Shri Devnarayan Bhagwan

श्री देवनारायण भगवान | Shri Devnarayan Bhagwan par Kavita

श्री देवनारायण भगवान

( Shri Devnarayan Bhagwan )

आज लोक देवता मानता है आपकों पूरा राजस्थान,
भगवान विष्णु के अवतार थें कहलाएं देवनारायण।
जो माघ मास मे शुक्ल पक्ष की षष्ठी को ये जन्में थें,
जीवन सारा लगा दिया था जिन्होंने लोक कल्याण।।

जिनकी माता का नाम साढ़ू और पिता सवाई भोज,
१८००० पशुधन था एवम् १४४४ ग्वालों का फ़ौज।
वासुदेव की जैसे थें देवनारायण जी गायों के रक्षक,
जो उठकर पहले ही दर्शन करते गौ माता का रोज़।।

गुरु रूपनाथ ने पहले ही कर दिया था भविष्यवाणी,
उनके गर्भ में जो पुत्र है वह नही है साधारण प्राणी।
अन्याय एवं अत्याचार के खिलाफ लड़ेगा वो लड़ाई,
आयुर्वेद के ज्ञाता बनकर बोलेंगें सदैव मीठी वाणी।।

बहुत किये बचपन में चमत्कार और किये है भलाई,
अनेंक सिद्धियां प्राप्त करके लड़ी कई सारी लडाई।
अल्पायु में हो गया था आपका पीपलदे संग विवाह,
महज ३१ साल में कर गऐ देव जी देवलोक विदाई।।

आज बगड़ावत गायन का हम सभी यशोगान करते,
मंदिरों और देवरो में उनकी पूजा अर्चना सब करते।
मुख्य रूप से गुर्जर समाज इनको आराध्य है मानते,
खीर एवं चूरमा भोग लगाकर सभी आपको पूजते।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • अब तक भी आस अधूरी है | Geet ab tak bhi aas adhoori hai

    अब तक भी आस अधूरी है ( Ab tak bhi aas adhoori hai )   खूब कमाया धन दौलत मंशा क्या हो गई पूरी है मातपिता नैन तरसे अब तक भी आस अधूरी है दूर देश को चले गए धन के पीछे दौड़ लगाने को भूल गए लाड़ दुलार किस्मत को आजमाने को   बीवी…

  • भाग्य | Poem on Bhagya

    भाग्य ( Bhagya )   भाग्य निखर जाये हमारा जब तकदीरे मुस्काती। ग्रह आकर साथ देते, खुशियों की घड़ी आती। सेवा स्नेह संस्कार हृदय में विनय भाव पलता है। सद्भावो की धारा में, पुष्प भाग्य खिलता है। पुष्प भाग्य खिलता है किस्मत के तारे चमकते, सुखों का लगता अंबार। अनुराग दिलों में पलता, जीवन में…

  • वक्त की रफ्तार | Kavita waqt ki raftar

    वक्त की रफ्तार ( Waqt ki raftar )     तेजी से बीता जाता है पल पल रे संसार  शनै शनै यूं बदल रही है वक्त की रफ्तार   माना सड़के सुंदर हो गई लबों पर लग गए ताले पत्थर दिल दिखाई देते अब कहां गए दिलवाले   भागदौड़ से भरी जिंदगी ये वक्त बदलता…

  • महाशिवरात्रि | Poem in Hindi on Mahashivratri

    महाशिवरात्रि ( Mahashivratri )    ज्योतिर्लिंग की महिमा है न्यारी, भोले शंकर के हम हैं पुजारी। महाशिवरात्रि के महापर्व पर, जलाभिषेक की परम्परा हमारी। तन पर भस्म सुशोभित होती, गले में सर्प की माला सजती। माथे पर चंदा लगता है अच्छा, जटा से गंगा की धारा बहती। शिवलिंग पऱ बेल- पत्र चढ़ाते, केसर, धतूर, दूध…

  • पाषाण युग | Pashan Yug par Kavita

    पाषाण युग ( Pashan yug)    स्वर्ण युग बीता रजत युग वो ताम्र युग चले गए। कलयुग में नर भांति भांति पग पग पे छले गए। पत्थर दिल लिये लो आया अब पाषाण युग। प्रस्तर ही पूजे जाते हैं शिलालेखों में बीते युग। दुख दर्द भाव भावना पीर पराई जाने कौन। वक्त खड़ा चुप्पी साधे…

  • शिव पथ

    शिव पथ शिव पथ अतृप्ति का ऐसासुखद मार्ग है जिसमेंअभोग ,त्याग , आस्थाआदि सहायक होते है ।रोटी खाई, भूख बुझी नहीं ।पानी पिया, प्यास बुझी नहीं ।धन का अर्जन किया ,लालसा बुझी नहीं आदिक्योंकि इस क्षणिक तृप्तिके पीछे अतृप्ति काविशाल सुखद साम्राज्य हैजिससे प्यास बुझे कैसे?यह एक अबूझ पहेली है ।पदार्थ का भोग तृप्तिका आभास…

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *