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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • श्याम रंग नीला है या काला
    गीत

    दरस दिखाओ मेरे कान्हा

    ByAdmin November 26, 2024November 26, 2024

    दरस दिखाओ मेरे कान्हा दरस दिखाओ मेरे कान्हा, छेड़ो तुम मुरली की तान।हिया बावरा तुमको चाहे, जागे कितने हैं अरमान।। तेरी जोगन तुझसे पूछे,तेरा उर है क्यों पाषाण?पथ में कंटक और अंधेरा, लगता राह नहीं आसान।।द्वार निहारूं कब आओगे, सुनो सांवरे दे दो भानदरस दिखाओ मेरे कान्हा, छेड़ो अब मुरली की तान।। भोर मनोरम साँझ…

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  • बैगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना
    यात्रा बृतान्त

    बैगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना

    ByAdmin November 26, 2024November 26, 2024

    ये उन दिनों की बात है जब बचपन विदाई ले रहा था और तरुणाई अंगड़ाई लेने लगी थी.. जवानी सामने खड़ी थी और मैं उसे लपक कर ले लेने को उतावला सा हो रहा था। एक दिन यू ही किसी से खबर सुनी की फ़िल्म इंड्रस्टी का दिग्गज घराना कपूर परिवार के किसी सदस्य की…

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  • क्या पता कौन थे कहाँ के थे
    ग़ज़ल

    क्या पता कौन थे कहाँ के थे

    ByAdmin November 25, 2024November 25, 2024

    क्या पता कौन थे कहाँ के थे आते जाते जो कारवाँ के थेक्या पता कौन थे कहाँ के थे पंछियों को मुआवज़ा क्यों नइंरहने वाले इसी मकाँ के थे इत्र से कुछ गुरेज यूँ भी हुआफूल वो भी तो गुलसिताँ के थे सब हमेशा रहेगा ऐसे हीसारे झंझट इसी गुमाँ के थे एक रस्ता था…

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  • बरेली की संस्था का मुरादाबाद में आयोजन
    साहित्यिक गतिविधि

    बरेली की संस्था का मुरादाबाद में आयोजन

    ByAdmin November 25, 2024November 25, 2024

    फ़राज़ एकेडमी मुरादाबाद ने बरेली की शुभम मेमोरियल साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था के सहयोग से मुरादाबाद के पीपलसाना में एक गंगा-जमुनी कवि सम्मेलन का आयोजन किया। इस अद्वितीय साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजन में गंगा-जमुनी तहज़ीब की झलक दिखाई दी। पहला दौर: गंगा-जमुनी कवि सम्मेलन कवि सम्मेलन के पहले दौर की अध्यक्षता बरेली के प्रसिद्ध शायर…

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  • पयमाना हमारे आगे
    ग़ज़ल

    पयमाना हमारे आगे

    ByAdmin November 25, 2024November 25, 2024

    पयमाना हमारे आगे लाइये साग़रो-पयमाना हमारे आगेछोड़िये आप ये शर्माना हमारे आगेहुस्ने-मतला — क्या पियेगा कोई पयमाना हमारे आगेअब भी शर्मिंदा है मयखाना हमारे आगे हमने हर रुख से ज़माने का चलन देखा हैसोच के कहियेगा अफ़साना हमारे आगे रोक क्या पायेंगे राहों के अंधेरे हमकोशम्अ रौशन है फ़कीराना हमारे आगे हम वफ़ादार हैं उल्फ़त…

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  • वो सपनों में आकर सताने लगे हैं
    ग़ज़ल

    वो सपनों में आकर सताने लगे हैं

    ByAdmin November 25, 2024November 25, 2024

    वो सपनों में आकर सताने लगे हैं वो सपनों में आकर सताने लगे हैंमेरी धड़कनों को बढ़ाने लगे हैं बनाया था तिनकों से जो आशियानाअदू आके उसको जलाने लगे हैं क़यामत कहीं आ न जाए यहाँ परसितमगर को हम याद आने लगे हैं ज़माने ने ठोकर लगाई है उनकोतभी होश उनके ठिकाने लगे हैं कहीं…

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  • मनुमुक्त ‘मानव’, आईपीएस की 42वीं जयंती पर कवि-सम्मेलन आयोजित
    साहित्यिक गतिविधि

    मनुमुक्त ‘मानव’, आईपीएस की 42वीं जयंती पर कवि-सम्मेलन आयोजित

    ByAdmin November 24, 2024November 24, 2024

    6 महाद्वीपों और 18 देशों के 25 कवियों ने की सहभागिता नारनौल(डॉ.सत्यवान सौरभ)। मनुमुक्त ‘मानव’ मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा भारतीय पुलिस सेवा के दिवंगत अधिकारी डॉ. मनुमुक्त ‘मानव’ की 42वीं जन्म-जयंती पर अंतरराष्ट्रीय कवि-सम्मेलन का आयोजन आज किया गया। लगभग अढ़ाई घंटों तक चले इस स्मरणीय कवि-सम्मेलन में छह महाद्वीपों और अठारह देशों के पच्चीस कवियों…

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  • बुढ़ापा की लाठी
    कहानियां

    बुढ़ापा की लाठी | Laghu Katha

    ByAdmin November 24, 2024November 24, 2024

    नीमा को ससुराल आये तीन माह ही हुए थे ।वह रट लगा दी कि मैं अलग खाऊंगी। आज से चूल्हा अलग…! मैं आपके मां-बाप को भोजन नहीं दे सकती। राहुल के लाख समझाने के बावजूद भी नीमा पत्थर की लकीर बनी रही। राहुल के मां-बाप भी हारकर अपनी बहू नीमा को कह दिये तुम्हें जो…

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  • कोई कुछ भी करले
    कविताएँ

    कोई कुछ भी करले

    ByAdmin November 24, 2024November 24, 2024

    कोई कुछ भी करले कोई कुछ भी करले ऊ बाप ना होईहर मोड़ पर जो खड़ा रहे अइसन साथ ना होई । बिना सोचे समझे जो सर्वस्व करे निछावरअइसन केहू में जज्बात ना होई। कोई कुछ भी करले ऊ बाप ना होई … अपना से बड़ होखत देख जो दिल से निरेखेहर पल शुभे शुभे…

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  • बाल-प्रज्ञान
    पुस्तक समीक्षा

    बालमन का सुन्दर विश्लेषण करती है बाल-प्रज्ञान

    ByAdmin November 24, 2024November 24, 2024

    सन् 1989 में हरियाणा में जन्मे डॉ. सत्यवान सौरभ बालसाहित्य के एक सुपरिचित हस्ताक्षर हैं। साहित्यकार, पत्रकार और अनुवादक डॉ. सत्यवान सौरभ ने बच्चों के साथ ही बड़ों के लिए भी विपुल साहित्य सर्जन किया है। बाल कविता की पुस्तकों के साथ ही प्रौढ़ साहित्य में दोहा, कथा, कविता, अनुवाद, रूपान्तर, सम्पादन की कई कृतियों…

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