संवेदना व यथार्थ : ‘अंतर्मन की यात्रा’
संवेदना व यथार्थ
हाँ, ‘दया’ मेरे कवि-हृदय का,
एक महान तथा विशेष गुण है |
सरलता,धैर्य तथा करुणा का धनी हूँ |
‘दया’ मेरा सबसे बड़ा धर्म है |
निर्मल मन को,
असाधारण रूप से,
शांत, स्थिर होना चाहिए |
अनमोल जीवन को समझने के लिए |
कवि की आवश्यकता से अधिक
सम्वेदनशीलता नुकसानदायक है |
मानवता, प्रेम, एकता, दया, करुणा,
परोपकार, सहानुभूति, सदभावना,
तथा उदारता का सर्वदा संदेश देता हूँ |
हमारी आँखों द्वारा देखी गई
वास्तविकता वास्तव में,
वास्तविकता नहीं है,
बल्कि हमारे भीतर का सच है |
ये जीवन क्या है?
जीवन की सच्चाई क्या है?
हमें उसको आगे लाना है |
हमारी बातें कुछ और हैं,
विचार कुछ और हैं,
दृष्टिकोण कुछ और हैं |

सूर्यदीप
( कवि, साहित्यकार व शिक्षित समाज-सुधारक, समाजसेवी, मानवतावादी, प्रखर चिन्तक, दार्शनिक )
नवोदय लोक चेतना कल्याण’समिति – बागपत
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