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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • माँ से बना बचपन मेरा
    कविताएँ

    माँ से बना बचपन मेरा

    ByAdmin November 21, 2024November 21, 2024

    माँ से बना बचपन मेरा अजब निराला खेल बचपन का lदुनिया ने लिया पक्ष सक्षम का llबचपन ने लिया पक्ष माँ का lआज भी धुन माँ की लोरी की llसुनाओ , फिर से कहानी माँ की lमाँ से बना बचपन मेरा ll किसी ने पूँछा ” मुकद्दर ” क्या है ?मैं ने कहा मेरे पास…

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  • कभी तुम
    ग़ज़ल

    कभी तुम प्यार से बस इक नज़र देखो

    ByAdmin November 21, 2024November 21, 2024

    कभी तुम प्यार से बस इक नज़र देखो कभी तुम प्यार से बस इक नज़र देखोफ़क़त मुझ को भी अपना मान कर देखो विरासत में नहीं मिलते ख़ुशी के पलये काँटों से भरा मेरा सफ़र देखो लक़ब मुझ को मिले जो अब तलक सारेमिरी माँ की दुआ का है असर देखो अगर जो प्यार में…

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  • मानसिक अवसाद और पुस्तकें
    साहित्यिक गतिविधि

    वर्तमान पीढ़ी में बढ़ता मानसिक अवसाद और पुस्तकें

    ByAdmin November 20, 2024November 20, 2024

    परिचर्चा की समीक्षा अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी संगठन नीदरलँड द्वारा दिनांक 17 , नवंबर को “ वर्तमान पीढ़ी में बढ़ता मानसिक अवसाद और पुस्तकें “ जैसे सामयिक व गंभीर विषय पर रोचक व ज्ञानवर्धक परिचर्चा आयोजित की गई। प्रसिद्ध साहित्यकारों और शिक्षकों ने ज्ञानवर्धक जानकारी के साथ -साथ इस भयावह स्थिति से उबरने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव…

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  • मीरा जैसी कोई अब दीवानी नहीं
    ग़ज़ल

    मीरा जैसी कोई अब दीवानी नहीं

    ByAdmin November 20, 2024November 20, 2024

    मीरा जैसी कोई अब दीवानी नहीं प्यार की हमको दिखती कहानी नहींमीरा जैसी कोई अब दीवानी नहीं दर्द मुझको भी होता है समझो जरामुझमें भी है लहूँ कोई पानी नहीं वो भी देता है ताना मुझे ख़्वाब मेंप्यार की पास में जो निशानी नहीं धौंस सब पर दिखातें हैं वो ही यहांजिनकी बस में ही…

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  • सुदेश दीक्षित की कविताएं | Sudesh Dixit Poetry
    कविताएँ

    सुदेश दीक्षित की कविताएं | Sudesh Dixit Poetry

    ByAdmin November 20, 2024August 12, 2025

    आयेगा बुलावा तो जाना पड़ेगा आयेगा बुलावा तो जाना पड़ेगा।माया मोह से हाथ छुड़ाना पड़ेगा। मस्त हो नींद गहरी में होंगे तब हम।तुम्हें बार बार ना हमें बुलाना पड़ेगा। जो मरजी हो बेफिक्र हो करते रहना।सब ये देख हमें दिल ना दुखाना पड़ेगा। गिर जाएंगे जब अपनी ही नज़रों से हम।अपना जनाजा हमें तब खुद…

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  • कागा की कलम
    कविताएँ

    कागा की कलम | Kaga ki Kalam

    ByAdmin November 19, 2024December 16, 2024

    खोज जो खोजा वो पाया गोता मार गेहराई में ,सीपों में छुपे है मोती मिले गेहराई में ! बीते दिन जीवन के बेठे रहे किनारे पर ,जब ख़्याल आया खोजने का मिले गेहराई में ! कंगाल कोई नहीं सबके अंदर मोजूद माणक लाल ,डूबने का डर छलांग मारी मिले गेहराई में ! जान का ख़त़रा…

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  • भगवान महावीर का 2594 वां दीक्षा कल्याणक दिवस
    कविताएँ

    भगवान महावीर का 2594 वां दीक्षा कल्याणक दिवस

    ByAdmin November 19, 2024November 19, 2024

    भगवान महावीर का 2594 वां दीक्षा कल्याणक दिवस यह उमर हमारी बीत रहीसत् संगत में रमकरज्ञानामृत का पान कर लेमहावीर प्रभु का गुणगान कर ले ।नाशवान है काया हमारीक्यों करे मेरी मेरी ।इस तन को राख बननेलगे न इक पल की देरी ।महावीर प्रभु का गुणगान कर ले ।सबके साथ लगा है भारी ,जन्म –…

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  • मैं लिखता रहा अश्क धोते रहे
    शेरो-शायरी

    मैं लिखता रहा अश्क धोते रहे

    ByAdmin November 19, 2024November 21, 2024

    मैं लिखता रहा अश्क धोते रहे मैं लिखता रहा अश्क धोते रहे।सफे किस्मत के खुद पे रोते रहे। हम सुनाते रहे दास्तां दिल की अपनी।रात सारी सिर कंधे पे रख वो सोते रहे। उन्हें लगता था हम जिंदा है पर थे नहीं।अपनी ही लाश हम कंधों पर ढोते रहे। गंवाया नहीं आंखों से निकला अश्क।उठा…

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  • तेरे हुस्न पर कामरानी लुटा दी
    ग़ज़ल

    तेरे हुस्न पर कामरानी लुटा दी

    ByAdmin November 19, 2024November 19, 2024

    तेरे हुस्न पर कामरानी लुटा दी तेरे हुस्न पर कामरानी लुटा दीबुलंदी की हर इक निशानी लुटा दी ख़ुदा ने सँवारा सजाया चमन कोगुलों पे सभी मेहरबानी लुटा दी फ़िजाओं में नफ़रत का विष घोल कर केमुहब्बत की सारी कहानी लुटा दी ख़ज़ाना किया सारा खाली उन्होंनेकि हासिल हुई राजधानी लुटा दी करें रोज़ क़ुदरत…

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  • तेरा शिद्दत से इंतिज़ार किया
    ग़ज़ल

    तेरा शिद्दत से इंतिज़ार किया

    ByAdmin November 18, 2024November 18, 2024

    तेरा शिद्दत से इंतिज़ार किया उम्र भर बस ये रोज़गार कियातेरा शिद्दत से इंतिज़ार किया बेसबब ख़ुद को दाग़दार कियाजाने क्यों तेरा ऐतिबार किया ज़ीस्त में अब न लुत्फ़ है कोईक्या कहें घर को ही मज़ार किया क्यों न करते भी शुक्रिया उसकाजिसने मौसम को ख़ुशगवार किया ज़ख़्म खाये हज़ार थे हमनेमरहम-ए-वक़्त ने सुधार किया…

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