Poem on Uttarayan in Hindi

उत्तरायण ” सूर्य संक्रांति ” | Poem on Uttarayan in Hindi

उत्तरायण ” सूर्य संक्रांति “

( Uttarayan Surya Sankranti ) 

 

शीत ऋतु से ऋतु फिर बदल रही है आज
हो रहे उत्तरायण सूर्य ” संक्रांति ” के साथ ।।

धनु राशि से मकर राशि में करते आज प्रवेश
उत्तरायण हो नारायण प्रभु सूर्य देव भगवान ।।

रवि की फसल काट रहे हैं देखो हमारे किसान
खुशी अर्जित हो रही है बढ़ रहा हैं धन–धान्य ।।

धरती पर उत्सव हो जैसे वसुंधरा करें गुणगान,
वहे पूर्वी वायु खुल जाएं स्वर्ग के द्वार शास्त्रानुसार ।।

दान धर्म के लिए ” श्रेष्ठ ” कहलाए यह ” संक्रांति ”
पावन पर्व की इस बेला में मनुष्य करें गंगा स्नान।।

पावन परंपरा भारत की संस्कृति का करें गुणगान ,
इष्ट देव से करें प्रार्थना सभी द्वेष दूर हो प्रभु आज ।।

इस पावन अवसर को मनावे सभी हर्ष उल्लास से,
तिल खिचड़ी गजक से प्रभु का भोग लगावे आज ।।

परंपराओं का भी यह एक अनोखा सा यह संगम
कहीं पकवान बन रहे प्यारे, कहीं उड़ रही पतंग धूप में आज ।।

 

आशी प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर – मध्य प्रदेश

यह भी पढ़ें :-

जय हिंद , जय हिंदी , जय भारत | Kavita jai Hind jai Hindi

Similar Posts

  • तेरा शेष बचे | Tera Shesh Bache

    तेरा शेष बचे ( Tera Shesh Bache )   मेरा सभी नष्ट हो जाये, तेरा शेष बचे। महाशून्य के महानिलय में, तेरी धूम मचे। तब कोई व्यवधान न होगा। मान और अपमान न होगा। सुख-दुख, आशा और निराशा का कोई स्थान न होगा। मन की सभी कामनाओं में, तू ही मात्र रचे। मेरा सभी नष्ट…

  • पर्यावरण सुरक्षा ही जीवन रक्षा | Paryavaran Kavita

    पर्यावरण सुरक्षा ही जीवन रक्षा ( Paryavaran suraksha hi jeevan raksha )   पर्यावरण की रक्षा से जीवन सुरक्षित करना होगा हरियाली के उत्कर्ष से देश हित में बढ़ना । होगा   हिंदुस्तान से मोहब्बत है तो आओ दिखलाओ पर्यावरण सुरक्षित कर जीवन जोत जलाओ   पर्यावरण सुरक्षा का पूर्ण ज्ञान देता है हम सबको…

  • सौंदर्य | Saundarya Kavita

    सौंदर्य ( Saundarya )   सौन्दर्य समाहित ना होता, तेरा मेरे अब छंदों में। छलके गागर के जल जैसा, ये रूप तेरा छंदों से। कितना भी बांध लूं गजलों मे,कुछ अंश छूट जाता है, मैं लिखू कहानी यौवन पे, तू पूर्ण नही छंदों में।   रस रंग मालती पुष्प लता,जिसका सुगंध मनमोहिनी सा। कचनार कली…

  • ग्लानि | Glaani

    ग्लानि ( Glaani )    दूरी मे बढ़ न जाए और दूरी करें प्रयास खत्म करने का होगा कल का वक्त और ही करें कोशिश आज को बदलने का बढ़ने न दो जख्म को बातों से यादों को नासूर न होने दो कभी उठे न दीवार की गिर ही न पाए कुछ जगह जोड़ की…

  • प्रथम पूज्य आराध्य गजानंद | Kavita

    प्रथम पूज्य आराध्य गजानंद ( Pratham pujya aradhya gajanand )   बुद्धि विधाता विघ्नहर्ता, मंगल कारी आनंद करो। गजानंद गौरी सुत प्यारे, प्रभु आय भंडार भरो।   प्रथम पूज्य आराध्य गजानंद, हो मूषक असवार। रिद्धि-सिद्धि संग लेकर आओ, आय भरो भंडार।   गणेश देवा गणेश देवा,जन खड़े जयकार करे। लंबोदर दरबार निराला, मोदक छप्पन भोग…

  • कविता गूंजे कविता महके | Kavita Goonje

    कविता गूंजे कविता महके ( Kavita goonje kavita mahake )    दबा रहे हैं लेखनी वो, बिछा रहे सतरंगी जाल। राजनीति के दांव पेच, दिखा रहे अपना कमाल। शब्द मोती माला बुन, खड़ा हो गया कलमकार। शारदे साधना निरंतर, काव्य की बरसे रसधार। कविता गूंजे कविता महके, शब्द शिल्पी यश पाये। भावों का सागर उमड़े,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *