उसका मुकद्दर यू रूठ गया

उसका मुकद्दर यू रूठ गया

उसका मुकद्दर यू रूठ गया

1.

उसका मुकद्दर यू रूठ गया ,
बकरा कसाई हाथ लग गया।

2.
वो दिल में आ बत्तियां बुझा
नभाक कर गया,
कोई जुगनू पकड़ दामन
फिर उजाला कर गया।

3.
तुम अच्छे हो अच्छे रहो,
हम बुरे हैं बुरे ही सही,
देख लेते जो अच्छी नजर से
बुरे हम भी नहीं।

4.
कहते हो जीरो हमें कोई मलाल नहीं
तुम्हें मिला जो ताज दहाई का
इकाई को दहाई बनने में
जीरो का ही हाथ है।

5.
क्या क्या नहीं किए
उसकी नजरों में उठने के लिए,
कितनी कितनी बार गिरे
अपनों की नजरों में।

6.
उसके शब्दों के तीर चले हैं ऐसे
दिल में एक घाव गंभीर है,
दर्द में आंखें गमगीन है,
मन व्यथित, रो रहा गगन है
गिरे जो आंसू सहमी धरती है
है उम्मीद की आंसुओं से
सिंचित पुष्प खिलेंगे,
खुशबू मिल हवाओं में
गगन तक जाएगी,
हर्ष उल्लास कायनात में
फिर आएंगी।

7.
जिन आशियानों में है उजाला
वो समझते है जुगनू को कहां?
जो समझते हैं जुगनू को
उन आशियानों में अंधेरा कहां?

8.
बड़े महफूज जिंदगी है वो
जो समझते मां-बाप के
कदमों को जन्नत,
कम अक्ल है वो
जो बहाए इक अश्क इनके।

9.
सम्मुख शिकायत करें तो हिदायत है,

पीठ पीछे करें तो सियासत है।

 

?

Dheerendra

लेखक– धीरेंद्र सिंह नागा

(ग्राम -जवई,  पोस्ट-तिल्हापुर, जिला- कौशांबी )

उत्तर प्रदेश : Pin-212218

यह भी पढ़ें : 

पुत्री और शराबी पिता

Similar Posts

  • मै राही संघर्ष का | Mai Rahi Sangharsh ka

    मै राही संघर्ष का ( Mai Rahi Sangharsh ka ) मै राही संघर्ष का, नित पथ में बढ़ता जाता हूं। हर आंधी तूफानों से, फौलादी सा टकराता हूं। मैं राही संघर्ष का तीर सहे तलवार सहे, शब्दों के हर तीखे वार सहे। हौसलों से दुश्चक्र मिटाए, जिंदा तन मन प्राण रहे। जोश जज्बा हृदय में…

  • और जीवन | Jeevan par kavita

    “और जीवन“ ( Aur jeevan )   ऐषणाओं के सघन घन और जीवन। आनुषांगिक भी न हो पाया अकिंचन और जीवन। शांत पानी इतने कंकड़। अंधड़ो की पकड़ में जड़, आत्मा ह्रासित हुई बस रह गया तन और जीवन।। ऐषणाओं.. कहते हैं सबकुछ यहां है, यहां है तो फिर कहां है इतनी हरियाली में बसते…

  • आपकी सोच ही | Aapki Soch

    आपकी सोच ही ( Aapki soch hi )    धाराओं मे बंटते रह जाने से नाम मे कमी हो या न हो महत्व घटे या न घटे,किंतु प्रवाह के वेग मे कमी आ ही जाती है… अटल सत्य को काट नही सकते थोथे चने मे आवाज घनी हो भले किंतु,सामूहिक और व्यक्तिगत दोनो मे समानता…

  • रॉंग नंबर | Hindi kahani

     रॉंग नंबर  ( Wrong number : Hindi short story )   जीवन मे कभी कभी ऐसा होता है जब कोई अनजान हमारे करीब आता है और हमारी जरूरत और बाद में कमजोरी बन जाता है । यकीनन उनमें से कुछ ज्यादा दूर तक हमारे साथ नही चल पाते लेकिन कई खट्टी मीठी यादें दे जाते…

  • अमरत्व | Amaratva

    अमरत्व ( Amaratva )    माना की बहुत कुछ खो चुका है आपका सालों की मेहनत ,सालों की कमाई बिखर गए हैं , संजते संवरते सपने अपनों की उम्मीदें ..सब कुछ!!! तो क्या!रास्ते यहीं खत्म हो गए हैं !? प्रकृति के विशाल प्रांगण मे खत्म कुछ नही होता दुखी,सुख,उपलब्धियां ,अपने पराए कुछ नही ,कोई नही…

  • झोपड़ी में बसते हैं भगवान | Kavita

    झोपड़ी में बसते हैं भगवान ( Jhopdi mein baste hain bhagwan )   मेहनत मजदूरी जो करते, सदा चलते सीना तान। अटल रह सच्चाई पर, सबका करे आदर सम्मान।   शील स्वभाव विनय भाव, ईमानदारी गुण प्रधान। घट घटवासी परम प्रभु, झोपड़ी में बसते भगवान।   सबसे हिल मिलकर रहे, मदद करे अपना जान। ऊंच…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *