Poem on Subhash Chandra Bose in Hindi

क्रान्ति वीर सुभाष | Poem on Subhash Chandra Bose in Hindi

क्रान्ति वीर सुभाष

( Krantiveer subhash )

 

 

जो लाखों सिंह सपूत जननि,भारत माता ने जाए हैं !

आख्यानअनगिनत रोमांचक,जगइतिहासों ने गाए हैं !

 

उनसब में वीसुभाष श्रेष्ठतम, क्रान्तिवीर कहलाए हैं !

उन जैसे कठिन पराक्रम तो,कोई भी ना कर पाए हैं !

 

साधारण बीज धरा से उठ, साधारण पौधा बन पाया

पर जो बरगद का होता वह,ही तो वटवृक्ष बना पाया

 

चेतन सुभाष ने अंग्रेजी,शिक्षा,संस्कृति शासन सबसे

की घृणाऔर उनको स्वदेश, से सदा बहुत नीचे पाया

 

जिन घोर प्रपंची लोगों का, दुनिया में  सूरज  ना डूबा

जिनके शासन के कब्जे से,ना कोई भी था बच पाया

 

उन्हें  मात देने उसने  सब, नामुमकिन से  काम किये

ऐसी अजब  बनाई निज छवि, था हिटलर भी थर्राया

 

सरकार बनाकर फौज बना,भारत के बाहर भारत की

भारत के  बिछड़े बेटों को, भारत माता  से मिलवाया –

 

लाखों मानस तैय्यार किये,दिल्लीचलने उदघोष किया,

जीवट बलिदानों के उनको,स्वर्णिम सपने दिखलाए हैं !

चेतन सुभाष ने बचपन से,अंग्रेजी शासन संस्कृति की

जीवन व्यवहारों की शिक्षा, पाई थी घृणित और नीची

 

आई.सी.एस. बनने लंदन,जब गये पिता के कहने पर

यूरोप में  रहते  भारत के, सब  पुत्रों की  दुनिया  देखी

 

थे मित्र बनाए कितने ही, जिनसे मन की बातें कर लीं

प्रावीण्य  बने  पर  अंग्रेजी, शासन  शर्तें  ना  स्वीकारीं

 

लौटे स्वदेश सेवा को तो, गाॅंधी का  मार्ग चुना  लेकिन

भगत सिंह  वध  करवाती , उनकी  निर्ममता भी देखी

 

उस क्रूरकुटिल कायरता से,कांग्रेस हटे पा उचित मार्ग

गाॅंधी  विरोध कर  हरिपुरा, अध्यक्ष  चुनौती  स्वीकारी

 

फिर गाॅंधीनेहरू झूठों को,उनका ही दर्पण दिखा दिया

देखा  भारत ने  था सुभाष, हरिपुरा  जीत कर आये हैं !

 

जीते  लेकिन  गाॅंधी ने  था , इस्तीफा  उनसे माॅंग लिया

तब कांग्रेस से अलग नया,फारवर्ड ब्लाक निर्माण किया

 

बन्दी  रहते  संकल्प किया, जर्मनि  जापान  मिलाना है

कलकत्ते से काबुल,मास्को,बर्लिन के पथ को पार किया

 

हिटलरसे बर्लिन में मिलकर,थाजलवाअपना दिखलाया

एकत्रित सौ करोड़ कर के,सरकार फौज का गठन किया

 

जापान क्षेत्र  सिंगापुर  में, अब  साठ हजार सेना के संग

ध्वज,गीत,बैंक,मुद्राप्रचलन,इक नया देशही बना लिया

 

जग के  बारह देशों को तब, थी मान्य हुई आजाद हिंद

फिर फौज बढ़ी दिल्ली चलने,बर्मा, पूर्वोत्तर पार किया

 

आजाद  हिंद  का  राज  बना , नेताजी  प्रधान मंत्री  थे

फिर प्रथम तिरंगा अण्डमान, जाकर सुभाष फहराए हैं !

 

यह महाकाव्य नेताजी का,यदि विधिवत पूरा हो जाता

तो निश्चयभारत दुनिया में,इक महाशक्ति कहला पाता

 

षडयंत्र हुआ इस कारण ही, वे  बीच राह ही  मौन हुए

प्रेरित  आजाद हिंद  से  हो,  सेना  ने  था विद्रोह किया

 

आतंकित ब्रिटिशराज नेतब,अपनेबिस्तर कोबाॅंध लिया

तब के अंग्रेजी पी.एम.का,स्वीकार सत्य यह बतलातां

 

है झूठ कि गाॅंधी नेहरू ने , हमको  आजादी  दिलवाई

केवल  सुभाष  सत्कर्म रहे , हमको  आजादी के दाता

 

संस्कृति, शिक्षा, आदर्शों का , यह देश नहीं वरना ऐसे

ना सातदशक तकअंध मार्ग में किंकर्त्तव्य चला आता

 

संकल्प,समर्पण,शक्तिऔर,स्वीकार संयमित कर्म लिए

भारत के जन अपने सुभाष,की  आरति गाने आए हैं !

 

?

Manohar Chube

कवि : मनोहर चौबे “आकाश”

19 / A पावन भूमि ,
शक्ति नगर , जबलपुर .
482 001

( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

वतन पर कविता | Poem on homeland in Hindi

 

 

 

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