Roti par Bhojpuri kavita

रोटि | Roti par Bhojpuri Kavita

” रोटि “

( Roti ) 

 

बड़ी अजीब दुनिया बा
रोटी उजर तावा करिया बा

केहु पकावे केहु खाये
कुर्सी पे ब‌इठ हाथ हिलाये

जे पकाय जरल खाये
सुन्दर रोटी कुर्सी के भाये

खुन जरे पसिना आये
तावा पे जाके सुन्दरता लाये

जे खुन जराये पसिना लाये
ओके खाली दुख भेटाये ।

 

कवि उदय शंकर “प्रसाद”
पूर्व सहायक प्रोफेसर (फ्रेंच विभाग), तमिलनाडु
यह भी पढ़ें:-

रोपया | Poem on rupees in Bhojpuri

 

 

 

 

 

 

Similar Posts

  • गिर के उठनी | Bhojpuri Kavita Gir ke Uthani

    ” गिर के उठनी “ ( Gir ke uthani )   आज उठे के समय हमरा मिलल देख हमरा के कवनो जल उठल खिंच देलक गोंड हमर ऐ तरह से गिर ग‌इनी देख दुनिया हंस पड़ल का करती हम अभीन उठल रहनी मंजिल रहे दूर मगर अब ना सुतल रहनी देख इ हंसी अब हम…

  • Bhojpuri Kavita | Bhojpuri Poetry -बात मानीं देवर जी

    बात मानीं देवर जी! ( Baat Mani Devar Jee Bhojpuri Kavita ) ***** (भोजपुरी भाषा में) ———————— चाल ऊहे बा ढाल ऊहे बा ऊहे बा अबहूं तेवर बदल गइल बा अब त# सबकुछ रउओ बदलीं देवर! कर्ण नहीं शोभे कोई कुण्डल ना चमके भाल पर बिंदिया लालन पालन में लड़िकन के उड़ गइल रातन के…

  • हे प्रभु | Hey Prabhu Bhojpuri Kavita

    हे प्रभु! ( Hey Prabhu )    मिटा द मन के लोभ सब कुछ पावे के जे हमरा लागल बा दिल पे चोट हे प्रभु! मिटा द मन के लोभ दे सकऽ तऽ तू दऽ प्रेम अउर आराधना कर सऽकी हम पूजा अउर प्रार्थना ना रहे मन में दूख अउर खोट हे प्रभु! मिटा द…

  • समोसा | Samosa par Bhojpuri Kavita

    समोसा ( Samosa )    आज खड़ा रहनी हम बजार में भिंड भरल रहे अउर सबे रहे अपना काम में दुकानदार चि‌‌ललात रहे हर चिज़ के दाम के तले एगो ल‌इका ले उडल कवनो समान के चोर चोर कह सभे चिल्ला उठल का चोर‌इले रहे ना केहु के पता चलल उ ल‌इका आवाज सुन डेरा…

  • पागल | Pagal Bhojpuri kavita

    ” पागल “ ( Pagal )    दरद के आग बा ओके दिल में, रोये ला दिन रात देख- देख के लोग कहेला, पागल जाता बडबडात   रहे उ सिधा साधा, माने सबके बात लूट लेलक दुनिया ओके, कह के आपन जात   आज ना कवनो बेटा-बेटी, नाही कवनो जमात नाही पाकिट में एगो रोपया,…

  • बेचारा | Bechar Bhojpuri Kavita

    बेचारा ( Bechara )   जब से गरीबी के चपेट में आइल भूख, दर्द, इच्छा सब कुछ मराइल खेलें कुदे के उम्र में जूठा थाली सबके मजाइल का गलती, केके क‌इलक बुराई जे इ कठीन घड़ी बा आइल ना देह भर के पावेला जामा ठंडा, गमी, बरसात सब आधे पे कटाइल ठिठुर-ठिठुर गावेला गाना जल्दी-जलदी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *