आओ पेड़ लगाएं हम

आओ पेड़ लगाएं हम | Paryawaran par kavita

आओ पेड़ लगाएं हम

*****

आओ पेड़ लगाएं हम,
चहुंओर दिखे वन ही वन।

निखर जाए वातावरण,
स्वच्छ हो जाए पर्यावरण।

बहें नदियां निर्मल कल-कल,
बेहतर हो जाए वायुमंडल।

नाचे मयूर होकर मगन,
झूमे धरती और गगन।

मंद मंद बहे मदमस्त पवन,
शतायु हो जाए मानव जीवन।

बगिया महके बचपन चहके,
खिला खिला रूप यौवन झलके।

खुशियां खुद घर आएं चलके,
स्वागत को बिछीं हों पलकें।

कुछ ऐसा कर जाएं हम,
आओ पेड़ लगाएं हम।

मानवता का दिखाएं दम,
धरती हरा भरा बनाएं हम।

संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करें,
सह अस्तित्व के लिए जीएं मरें।

जीवों के प्राकृतिक आवास न छेड़ें,
लुप्त जीव भी हो जाएं बहुतेरे।

कुछ ऐसा कर जाएं हम,
आओ पेड़ लगाएं हम;
चहुंओर दिखे वन ही वन।

 

?

नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

 

यह भी पढ़ें : 

गुरु की महिमा ( दोहे ) | Guru ki mahima

Similar Posts

  • प्यारी माँ | Pyari Maa Kavita

    प्यारी माँ ( Pyari Maa )   ये जो संचरित ब्यवहरित सृष्टि सारी है। हे !मां सब तेरे चरणों की पुजारी है।।   कहां भटकता है ब्रत धाम नाम तीर्थों में, मां की ममता ही तो हर तीर्थों पे भारी है।।   दो रोटी और खा ले लाल मेरे खातिर, भूखी रहकर भी कईबार मां…

  • खट्टी मीठी यादें | Khatti meethi yaadein kavita

    खट्टी मीठी यादें ( Khatti meethi yaadein )     वर्ष बीत गया कुछ कुछ कवड़ी मगर सच्ची यादें सब के जीवन को बदला कुछ अच्छी सच्ची बातें   आहिस्ता आहिस्ता नव वर्ष आ ही गया करें स्वागत नव ऊर्जा नव उमंग नव उत्साह संग आओ करें स्वागत   कुदरत ने ये कैसा कहर बरपाया…

  • मौसम ने | Mausam Ne

    मौसम ने ( Mausam Ne ) बदलते मौसम का अंदाज बहुत रंग ला रहा। वायू मंडल में घटाओं को जो बिखेर रहा। पेड़ पौधे फूल पत्ती आदि लहरा रहे है। और मंद मंद हवाओं से खुशबू को बिखर रहा।। नजारा देख ये जन्नत का किसी की याद दिला रहा। नदी तालाब बाग बगीचा भी अपनी…

  • श्रीशैल चौगुले की कविताएं | Shrishail Chougule Poetry

    प्रेमः अमृत-नमक. नमक ने मुझे ईन्सान बनायानहि तो मै जहरिला बन जाताकिसी के प्रेम कि रुची पाकरदिल देकर जीवन युध्द जीता. कहते है विषलोक में मग्रुरीउसको पाके सच्ची दुनिया देखासारा जहर अहंम का ऊतरापहली नजर में मन को फुंकाईन्सानो में भाव होती है दिल्लगीवीषधारी को प्रेम कभी न भाँता. कारण जवानी के दो रुह एकदोष…

  • शरद चाँदनी | Sharad Chandni 

    शरद चाँदनी ( Sharad Chandni ) चली है ..पवन शीतल मंद सुगन्ध नूपुरखिले खिले हुए हैशरद की चाँदनी मेंकुन्द के फूलचंद्र पूर्ण आकार सोलह कलाओं को संग लियें उदित हुआ बदली तेजपुंज से भरी-भरीहो रही है अमृत वर्षाआकाश से आज बरस रही है शरद चाँदनीहै ओस की बूँद में भीअमृत बूटी चूर्णसब रोगों का होगा नाशमाँ…

  • सेना की चाहत | Poem sena ki chahat

    सेना की चाहत ( Sena ki chahat )   मैं भारतीय सेना की आन,बान और शान हूं।     पर देश द्रोहियों के लिए मौत का सामान हूं।। भारत माता की रक्षा का चाहत लिए कटिबद्ध हूं।     अपने प्राण न्यौछावर करता देश का वीर जवान हूं।। जन्म देने वाली माँ से मैं भले…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *