दिल के ख़ला को भर जाओगे तुमयह ख़बर नहीं थीकि और भी तन्हा कर जाओगे तुमहमने तो कुछ और ढूँढा था तुझमें हम तो समझे थेकि इश्क़ की हक़ीक़त हो तुमयह…