दरस दिखाओ मेरे कान्हा
दरस दिखाओ मेरे कान्हा दरस दिखाओ मेरे कान्हा, छेड़ो तुम मुरली की तान।हिया बावरा तुमको चाहे, जागे कितने हैं अरमान।। तेरी जोगन तुझसे पूछे,तेरा उर है क्यों पाषाण?पथ में कंटक और अंधेरा, लगता राह नहीं आसान।।द्वार निहारूं कब आओगे, सुनो सांवरे दे दो भानदरस दिखाओ मेरे कान्हा, छेड़ो अब मुरली की तान।। भोर मनोरम साँझ…
