Shakahari divas par kavita

अंतर्राष्ट्रीय शाकाहारी दिवस | Shakahari divas par kavita

अंतर्राष्ट्रीय शाकाहारी दिवस

( Antarrashtriya shakahari divas ) 

 

अपनी सभी बिमारियों को दूर आप भगाओ,
आज अभी से शाकाहारी भोजन अपनाओ।
देखते है इन्सान होने का प्रमाण कौन देते है,
मांस मछली छोड़कर शाकाहारी बन जाओ।।

जियो एवं जीने दो वन्यजीव पशु पक्षियों को,
नहीं मारकर खाओ कोई भी इन्सान इनको।
क्यों निमंत्रण दे रहें है भयंकर बिमारियों को,
इस प्रकृति से उत्पन्न वस्तुएं ढ़ेर है खानें को।।

यें विश्व दिवस मनाने का मक़सद भी यही है,
जीव-हत्या पर रोक एवं स्वयं भी स्वस्थ रहें।
सब्जी में प्रोटीन कार्बोहाइड्रेट वसा भरपूर है,
शाकाहारी भोजन करके मोटापा से दूर रहें।।

यही पत्तेदार सब्जियां स्वास्थ्यवर्धक होती है,
जो पचने में जल्दी और बुद्धिमान बनाती है।
जिसमें आवश्यक विटामिन एन्टीआक्सीडेंट,
अमीनोएसिड जैसे तत्व भी शामिल रहते है।।

आयुर्वेदानुसार बढ़ते है मांस खाने से ये रोग,
कैंसर लकवा श्वास बीमारियां एवं हृदयरोग।
मधुमेह यकृत गुर्दा बिमारी एवं विस्मृति रोग,
इसीलिए शाकाहारी भोजन का करें प्रयोग।।

 

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • Hindi Kavita | Hindi Poem | Hindi Poetry -नसीहत

    नसीहत ( Nasihat ) ** वह आई छाई रहे न बिन वाई फाई टोकी विमला ताई देख रहे हैं तुझे सब ओ माई! कहां हो खोई? मोबाइल से नजरें हटाओ लोगों की नजर से नजर मिलाओ घुलो मिलो करो बातें चंद वरना समझेंगे सभी है तुझमें घमंड! यह बात नहीं अच्छी समझो मेरी बच्ची। लेखक-मो.मंजूर…

  • मेरी पहचान बता

    मेरी पहचान बता   मैं लड़की हूं इसे छोड़ मेरी पहचान बता घर मेरा मायका है या ससुराल मेरा मका बस एक बार तू मेरा पता बता   मैं लड़की हूं इसे छोड़ मेरी पहचान बता मैं अमृत हूं विष समझकर न सता मौन कर दिया तूने मुझे बेटे के समान बता   मैं लड़की…

  • ज़ख़्म हुए नासूर | Zakhm Hue Nasoor

    ज़ख़्म हुए नासूर ( zakhm hue nasoor ) बिखरी यादें टूटे सपने, क्या तुमको दे पाऊंगी। ज़ख़्म मेरे नासूर हुए हैं, कैसे ग़ज़ल सुनाऊंगी।। हक था तुम्हारा मेरे यौवन की, खिलती फुलवारी पर। पर तुम माली बन न पाए, मैं पतझड़ बन जाऊंगी।। ज़ख्म मेरे नासूर हुएं हैं कैसे ग़ज़ल सुनाऊंगी। मेरी मुस्काने और खुशियां,…

  • एक हो गये हम | Ek Ho Gaye Hum

    एक हो गये हम ( Ek Ho Gaye Hum ) सावन निकले जा रहा, दिल भी मचले जा रहा। कैसे समझाये दिलको, जो मचले जा रहा। लगता है अब उसको, याद आ रही उनकी। जिसका ये दिल अब, आदि सा हो चुका है।। हाल ही में हुई है शादी, फिर आ गया जो सावन। जिसके…

  • दिलबर वो हमारे | Geet Dilbar wo Hamare

    दिलबर वो हमारे ( Dilbar wo hamare )   मेरे मन में बसी छवि दिलदार की सनम। प्यार हद से भी ज्यादा उनसे करते हम। वो दिलकश नजारे, प्रियतम हमे पुकारे। महकती वादियों में, आये नदिया किनारे। दिलबर वो हमारे फूल खिलने लगे हैं, दिल मिलने लगे हैं। बहारों के मौसम भी, रंग बदलने लगे…

  • करगिल जंग | Kavita Kargil Jung

    करगिल जंग ( Kargil Jung ) युद्ध के उस रंग में, दुश्मन के साथ जंग में, बहादुरी दिखा रहे थे हमारे रणबाँकुरे। टाइगर हिल हो या हो द्रास की वो पहाड़ियों, फिर से उसको हासिल कर रहे थे रणबाँकुरे। एटम-बम को जो गहना पहनाकर वो बैठे हैं, अधोपतन का उत्तर वो दे रहे थे रणबाँकुरे।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *