उसका मज़ा ले
उसका मज़ा ले
गुलों सी ज़िन्दगी अपनी खिला ले
जो हासिल हो रहा उसका मज़ा ले
मुहब्बत हो गई है तुझको मुझसे
निगाहें लाख तू अपनी चुरा ले
खरा उतरूंगा मैं हर बार यूँहीं
तू जितना चाहे मुझको आज़मा ले
लुटा दूँगा मैं चाहत का समुंदर
किसी दिन चाय पर मुझको बुला ले
घटा छाती नहीं उल्फ़त की हर दिन
इसे त्यौहार के जैसा मना ले
हज़ारों नेकियों के रास्ते हैं
ये दौलत जितनी जो चाहे कमा ले
सुराही जाम छलके जा रहे हैं
बढ़ा कर हाथ तू साग़र उठा ले








