Poem Pyar ki Kashti

प्यार की कश्ती | Poem Pyar ki Kashti

प्यार की कश्ती

( Pyar Ki Kashti )

 

शाम सलोनी भी लौटा दो।
सागर की लहरें लौटा दो।
कश्ती में जो गुजरी रातें,
वो मीठी करवट लौटा दो।

कोरे कागज पे जो लिखा ,
सारी मेरी ख़त लौटा दो।
भींगे थे हम जिस सावन में,
वो मेरा सावन लौटा दो।

शोहरत,दौलत तुम रख लो,
दर्द मेरे दिल का लौटा दो।
मेरी ख्वाहिश के जंगल का
थोड़ा सा मंजर लौटा दो।

साँसों के पेड़ों पे झूली,
वो मेरा सरगम लौटा दो।
उड़ते थे उन्मुक्त गगन में,
पर मेरा तू वो लौटा दो।

गुरुर न कर माटी के तन पे,
ख्वाब कुंवारे वो लौटा दो।
हारूँगा ये प्यार की दौलत,
बस मेरी धड़कन लौटा दो।

 

रामकेश एम यादव (कवि, साहित्यकार)
( मुंबई )
यह भी पढ़ें:-

बचपन की बातें | Kavita Bachpan ki Baatein

 

 

Similar Posts

  • जलेबी | Jalebi par Kavita

    जलेबी ( Jalebi)    हुस्न-ओ-शबाब से कसी है जलेबी, गर्म आँच पे खूब तपी है जलेबी। तुर्को ने लाया भारत में देखो, लज्जत जिन्दगी की बढ़ाती जलेबी। व्यंग्य से भरी है इसकी कहानी, फीकी न पड़ती इसकी जवानी। खुशबू है अंदर, खुशबू है बाहर, खुद को मिटाकर चमकी जलेबी। हुस्न-ओ-शबाब से कसी है जलेबी, गर्म…

  • होलिका दहन | Poem Holika Dahan

    होलिका दहन ( Holika Dahan ) ( 2 )  करना है काम एक आज होलिका दहन में जलानी है कमी एक जो भि है निज के मन में अधर्म पर धर्म की जीत का प्रमाण समक्ष होगा करें दूर कल क्यों, आज के दिन हि प्रत्यक्ष होगा तब हि इन शुभ कामनाओं का कोई अर्थ…

  • तुम अगर साथ दो | Geet

    तुम अगर साथ दो ( Tum agar saath do )   तुम अगर साथ दो तो मैं गाता रहूं, लेखनी  ले  मां  शारदे मनाता रहूं।   महके जब मन हमारा तो हर शब्द खिले, लबों से झरते प्यारे मीठे मीठे बोल मिले। जब चले साथ में हम हंस कर चले, सुहाने सफर में हम हमसफर…

  • मां | Kavita maa

    मां ( Maa ) मां को समर्पित एक कविता     कहां है मेरी मां उससे मुझको मिला दो l हाथों का बना खाना मुझको खिला दो l   दो पल की जिंदगी मुझको दिला दो l एक बार गुस्से से अपनी डांट पिला दो l   फूल मेरे आंगन में मां तुम खिला दो…

  • यादों के पन्ने | Yaadon ke Panne

    यादों के पन्ने ( Yaadon ke Panne )    पुरानी यादों को खोल कर देखा तो याद बहुत आई उन बिताये हुये लम्हों की याद बहुत आई सकूल की वह प्यारी सी मस्ती, लड़ना झगड़ना फिर खेलना कुस्ती स्वागतम पर बैठकर बातें करना बातों बातों मे ही हंसने रोने की याद बहुत आई बीते दिनों…

  • खत से इजहार | Kavita Khat se Izhaar

    खत से इजहार ( Khat se izhaar ) दिल की पीड़ा को नारी भली भाती जानती है। आँखों को आँखों से पढ़ना भी जानती है। इसलिए तो मोहब्बत नारी से शुरू होकर। नारी पर आकर ही समाप्त होती है।। मोहब्बत होती ही है कुछ इसी तरह की। जो रात की तन्हाई और सुहाने मौसम में।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *