हिंदी कविता

  • उलझन | Hindi poetry on life

    उलझन ( Uljhan )   उलझनों ने घेरा है, कैसा काल का फेरा है। किस्मत क्यों रूठ रही, मुसीबतों का डेरा है।   जीवन की जंग लड़े, कदमों में शूल पड़े। मुश्किलें खड़ी थी द्वार, तूफानों से हम भीड़े।   रिश्ते नाते भूले हम, मर्यादाएं तोड़ चले। बुजुर्ग माता-पिता को, वृद्धाश्रम छोड़ चले।   विकास…

  • Hindi Diwas Poem | मेरा सम्मान – मातृभाषा हिन्दी

    मेरा सम्मान – मातृभाषा हिन्दी ( Mera samman – matribhasha Hindi )   कब तक हिंदी मंद रहेगी अग्रेजी से तंग रहेगी कब तक पूजोगे अतिथि को कब तक माँ यूँ त्रस्त रहेगी माना अग्रेजी की जरूरत सबको माना बिन इसके नहीं सुगम डगर हो माना मान सम्मान भी दिलवाती पर मातृ भाषा बिन कैसी…

  • गणपति वंदना | Ganpati Vandana

    गणपति वंदना : दुर्मिल-छंद ( Ganpati Vandana )   बल बुद्धि विधाता,सुख के दाता, मेरे द्वार पधारो तो। जपता हूं माला,शिव के लाला, बिगड़े काज सवारों तो। मेरी पीर हरो,तुम कृपा करो, भारी कष्ट उबारो तो। तेरा दास जान,तुम दयावान, मेहर करो भव तारो तो।।   सिर मुकुट जड़ा है,भाग बड़ा है, बड़ी सोच रखवाले…

  • प्रथम पूज्य आराध्य गजानंद | Kavita

    प्रथम पूज्य आराध्य गजानंद ( Pratham pujya aradhya gajanand )   बुद्धि विधाता विघ्नहर्ता, मंगल कारी आनंद करो। गजानंद गौरी सुत प्यारे, प्रभु आय भंडार भरो।   प्रथम पूज्य आराध्य गजानंद, हो मूषक असवार। रिद्धि-सिद्धि संग लेकर आओ, आय भरो भंडार।   गणेश देवा गणेश देवा,जन खड़े जयकार करे। लंबोदर दरबार निराला, मोदक छप्पन भोग…

  • अंतर्मन की बातें | Kavita

    अंतर्मन की बातें ( Antarman ki baatein )   अंतर्मन की बातें निकल जब, बाहर आती हैं। हर पल बदलती जिंदगी, कुछ नया सिखाती है।।   खुशी से हर्षित है ये मन, निशा गम की छा जाती है । कभी बिछुड़न बना है दर्द, मिलन से खुशियां आती है।।   कभी ऐसे लगे जीवन ,खुशनसीब…

  • बेटी | Kavita

    बेटी ( Beti )   बेटी- है तो, माँ के अरमान है, बेटी- है तो, पिता को अभिमान है! बेटी- है तो, राखी का महत्त्व है, बेटी- है तो, मायका शब्द है!   बेटी- है तो, डोली है, बेटी- है तो, बागों के झुले हैं! बेटी- है तो, ननद- भाभी की ठिठोली है! बेटी- है…

  • शिक्षक | Shikshak Par Kavita

    शिक्षक ( Shikshak )   ये सच है जन्म पोषण परिवार दे देते हैं। शिक्षक उसे सफलता का द्वार दे देते हैं।। जीवन‌ के मनोरथ सकल सिद्ध तुम्हारे हों, यश  कीर्ति  बढ़े  ऐसा संस्कार दे देते हैं।। आने का प्रयोजन भी कुछ शेष न रह पाये, अन्त: तिमिर में सूर्य सा उजियार दे देते हैं।।…

  • गुरुर ब्रहमा गुरुर विष्णु | Teacher’s Day Par Kavita

    गुरुर ब्रहमा गुरुर विष्णु ( Gurur Brahma Gurur Vishnu )   जहाँ सिर श्रृद्धा से झुक जाते है अपने शिक्षक सभी याद आते हैं माँ मेरी प्रथम शिक्षिका है मेरी जीवन की वही रचियेता है पिता से धेर्य सीखा और सीखी स्थिरता चुपचाप जिम्मेदारी वहन करना और मधुरता दादी दादा नानी नाना से सीखा मिलजुल…

  • गुरु कुम्हार | Kavita

    गुरु कुम्हार ( Guru kumhar )   गुरु कुम्हार शिष् कुंभ है गढ़ी गढ़ी कांठै खोट। अंतर हाथ सहार दे बाहर बाहे चोट। हर लेते हो दुख सारे खुशियों के फसल उगाते हो। अ से अनपढ़ ज्ञ से ज्ञानी बनाते हो। चांद पर पैर रखने की शिक्षा भली-भांति दे जाते हो। नेता, अभिनेता, डॉक्टर, इंजीनियर,…

  • सौतन | Kavita

    सौतन ( Sautan )   कर में सौतन देके गये ब्रजनाथ राधिका रानी के। खेलते रही अधर पर प्रिय के राज किये मनमानी के।।१   गये श्याम जबसे मथुरा हैं भूल गये गोकुल नगरी, घटा कालिंदी का जल इतना लगती है उतरी उतरी। चले गये चितचोर नैन जलधार बहे राधारानी के।। २   छायी खुशी…