रब उसको मुझसे प्यार हो जाये

रब उसको मुझसे प्यार हो जाये | Pyar Ghazal

रब उसको मुझसे प्यार हो जाये

( Rab usko mujhse pyar ho jaye )

कोई ऐसी बहार हो जाये

रब उसको मुझसे प्यार हो जाये

खेलना छोड़ो संग बच्चों के

दुश्मन का अब शिकार हो जाये

वो वफ़ा पे यक़ी नहीं करता

उसको भी ऐतबार हो जाये

वो मिलने अब मुझे चला आया

ख़त्म अब इंतजार हो जाये

अब बहुत ही गिले हुए शिकवे

दोस्ती मे सुधार हो जाये

घेरा है गम के ही  अंधेरों ने

अब खुशी की दयार हो जाये

नफ़रतों की छोड़ो बातें फ़ैसल

प्यार की बातें  यार हो जाये

?

शायर: शाह फ़ैसल

( सहारनपुर )

यह भी पढ़ें : 

रोज़ उसकी आरजू ये जिंदगी करती रही | Aarzoo shayari

Similar Posts

  • तेरी याद में | Yaad Shayari in Hindi

    तेरी याद में ( Teri yaad me )  जमाना ख़राब हो गया तेरी याद में, मैं अधमरा हो गया हूं तेरी याद में। कितनों को वफ़ा का सबक सिखाओगे, खुद बेवफ़ा हो गया मैं तेरी याद में ‌। जिस्म से खेलने का हूनर मुझे नहीं है, मुझे ख़्वाब आने लगें तेरी याद में। जी नहीं…

  • मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैं

    मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैं मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैंलगा के ताज को ठोकर खड़े हैं न थामा हाथ भी बढ़कर किसी नेयूँ तन्हा हम शिकस्ता-तर खड़े हैं करूँ कैसे तुम्हारा मैं नज़ाराज़माने में सौ दीदा-वर खड़े हैं शजर आता न कोई भी नज़र अबबशर सब धूप में थक -कर खड़े हैं मिरे ज़हनो गुमाँ…

  • हज़ल | Hazl

    इलेक्शन पास जबसे इलेक्शन है आने लगे तबसे नेताजी सर्कस दिखाने लगे ये है बापू का गुलशन यहां पर मगर डाकु, गुंडे हुकुमत चलाने लगे जबसे महंगी हुई है विदेशी शराब देसी दारू वो पीने पिलाने लगे मारना मच्छरों का जिन्हें पाप है रोज़ मुर्गा,मटन वो भी खाने लगे नौकरी रिटायर हम जो हुए घर…

  • वो निशानी दे गया | Wo Nishani de Gaya

    वो निशानी दे गया ( Wo Nishani de Gaya ) ज़र्द चेहरा वो निशानी दे गयाबे सबब सी ज़िन्दगानी दे गया उम्र भर जिसको समझ पाए न हमइतनी मुश्किल वो कहानी दे गया खूँ चका मंज़र था हर इक सू मगरकोई लम्हा शादमानी दे गया जाते जाते वो हमें यादों के साथखुश्बुएं भी जाफ़रानी दे…

  • तीर बरसाता है पर नायक नहीं है

    तीर बरसाता है पर नायक नहीं है तीर बरसाता है पर नायक नहीं हैशायरी करता है संहारक नहीं है अनकहे अध्याय इंसा क्या पढ़ेगाज़िंदगी जीता है संचालक नहीं है वेदना ही वेदना है शायरी मेंवृक्ष यह भी कोई फलदायक नहीं है वो जो दौलत के लिए रिश्ते ही छोड़ेआदमी तो है मगर लायक़ नहीं है…

  • मुहब्बत की मुहब्बत से सदा | Muhabbat wali shayari

    मुहब्बत की मुहब्बत से सदा ( Muhabbat ki muhabbat se sada )     दिल-ए-मुज़्तर की हया हो जैसे लफ्ज़-ए-नस्र की अदा हो जैसे   जिस तरह से उसको याद करता हूँ लगता है मुहब्बत की मुहब्बत से सदा हो जैसे   खुदा से ही ये इल्तेजा हो जैसे एक नासीर कहाँ जाए अश्क-ए-नदामत लिए…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *