Raat Thehri si

रात ठहरी सी | Raat Thehri si

रात ठहरी सी

( Raat thehri si )

 

कुछ रात ठहरी सी है ,स्याह सी,गहरी सी है

धुंध को ओढ़े सी है ,कई राज  समेटे  सी है

सर्द सी , जर्द सी ,सीने में अलाव लिए हुए

कांपती, कंपाती सी ,दिल को हाथ में थामे सी है

सांसों की हरारत से ,जमा लहू पिघलाते हुए

इक आतिश की चाह में ,ज़िन्दगी सोच में खड़ी सी है

ऐ खुदा, तू तो था जुदा ,संगदिल, तंगदिल या , बुजदिल  नहीं

तेरी फितरत में  क्यूं  अब  खुदगर्ज़ी, खुदफरामोशी सी है…

 

लेखिका :- Suneet Sood Grover

अमृतसर ( पंजाब )

यह भी पढ़ें :-

अरसे बाद | नज़्म

Similar Posts

  • खोज

    खोज सुख की खोज में आदमी देखो, कैसे दुख के पीछे दौड़ रहा है!घर है मगर वातानुकूलित नहीं है वह उसकी तृष्णा में चकरा रहाहै, मोटर है लेकिन सामान्य वह,‘लिमोजिन’ चढ़ने के लिए छटपटा रहा है सुख की खोज में लगने के बाद आदमी, आदमी कहाँ रह जाता है? देखते-देखते ही नदी की कलकल और,…

  • प्रत्येक प्राणि बुद्ध हो

    प्रत्येक प्राणि बुद्ध हो जग भले विरुद्ध हो,राह भी अवरुद्ध हो ।सत्य पथ न छोड़िएहृदय सदैव शुद्ध हो ।। मूढ़ या प्रबुद्ध हो ,मन कभी न क्रुद्ध हो ।अप्प दीपो भव गहें ,भावना विशुद्ध हो ।। न हर्ष हो न क्षुब्ध हो,न‌ द्वेष हो न युद्ध हो।कामना हमारी है,प्रत्येक प्राणि बुद्ध हो ।। रचनाकार…अजय जायसवाल…

  • बच्चे मन के सच्चे | Bachchon ki poem

    बच्चे मन के सच्चे ( Bachche man ke sachche )    बच्चे मन के सच्चे होते छोटे-छोटे प्यारे प्यारे। खेलकूद में मस्त रहते जान से प्यारे नैन तारे।   नटखट नखरे बालक के भोली भोली बोली। सीधे-साधे अच्छे बालक करते हंसी ठिठोली।   निश्चल प्रेम वो बरसाते संस्कार करके धारण। तभी बालरुप में आते जगतपति…

  • मैं कविता की हूंकारो से | Kavita

    मैं कविता की हूंकारो से ( Main kavita ki hunkaro se )     मैं कविता की हूंकारो से, गगन उठाया करता हूं। सोया सिंह जंगल का राजा, शेर जगाया करता हूं।   मात पिता गुरु की सेवा का, धर्म बताया करता हूं। अतिथि देवन हमारे, सम्मान जताया करता हूं।   शब्दाक्षर से अल्फाजों में,…

  • छलकती जवानी | Kavita Chalakti jawani

    छलकती जवानी ( Chalakti jawani )    जुल्फों में खोने के दिन देखो आए, निगाहों से पीने के दिन देखो आए। छलकती जवानी पे दिल उसका आया, छूकर बदन मेरा दिल वो चुराया। सुलगती अगन को कैसे दबाएँ, निगाहों से पीने के दिन देखो आए, जुल्फों में खोने के दिन देखो आए। मेरी जिन्दगी का…

  • कागा की कलम | Kaga ki Kalam

    खोज जो खोजा वो पाया गोता मार गेहराई में ,सीपों में छुपे है मोती मिले गेहराई में ! बीते दिन जीवन के बेठे रहे किनारे पर ,जब ख़्याल आया खोजने का मिले गेहराई में ! कंगाल कोई नहीं सबके अंदर मोजूद माणक लाल ,डूबने का डर छलांग मारी मिले गेहराई में ! जान का ख़त़रा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *