Romance geet

दिल के पास तुम रहते हो | Romance geet

दिल के पास तुम रहते हो

( Dil ke paas tum rahte ho )

 

 

खिले चमन से महकते सदा बहारों से तुम रहते हो
दिल जिगर दिलदार हो दिल के पास तुम रहते हो
दिल के पास तुम रहते हो

 

नैनों से नेह धारा बरसती मोती बरसे प्यार भरे
मनमीत हो प्रियतम प्यारे बोल सुहाने प्रीत भरे
दिल के झरोखों में बन आशाओं के दीप रहते हो
सुकून आ जाए दिल को दिल के पास तुम रहते हो
दिल के पास तुम रहते हो

 

हसीं वादियो से भी सुंदर सुरम्य हो मनभावन हो
प्रीत भरी फुहार प्यारी प्यार के बरसते सावन हो
छांव कोई हरियाली सी हम तुम्हारे तुम कहते हो
चैन मिल जाता दिल को दिल के पास तुम रहते हो
दिल के पास तुम रहते हो

 

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/muskurane-ki-shayari/

Similar Posts

  • बनना है मुझे सैनिक | Banna hai Mujhe Sainik

    बनना है मुझे सैनिक! ( Banna hai mujhe sainik )    बनना है मुझे सैनिक बन करके दिखा दूँगा, सरहद की हिफाजत में मैं प्राण लुटा दूँगा। प्यारा है वतन मेरा, प्यारा है चमन मेरा, मैं कूच करूँ पहले नभ-थल को नमन मेरा। गर जंग हुई लाजिम श्मशान बना दूँगा, सरहद की हिफाजत में मैं…

  • मेहनत | Mehnat

    मेहनत! ( Mehnat )   बिना मेहनत के कुछ हो नहीं सकता, पृथ्वी गति न करे, तो दिन निकल नहीं सकता। मेहनत से ही चलता है किस्मत का सिक्का, मेहनत बिना जीवन संवर नहीं सकता। मेहनत की खुशबू से है धरा महकती, उड़ें न भौरा तो कली तक पहुँच नहीं सकता। सजा रहता है झूठ…

  • लौटेगी कुछ दिन में

    ‘लौटेगी कुछ दिन में’ आंखों में खुशी मन में कुंभ की छाया बसी थी। लौटूंगी कुछ दिन में घर की,की व्यवस्था थी। निकल पड़ी गंगा मैया का नाम लेकर, आंखों में बस चंचलता थी। कुंभ नहाने के लिए छोड़ी उसने अपनी गली बस्ती थी। क्या मालूम था उसे की कुंभ में सांसें बडी सस्ती थी।…

  • श्राद्ध पक्ष | Shradh Paksha Kavita

    श्राद्ध पक्ष ( Shradh Paksh )   पुरखों  को  सम्मान  दें,  हैं  उनके ही अंश। तर्पण कर निज भाव से, फले आपका वंश।।   बदला  सारा  ढंग  है,  भूल  गए  सत्कार। तर्पण कर इतिश्री किया, छूट गए संस्कार।।   तब  कौवों  ने  बैठ के, रच दी सभा विशाल। श्राद्ध पक्ष अब आ गए, समय बड़ा…

  • महाशिवरात्रि की प्रार्थना

    महाशिवरात्रि की प्रार्थना हे महादेव, त्रिलोक के नाथ,आप हरते हैं हर भक्त का त्रास।सुनो मेरी भी करुण पुकार,लौटा दो दिकु को इस बार। जैसे मां पार्वती ने की तपस्या महान,सह लिया हर कठिन तूफ़ान।वैसे ही मेरा प्रेम है अडिग खड़ा,अब भी उसकी राह में है दीप जला। हे भोलेनाथ, कृपा बरसाओ,इस प्रेम की डोरी को…

  • पर्यावरण और पेड़ | Kavita Paryavaran aur Ped

    पर्यावरण और पेड़ ( Paryavaran aur ped ) आओ मिलकर पेड़ लगाएं, धरा को फिर से स्वर्ग बनाएं। तेज गर्मी हो या अनावृष्टि, प्रकृति की अनियमितता से बचाएं। बरसों से मानव विकास के नाम पर पेड़ों को है काट रहा। अनजाने में ही वो विनाश का आमंत्रण सबको बांट रहा। पेड़ ही नहीं रहेंगे तो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *