Raktdan par kavita

रक्तदान | Raktdan par chhand

रक्तदान

( Raktdan )

मनहरण घनाक्षरी

 

रक्तदान महादान,
देता है जीवन दान।
जीवन बचाएं हम,
रक्तदान कीजिए।

 

आओ बचाएं सबका,
जीवन अनमोल है।
मानव धर्म हमारा,
पुण्य कार्य कीजिए।

 

सांसो की डोर बचाले,
जोड़े रक्त का नाता भी।
जरूरतमंद कोई,
रक्त दान दीजिए।

 

किस्मत संवर जाती,
भाग्य के खुलते द्वार।
परोपकार का काम,
देरी मत कीजिए।

 

?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :- 

हवा का झोंका | Hawa ka jhonka

 

Similar Posts

  • छंद घूंघट | मनहरण घनाक्षरी

    छंद घूंघट मान मर्यादा रक्षक, लाज शर्म धर ध्यान। चार चांद सौंदर्य में, घूंघट सजाइए। प्रीत की फुहार प्यारी, सुंदर सुशील नारी। पिया मन को लुभाती, घूंघट लगाइए। गौरी का श्रृंगार सौम्य, प्रियतम मन भाए। गोरा मुखड़ा चमके, घूंघट दिखाइए। पहने परिधान वो, घर की पहचान वो। भारत की शान नारी, घूंघट हटाइए। कवि : रमाकांत…

  • श्रीकृष्ण | Shri Krishna chhand

    श्रीकृष्ण ( Shri Krishna )   मनहरण घनाक्षरी   माधव मुरली वाले, गोकुल के घनश्याम। नंदलाल गिरधारी, लीलायें रचाइये।   यशोदा के राजदुलारे, जन जन के सहारे। चक्र सुदर्शन धारी, मुरली बजाइए।   राधा के मोहन प्यारे, जग के तारणहारे। जय हो तेरी केशव, विपद निवारिये।   सखा सुदामा हे कृष्णा, करुणासागर कान्हा। भक्तों के…

  • जीवन रंग उत्सव | Chhand Jeevan Rang Utsav

    जीवन रंग उत्सव ( Jeevan rang utsav ) सुख दुख आते जाते, पल पल ये मुस्काते। जीवन के रंग बहते, डुबकी लगाइए। कभी ख़ुशी कभी ग़म, जैसे बदले मौसम। पतझड़ बहारों में, आनंद उठाइए। मुस्कानों के मोती बांटे, बोल मीठे प्यार भरे। हिलमिल जिंदगी को, सुख से बताइए। कुदरत रंग भाये, चमन में बहार में।…

  • कुंठायें जीवन का अवसान | Kuntha par chhand

    कुंठायें जीवन का अवसान ( Kunthaye jeevan ka avsan )      चिंता चिता समान है, कुंठायें हैं अवसान। जीवन को आनंद से, जरा भर लीजिए।   सब को खुशी बांटिये, नेह मोती अनमोल। घुटन भरे कुंठाएं, थोड़ा प्रेम कीजिए।   हर्ष मौज आनंद की, गर चाहो बरसात। ईर्ष्या द्वेष लोभ मद, जरा त्याग दीजिए।…

  • नवदुर्गा उपासना | Navdurga Upasana

    नवदुर्गा उपासना ( मनहरण घनाक्षरी ) नाम नव दुर्गा रूप, पूजे सुर मुनि भूपपहाड़ों वाली मां तेरा, शैलपुत्री नाम है। दूसरा अनूप रूप, ब्रह्मचारिणी है मैयाकमंडल कर तेरे, दूजे कर माल है। चंद्रघंटा रूप तेरा, तीसरा सलोना मैया,सिंह की सवारी तेरे, हाथ में कमान है। चौथा है कुष्मांडा रूप, पांचवा स्कंद मैया,छठा है कात्यायनी मां,…

  • चिंतन | Chintan par Chhand

    चिंतन ( Chintan )  मनहरण घनाक्षरी   विद्वान चिंतक हुए, पथ प्रदर्शक भारी। देश का उत्थान करे, चिंतन भी कीजिए। मंथन हो विचारों का, उर भाव उद्गारों का। जनहित सरोकार, अमल में लीजिए। वादों की भरमारों को, सत्ता की दरकारों को। नेताजी की छवि जरा, परख भी लीजिए। सोचिए विचारिये भी,हृदय उतारिए भी। चिंतन मनन…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *