Phoolon ki kali

फूलों की कली | Phoolon ki kali | Chhand

फूलों की कली

( Phoolon ki kali )

मनहरण घनाक्षरी

 

महक गई वादियां,
महका चमन सारा।
फूलों की कलियां खिली,
मधुर चली बहार।

 

मधुबन में बहारें,
झौंका मस्त पवन का।
कलियों ने महकाया,
लो आने लगी बहार।

 

विविध भांति पुष्पो ने,
सुगंधित कलियों ने।
मदमस्त किया समां,
सुहानी लगी बयार।

 

महकते उपवन,
महकती महफिले।
मन की उमंगे सारी,
बह चलीं रसधार।

?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :- 

रक्तदान | Raktdan par chhand

Similar Posts

  • संगत | Sangat par chhand

    संगत ( Sangat )    अधरों पर मुस्कान हो, सुर सुरीली तान हो, वीणा की झंकार बजे, गीत जरा गाइए। नेह की बरसात हो, सुहानी सी प्रभात हो, अपनों का साथ मिले, जरा मुस्कुराइए। जीवन में बहार हो, मधुर सा संसार हो, मित्रों की संगत मिले, खुशियां मनाइए। पल-पल खुशी मिले, बने ऐसे सिलसिले, यश…

  • उपवास | Upwas chhand

    उपवास ( Upwas ) मनहरण घनाक्षरी   नेम धर्म व्रत करे विश्वास श्रद्धा भाव से प्रभु सुमिरन कर उपवास कीजिए   जब तप योग ध्यान सर्व शक्ति हरि मान दुर्गुण दोष मन से त्याग सुधा दीजिए   मन से करें जो पूजा व्रत निराहार रख कामना पूरी कर दे माला जप लीजिए   उपवास बड़ा…

  • साथी | छंद

    साथी ( Sathi ) मनहरण घनाक्षरी   वृंदावन सा हृदय, गोकुल सा मन मेरा। बजे बंशी मोहन की, झूम झूम गाइये। आंधी तूफां मुश्किलों का, सुख सागर हो जाना। मन भाती प्रीत साथी, मनमीत आइए। महका मधुमास सा, प्यार के मोती लुटाता। तेरा मेरा प्रेम सच्चा, रस बरसाइये। सद्भाव प्रेम आनंद से, तय सफर हो…

  • क्षमा | Poem in Hindi on Kshama

    क्षमा ( Kshama )  रूपहरण घनाक्षरी   दया क्षमा हो संस्कार, सदाचार और प्यार। परोपकार गुण को, घट नर ले उतार। व्यक्तित्व को चार चांद, यश कीर्ति हो अपार। क्षमा बड़ों का गहना, भव सागर दे तार। बड़े वही जगत में, छोटों को करते माफ। तारीफ में ताकत है, परचम ले विस्तार। क्षमा वीरों को…

  • समय रुकता नहीं | Samay rukta nahi | Chhand

    समय रुकता नहीं ( Samay rukta nahi ) मनहरण घनाक्षरी   वक्त निकला जा रहा, समय रुकता नहीं। कालचक्र की गति को, जरा पहचानिए।   शनै शनै बीत रहा, हाथों से निकले रेत। पल पल हर घड़ी, समय को जानिए।   काल की नियति जानो, ठहरता नहीं वक्त। समय को बलवान, जीवन में मानिये।  …

  • सर्वशक्ति कालिका | Sarvashakti Kalika

    सर्वशक्ति कालिका ( चामर छन्द ) 1सर्वशक्ति कालिका कराल रक्त दंतिका।शांभवी सुधा सती सुगम्य चंद्रघंटिका।।चंद्रिका सुबोधिनी गदा त्रिशूल धारिणी।हस्त शंख चक्र ले निशुंभ शुंभ तारिणी।। 2हे अजा सिता अगम्य मातु हे पताकिनी।दुर्गमा त्रिलोचनी विशाल दैत्य नाशिनी।।शारदे सँवार दे अबोध माम् तूलिका।ज्ञान के विहान से प्रकाशवान मूलिका।।(औषधीय जड़ी) 3दुष्ट शत्रु वंश बेल हारिणी कपालिनी।अट्टहास कालिका कुमारि…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *