Satya par Kavita

सत्य गुमराह नहीं होता | Satya par Kavita

सत्य गुमराह नहीं होता

( Satya gumrah nahi hota )

 

सांच को आंच नहीं होती सत्य गुमराह नहीं होता।
सच्चाई छुपती नहीं कभी सच बेपरवाह नहीं होता।

श्रद्धा प्रेम विश्वास सत्य के आगे पीछे रहते सारे।
सच्चाई की डगर सुहानी दमकते भाग्य सितारे।

सत्य परेशान हो सकता सत्य संघर्ष कर सकता।
सत्य की जीत होती है सत्य संग्राम लड़ सकता।

सत्य की खोज में निकले वो गौतम बुद्ध कहलाए।
सत्य का प्रचार करने विवेकानंद विदेश तक धाए।

साधु संतों की श्रद्धा है ऋषि-मुनियों का विश्वास।
परम सत्ता सृष्टि की परमेश्वर का घट घट वास।

मृत्यु सार्वभौम सत्य है पंचतत्वों का पुतला जान।
नाशवान सब यहां खुद को अजर अमर ना मान।

सत्य को जान लो थोड़ा सत्य को समझो रे इंसान।
चंद सांसों की माया है करें किस बात का गुमान।

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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