Rishton par Kavita

रिश्तों की महक कभी कम ना होने देना | Rishton par Kavita

रिश्तों की महक कभी कम ना होने देना

( Rishton ki mahak kabhi kam na hone dena )

 

आज रिश्तों में भी अपनी ईमानदारियां निभाओ,
इसमे भी सब अपनी यह जिम्मेदारियां निभाओ।
भले विचार मन में लाओ ऐसी प्रेरणा बन जाओ,
चाहे ढेरों समस्याएं आए फिर भी साथ निभाओ।।

चाहे बेटा-बेटी भाई-बहन या पत्नी हो किसी की,
इज्ज़त सबको देना कभी धोखा किसे नही देना।
लालच घमंड से बचना और बुरी नज़रें ना रखना,
यह रिश्तों की महक ‌कभी भी कम ना होने देना।।

यह जीवन का सार सबसे रखना समान व्यवहार,
हर चीज़ ना बिकती बाज़ार बनों सब समझदार।
लड़ाई में सदा होता है भीषण सभी का सर्वनाश,
सब अपनो के प्यारे बनों जैसे वतन के पहरेदार‌।।

चिकनी चुपड़ी बातो से अच्छा व्यवहार ना बनता,
अपने ही अपनो से छल करे वो महान ‌ना बनता।
जैसे ज़वानी में लालच बचपना लेकर चल जाता,
किसी को उजाड़ देता और किसे रुलाकर जाता।।

कमजोर व्यक्ति एवं स्त्री पर कभी हाथ न उठाना,
किसी भी मज़हब को कोई कभी बुरा ना बताना।
ज़रुरत पड़ने पर सभी एकता का परिचय है देना,
असहाय निर्धन भाई का मददगार बनकर रहना।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

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