• ज़िंदगी को वो जहन्नुम ही बनाएगा

    ज़िंदगी को वो जहन्नुम ही बनाएगा ज़िंदगी में फूल को जो भी सताएगाज़िंदगी को वो जहन्नुम ही बनाएगा तू डराना चाहता है मौत को प्यारेये बता तू मौत को कैसे डराएगा बावली सी हो गयी मैं जानकर ये कीआज बेटा शौक से खाना पकाएगा मानता हूं तू बहुत नाराज़ है लेकिनभाई के बिन जश्न तू…

  • वो ख़ुद मुस्कुरा दी

    वो ख़ुद मुस्कुरा दी हिमाकत पे अपनी वो ख़ुद मुस्कुरा दीकिसी की ख़ता की किसी को सज़ा दी मुझे हौसला जब नहीं हो रहा थाउसी ने इशारों से हिम्मत बढ़ा दी मुझे फ़ैसला यूँ बदलना पड़ा थाशिकायत की उसने झड़ी सी लगा दी मैं औरों से तरजीह दूँ क्यों न उसकोमेरी साईं क़िस्मत थी उसने…

  • टी. एस. एलियट की अनुवादित कविता | अनुवादक- दीपक वोहरा

    टी. एस. एलियट एक प्रमुख अंग्रेजी कवि, निबंधकार, नाटककार, और आलोचक थे, जिनका जन्म 26 सितंबर 1888 को सेंट लुइस, मिसौरी, अमेरिका में हुआ था। 25 साल की उम्र में इंग्लैंड चले गए और वहीं बस गए। उन्होंने 20वीं सदी के आधुनिक काव्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आंखें जिन्हें आखिरी बार देखा था आँसुओं…

  • है ही नहीं | Hai hi Nahi

    है ही नहीं ( Hai hi nahi ) नेक गुण आदमी में है ही नहींसाफ़ पानी नदी में है ही नहीं हाथ को जोडकर खड़ा है परसादगी आदमी में है ही नहीं फूल ताज़े हैं पर है ये हालतशुद्धता ताज़गी में है ही नहीं मूर्ति के सामने खड़ा है परभावना बंदगी में है ही नहीं…

  • याद न आये, बीते दिनों की

    याद न आये, बीते दिनों की बैठी हूँ नील अम्बर के तलेअपनी स्मृतियों की चादर को ओढेजैसे हरी-भरी वादियों के नीचेएक मनमोहक घटा छा जाती हैमन में एक लहर-सी उठ जाती है।जैसे कोई नर्म घास के बिछौनों परकोई मन्द पवन गुजर जाती हैदेखकर प्रकृति नटी के इस रूप मेंबचपन में की गई शरारतेंफिर से आंखों…

  • शुभ कर्म | भजन

    शुभ कर्म ( Subh Karm ) मानव शुभ कर्म करें , गुणगान गायेंगे।देवत्व करम करें, देवता बन जायेंगे।।टेक।। सूरा जो पियेगा तो, सूअर बन जायेगा।शहद मीठा खायेगा ,स्वाद मीठा आयेगा।दर्पण में छाया हो, वही दिखलायेंगे।।1।। आग में हाथ डाले तो, जल ही जायेगा।सागर में जो गिरे, वह डूब ही जायेगा।कुआं में बोलोगे, वही बतलायेंगे।।2।। बिच्छू…

  • बहाना जो किया | Bahana jo Kiya

    बहाना जो किया ( Bahana jo Kiya ) बहाना जो किया तूने बहुत प्यारा बहाना हैमुझे तेरे बहाने को हकीकत से सजाना है आयी है जब जवानी स्वप्न आयेंगे जवानी केमुझे आगे का जीवन उन्हीं के साथ बिताना है कभी रोड़ा कभी गाली मिलेंगे रास्ते में परसफ़र रोके बिना प्रत्येक अड़चन को हटाना है हे…

  • दिल से | Dil Se

    दिल से ( Dil Se ) आप क्या,सबसे बाख़ुदा दिल से।हमने की है सदा वफ़ा दिल से। चैन हम को ज़रूर आएगा।आप दे-दें अगर दवा दिल से। हम पे मरता है या नहीं मरता।पूछ कर देखिए ज़रा दिल से। हम तो रूठे हैं बस मुरव्वत में।आपसे कब हैं हम ख़फ़ा दिल से। अपनी तक़दीर भी…

  • तेरी यादों के | Teri Yaadon Ke

    तेरी यादों के ( Teri Yaadon Ke ) तेरी यादों के मेघों से ,हर निशा दिवस ही मंगल है ।जो सीच रहा मन-मरुथल को ,वो मेघ सलिल गंगाजल है।। वर्षों से बरखा रूठ गई ,इस मुरझाई फुलवारी से।अब नील गगन को ताक रहे, मन मारे किस लाचारी से ।कब भाग्य विधाता रीझ सके ,उच्छवासों की…

  • बाजारीकरण की भेंट चढ़े हमारे सामाजिक त्यौहार।

    हिंदुस्तान त्योहारों का देश है। त्यौहार हमको सामाजिक और संस्कारिक रूप से जोड़ने का काम करते हैं। हमारी सांस्कृतिक और संस्कारिक एकता ही भारत की अखंडता का मूल आधार है। “व्रत-त्यौहारों के दिन हम देवताओं का स्मरण करते हैं, व्रत, दान तथा कथा श्रवण करते हैं, जिससे व्यक्तिगत उन्नति के साथ सामाजिक समरसता का संदेश…