सवाल है 
सवाल है 

सवाल है 

 

यार से हुई निस्बत-ए-ख़ास गुफ्तगू, सवाल है

हम पे करम-ए-मेहरबान-ए-जुस्तुजू, सवाल है

 

खुद से चलो कोई ऐसा तो सवाल है, कमाल है

जिस पर उतर कर ज़िन्दगी हु-ब-हु सवाल है

 

ये भी कमाल है की अच्छे से सजाया गया हूँ

में मुत्मइन हूँ तो खामोसी से रु-ब-रु सवाल है

 

लुत्फ़-ओ-करम से नवाज़ा गया था पहले ही

यही की में उसके दर आया ही क्यों, सवाल है

 

हरी, अल्लाह दोनों बिराजे ‘अनंत’ के मन मांहि

फिर भी दर-ब-दर है मुझमें क्या की यूँ सवाल है

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शायर: स्वामी ध्यान अनंता

 

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