Pari Aasman ki

परी आसमान की | Pari Aasman ki

परी आसमान की

( Pari aasman ki ) 

 

जब बात चल रही थी वहाँ आन-बान की
लोगों ने दी मिसाल मेरे खानदान की

मैं हूँ ज़मीन का वो परी आसमान की
कैसे मिटेगी दूरी भला दर्मियान की

देखूं मैं उसके नखरे या माँ बाप की तरफ़
सर पर खड़ी हुई है बला इम्तिहान की

कैसे यक़ीं दिलाऊं उसे अपनी बात का
धज्जी उड़ा दी उसने मेरे हर बयान की

बोते हैं वो बबूल तलब आम की करें
आफ़त में जान आ गई अब बाग़बान की

परवाह अपनी ख़ुद की करें भूलकर मुझे
मुझको कमी नहीं है यहांँ क़द्रदान की

साग़र मैं उठ के जाऊं तो जाऊं भी किस तरह
रोके हुए नज़र है मुझे मेज़बान की

 

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003
यह भी पढ़ें:-

इंसानियत का रथ | Insaniyat ka Rath

Similar Posts

  • फ़ौरन संभाल लेता है

    फ़ौरन संभाल लेता है वो गुफ़्तगू में मिसालों को डाल लेता हैबिगड़ती बात को फौरन संभाल लेता है बढ़ेगा कैसे मरासिम का सिलसिला उससेज़रा सी बात पे आँखे निकाल लेता है छुपाना उससे कोई राज़ है बड़ा मुश्किलवो बातों बातों में दिल भी खंगाल लेता है कशिश अजीब सी रहती है उसके लहजे मेंहरेक शख़्स…

  • बहाने कितने | Bahane Kitne

    बहाने कितने ( Bahane Kitne )    मुस्कुराने के बहाने कितने फर्क क्या,आएं रुलाने कितने ॥ अब यकीं रूठ किधर जा बैठा रंग बदले हैं ज़माने कितने ॥ बेअसर ख़ार भी है अब उसको सह लिया तल्ख़ व ताने कितने ॥ होती उस सम्त निगाहें सबकी कह गईं, उसके दिवाने कितने ॥ उसकी गैरहाज़िरी में…

  • किधर जाता है

    किधर जाता है राह-ए-उल्फ़त से परेशान, किधर जाता हैअपनी मंज़िल से भी अनजान किधर जाता है झूठ से हार के नादान किधर जाता हैमार के अपना तू ईमान किधर जाता है बिक रहा हूँ सरे बाज़ार तेरी शर्तो परदे के मुझको तू ये नुक़सान किधर जाता है तेरी यादों का उठा था जो मेरे सीने…

  • तिरंगे को और ऊँचा उठाने का वक़्त है | Tiranga Shayari

    तिरंगे को और ऊँचा उठाने का वक़्त है ( Tirange ko aur uncha uthane ka waqt hai )    अपने वतन का नाम बढ़ाने का वक़्त है इक दूसरे का साथ निभाने का वक़्त है ।। कुर्बानियों के गीत सुनाने का वक़्त है अहले वतन का जोश बढ़ाने का वक़्त है ।। लो आ गया…

  • मुझे अपना बना लो | Mujhe Apna Bana Lo

    मुझे अपना बना लो ( Mujhe Apna Bana Lo )   मुझे अपना बना लो सनम दिल में बसा लो //1 नहीं रक्खो ख़फ़ा दिल गले से तुम लगा लो //2 हसद दिल से मिटेगा मुहब्बत की दवा लो //3 सनम रिश्ता न तोड़ो मुहब्बत से निभा लो //4 बचोगे नफ़रतों से मुहब्बत की दुआ…

  • दुख ही दुख | Dukh Shayari Hindi

    दुख ही दुख ( Dukh hi dukh )   बोझ यहीं रहता है मन में दुख ही दुख झेले बचपन में याद बहुत आया आज मुझे खेला हूँ जिस घर आंगन में फ़ूल भरे दामन में कैसे वीरां है गुलशन गुलशन में और नहीं कोई भाता है तू रहती दिल की धड़कन में याद किसी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *