Poem Khamosh Lab

खामोश लब | Poem Khamosh Lab

खामोश लब

( Khamosh lab ) 

 

जाने क्या कह जाते हैं तुम्हारे ये खामोश लब।
बहा देते हैं रसधार मधुर गीतों के तराने लब।

मुस्कानों के मोती प्यारे अधर सुरीले नैन तारे।
खुशी के दीप जलाते हंसते हुए चेहरे तुम्हारे।

होठों की रंगत भाती ठुमक ठुमक कर तुम आती।
महकता आंगन सारा दिल की घंटियां बज जाती।

दिल की बातें लबों पे जो भावों की रसधार बहाए।
खामोशी से लब कहते दिल तक दस्तक दे जाए।

लबों पे लगाम भला क्यों लब क्यों सिले जाते हैं।
जब जब लब ने चुप्पी तोड़ी रंग नीले हो जाते हैं।

लब से झरते शब्द सुरीले लब समां महकाते सारा
लब कहते दिल की बातें लब से बहती रसधारा।

प्रेम की कथाएं सारी लब से होकर आती है।
चैन की बंशी बजती मधुबन मे राधा गाती है।

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

मुंह में राम बगल में छुरी | Geet Munh mein Ram Bagal mein Churi

 

Similar Posts

  • प्रयागराज एयर शो | Prayagraj Air Show

    प्रयागराज ‘एयर शो’ ( Prayagraj Air Show )    हम गये रहे ‘एयर शो’ देखै जनसैलाब कै उठती लौ देखै एलन गंज में रहत रहे ‘यूपीएचईएससी’ कै तैयारी करते रहे अपने सब सखियन का लइकै कमरा से तो निकल गये लेकिन रेलवे ट्रैक पै जाके थोड़ा-सा हम ठिठक गये प्रयाग स्टेशन से लोगन वापस आवत…

  • ऐ जिंदगी तुझे | Aye zindagi

    ऐ जिंदगी तुझे ( Aye zindagi tujhe )   ऐ!जिंदगी ,बचपन से ही तुझे उलझते हुए देखा है पसीने से लथपथ पिता का शरीर देखा है मां की आंखों मे ममता का प्यार देखा है अमीरी और गरीबी में फरक देखा है जमीन से खड़े होकर फलक देखा है खुद को हमेशा आंसुओं से तरबतर…

  • कार्तिक पूर्णिमा | Kartik Purnima

    कार्तिक पूर्णिमा ( Kartik purnima )   कार्तिक पूर्णिमा पावन पर्व स्नान ध्यान दान का। देव दिपावली त्योहार मनाते सनातन विधान का। गंगा धारा में दीपक पूजन अर्चन हो श्रद्धा भाव से। मनोकामना पूर्ण होती धन वैभव हो शुभ प्रभाव से। सहस्त्रों नर नारी नदी तट भाव भक्ति से करें स्नान। नारायण की पूजा होती…

  • होली ने आकर कर डाला | Ghazal

    होली ने आकर कर डाला ( Holi ne aakar kar dala )     होली ने आकर कर डाला,सब कुछ गड़बड़ घोटाला है !  चेहरों के अंदर का चेहरा, धो-धो कर नया निकाला है !!    जो गले मिला  आकर उसने, कर डाला  खूब हरा नीला  यदिअधिकप्यारउमड़ातोफिर,करदियापकड़मुंहकालाहै !!    घर के पीछे कीगलियों से,छुप-छुपकर भागोगे…

  • भगवान के डाकिए | Bhagwan ke dakiye chhand

    भगवान के डाकिए ( Bhagwan ke dakiye )   फूलों की मस्त बहार, बहती हुई बयार। पेड़ पौधे नदी नाले, ईश्वर के डाकिए।   पशु पक्षी जीव जंतु, काले काले मेघ घने। हंसी वादियां पर्वत, ईश्वर के डाकिए।   चेहरे की चमक भी, होठों की मुस्काने सारी। दिलों की धड़कनें भी, ईश्वर के डाकिए।  …

  • विचार-धारा

    सच्चाई कौन दोस्त कौन दुश्मन फ़र्क़ नहीं पड़ता,कौन अपना कौन पराया फ़र्क़ नहीं पड़ता। हम चले मंज़िल की ओर एकदम अकेले,कौन रहबर कौन रहज़न फ़र्क़ नहीं पड़ता। सोच में सपने संजोये भावी भविष्य के,कौन नाकाम कौन कामयाब फ़र्क़ नहीं पड़ता। नक्कमे करते नुक्ताचीनी हर किसी काम में,कौन नेक कौन नादान फ़र्क नहीं पड़ता। करते जो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *