Vasantik Navratri

वासंतिक नवरात्र द्वितीय | Kavita Vasantik Navratri

वासंतिक नवरात्र द्वितीय

 

जीवन पथ ज्योतिर्मय, मां ब्रह्मचारिणी उपासना से

नवरात्र द्वितीय परम बेला,
रज रज आध्यात्म सराबोर ।
भक्तजन शीर्ष स्तुति भाव,
भक्ति आह्लाद चारों ओर ।
मां ब्रह्मचारिणी वंदन अभिनंदन,
मंगल पावन हिय भावना से ।
जीवन पथ ज्योतिर्मय, मां ब्रह्मचारिणी उपासना से ।।

अमोध फलदायिनी आभा,
अद्भुत अनुपम व विशेष ।
दुःख कष्ट पीड़ा विलोपन,
सुख समृद्धि आनंद अधिशेष ।
सुयश, विजय अनंत आशीष ,
मां श्री चरण आराधना से ।
जीवन पथ ज्योतिर्मय,मां ब्रह्मचारिणी उपासना से ।।

स्व अधिष्ठान चक्र स्थिरता ,
मां साधना अति फलकारी ।
ब्रह्म रूपा दिव्य दर्शन,
लोक परलोक बलिहारी ।
त्याग तपस्या सदाचार संयम,
श्रृंगारित अभिवृद्धि कामना से ।
जीवन पथ ज्योतिर्मय, मां ब्रह्मचारिणी उपासना से ।।

कुंडलिनी शक्ति चैतन्यता,
निर्मित अहम भव्य संजोग ।
अखंड जप तप साधना,
ज्ञान सह आत्मबल अनुप्रयोग ।
उपमा अर्पणा ,उमा ,तपश्चरिणी,
मां असीम कृपा स्तवन पूजा अर्चना से ।
जीवन पथ ज्योतिर्मय, मां ब्रह्मचारिणी उपासना से ।।

महेन्द्र कुमार

नवलगढ़ (राजस्थान)

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