Krodh par Kavita

क्रोध है ऐसी अग्नि | Krodh par Kavita

क्रोध है ऐसी अग्नि

( Krodh hai aisi agni ) 

 

खुशियों से भरा रहता है उन सब का जीवन,
सकारात्मक सोच रखें एवं काबू रखते-मन।
काम क्रोध मद लोभ मात्सर्यो से जो रहे दूर,
बुद्धिमान कहलाते है दुःखी नही रखते-मन।।

ज्ञानी होकर भी रह जाते वो व्यक्ति-अज्ञानी,
बदले की ये भावना जिन व्यक्तियों ने ठानी।
खो देते वह क्रोध में आकर बुद्धि बुद्धिमानी,
होती यह बिमारी ऐसी किसी को खानदानी।।

पलभर में ही बिगाड़ लेते रिश्ते एवं सम्बन्ध,
मुर्खता का प्रमाण देते है वो क्रोधित होकर।
शब्दों का जोर-जोर से वही करते है बखान,
सत्य नही समझ सकते वो गुस्से में आकर।।

क्रोध पुराने घावों को भी फिर हरा कर देता,
बच्चें जवान बुढ़ो का ख़ून हरक़त में आता।
तर्क-वितर्क होने से रिश्ते में पतन हो जाता,
इस गुर्राहट से संयुक्त परिवार बिगड़ जाता।।

ख़ुद मौन रहेगें तो ये क्रोध भी वश में रहेगा,
थोड़ी-धीरज‌ रखने से वो घड़ी टल जाएगा।
रहो प्रेम-प्यार से यारों ना करना कोई क्रोध,
क्रोध है ऐसी अग्नि ख़ुद ही जलता जाएगा।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • स्त्री | Stree

     ” स्त्री “ ( Stree )    स्त्री – वो नहीं जो तुम्हारी कल्पनाओं में है और स्त्री वो भी नहीं जिसे जानते हो तुम! एक स्त्री को जानने -समझने की शक्ति किसी पुरुष में कैसे हो सकती है भला। पति हो या प्रेमी पढ़ सकता नहीं किसी स्त्री के मन को वह ढाल नहीं…

  • वो बाबा भीम हमारा | Baba Bhim Hamara

    वो बाबा भीम हमारा ( Wo baba bhim hamara )   आज गाॅंव‌-शहर की हर गली में गूॅंज रहा यह नारा, सबको अपना हक दिलाया लिखें संविधान प्यारा। अच्छाई-सच्चाई के लिए लड़ता रहा उम्र भर सारा, जनहित में सारे काम किया वो बाबा भीम हमारा।। देखा था बचपन में उन्होंने ये निम्न-जाति व्यवस्था, बाहर बैठकर…

  • मां नवदुर्गा | Maa Navdurga

    मां नवदुर्गा ( Maa Navdurga )  ( 1 )   नौ रूप में नौ दिनों तक होती माता की आराधना, जो भी पूजे इनको होती उसकी पूरी हर मनोकामना। समूचे जगत में फैली हुई है तेरी अनुपम महिमा, न होता कल्याण किसी का तेरी कृपा के बिना। हे माता शेरावाली हे माता जोतावाली, पूरी कर…

  • अयोध्या सी पावनता | Ayodhya ki Pawanta

    अयोध्या सी पावनता ( Ayodhya ki pawanta )    अयोध्या सी पावनता,अब हर घर द्वार कलयुग अभिव्यंजना त्रेता सम, मानस पटल दिव्य राम नाम । बाईस जनवरी अद्भुत अनुपम, रामलला प्राण प्रतिष्ठा प्रणाम । सर्वत्र सरित उमंग उल्लास, आर्तभाव अनंत आस्था धार । अयोध्या सी पावनता, अब हर घर द्वार ।। निमंत्रण आमंत्रण सर्वजन, प्रभु…

  • शब्दों का सफर | Poem shabdon ka safar

    शब्दों का सफर ( Shabdon ka safar )   शिकस्त शिकस्त कर देंगे मंसूबे हम अपने प्यार से। कह देंगे राज सारे आज अपने दिलदार से। दुश्मनों से कह दो आंखें खोलकर देखें जरा। तूफानों में पलने वाले डरते नहीं तलवार से।   चौबारा घर का आंगन दीवारें वो चौबारा भी गाता है बिटिया आंगन…

  • ऋतु गर्ग की कविताएं | Ritu Garg Poetry

    पढ़ी-लिखी बेटी मजबूत पीढ़ी बस यहां पर आकरमैं कमजोर हो जाती हूं! जब कोई पूछता हैबिटिया की शादी करोगी क्याअरे भाई !यह कोई पूछने की बात हैबेटियों को भी तो अपना घर बसाना है,उनको भी तो अपने घर जाना है। बस मैं यहां पर आकर,कमजोर हो जाती हूं! जब कोई पूछता है,बेटी को खाना बनाना…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *