यूँ मजबूर ना कर

यूँ मजबूर ना कर | Yoon majboor na kar | Ghazal

मेरे हाथ को यूँ मजबूर ना कर

( Mere hath ko yoon majboor na kar )

 

मेरे हाथ को यूँ मजबूर ना कर कोई तस्बीर बनाने के लिए

ता-उम्र साथ निभाने की वादा ना कर अभी छोड़ जाने के लिए

 

मेरे कमरों में तुम्हारी तस्बीर और धुवां ही धुवां है

कुछ तो दिल की चाहिए होगा ना सजाने के लिए

 

पूछ जा कर मेरे हम-नशीं, मेरे दोस्तों से बात क्या है

वह बताएंगे, रोज तुम्हे याद करता है भुलाने के लिए

 

मौला ने बे-मिसाल करम-ए-दर्द से नवाज़ा है हमें

अब हम यूँ ही मुस्कुरा भी देते है तो दिखाने के लिए

 

बे-हिसाब प्यार किया और बहोत रोया बंद कमरे में

टुटा था जो दिल और दर्द भी था, रोया में और टुटाने के लिए

 

हमें यह बात गवारा नहीं अगर ये तस्कीन-ए-दिल तुम्हारा नहीं

मौत सायद है क़रीब, उसे और क़रीब लाया जाए सुलाने के लिए

 

वैसे हमारा हाल है खराब, इससे तो और खराब होना चाहिए

‘अनंत’ के बे -ताब दिल को और बे -करार करने के लिए

 

 

शायर: स्वामी ध्यान अनंता

 

यह भी पढ़ें :-

आदत नहीं है मेरे दोस्तों | Ghazal aadat nahi hai

Similar Posts

  • रोज़ हर दिल में मुहब्बत ढूंढ़ता हूँ

    रोज़ हर दिल में मुहब्बत ढूंढ़ता हूँ     नफ़रतों में वो नज़ारत ढूंढ़ता हूँ! रोज़ हर दिल में मुहब्बत ढूंढ़ता हूँ   हर गली में ही भटकता हूँ सारा दिन जिंदगी की रोज़ राहत ढूंढ़ता हूँ   पर नहीं मिलती किसी में ही यहां तो हर किसी में अच्छी आदत ढूंढ़ता हूँ   खो…

  • मां

    मां   मां एक अनबूझ पहेली है, मां सबकी सच्ची सहेली है, परिवार में रहती अकेली है, गृहस्थी का गुरुतर भार ले ली है। ऐ मां पहले बेटी,फिर धर्मपत्नी, बाद में मां कहलाती हो। पहली पाठशाला,पहली सेविका तूं घर की मालकिन कहलाती हो।। बुआ,बहन,मामी,मौसी कहलाये, माता,दादी,नानी नाम बुलवाये, परिवार की जन्म दात्री नाम सुहाये, अबला,सबला,…

  • निभाए साथ जो | Ghazal nibhaye saath jo

    निभाए साथ जो  ( Nibhaye saath jo )     निभाए साथ जो वो हम सफ़र ऐसा कहाँ मिलता वफ़ाओ का मगर ऐसा यारों  रस्ता कहाँ मिलता   निभाए जो  हमेशा दोस्ती मुझसे  वफ़ा बनकर मुझे कोई यहाँ ऐसा  मगर  चेहरा कहाँ मिलता   तन्हाई दूर हों जाये  यहाँ  तो जीस्त की मेरी कहीं भी…

  • जाने कहां चले गए ?

    जाने कहां चले गए ? ****** महंगाई महंगाई का शोर करने वाले, सड़क और संसद पर धरना देने वाले! नहीं दिख रहे आजकल? जो बात बात पर करते थे बंद का आह्वान, प्याज की माला गले में डाल- चलते थे सीना तान। जाने कहां चले गए? सो रहे होंगे शायद? या फिर खो गए होंगे…

  • करवा का चाँद | Chand Shayari

    करवा का चाँद ( Karwa ka chand )   चांद , रोजा रख कर या भूखे  रहकर तुझे मनाना पड़े  मुहब्बत मेरी उस मुकाम  पर है, कि कोई गवाह  बनाना पड़े   अब्र में छुपे कभी जमीं के  साए में तू, मर्जी तेरी इक महज मेरा नहीं है तू , कि मुझे ही तुझे रिझाना…

  • दादा जी | Dada ji par Shayari

    दादा जी ( Dada JI )   यहां तो दादा जी रकीब है नहीं कोई अपना हबीब है   रवानी ख़ुशी की कैसे हो फ़िर ख़ुशी जिंदगी से सलीब है   घरों में  हुये लोग कैद सब चला कैसा मौसम अजीब है   कैसे लें आटा दाल यूं महंगा दादा जी बड़े हम ग़रीब है…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *