ये है कैसी मजबूरी है

ये है कैसी मजबूरी है

ये है कैसी मजबूरी है

 

 

ये है कैसी मजबूरी है!

मिलना पर उससे दूरी है

 

बात अधूरी है  उल्फ़त की

न मिली उसकी  मंजूरी है

 

जाम पिया उल्फ़त का उसके

हाथों में अब  अंगूरी है

 

टूटी डोर मुहब्बत की ही

न मिली उसकी मंजूरी है

 

भौरा क्या बैठे फूलों पे

फूलों में ही बेनूरी है

 

दीद नहीं दोस्त हुई उसकी

चाह कहा दिल की पूरी है

 

मांगा उसकी रब से आज़म

क़िस्मत की बस मंजूरी है

 

 

 

✏

शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें : 

जीस्त में कब मेरी ख़ुशी आयी

 

Similar Posts

  • आग | Aag par kavita

     आग  ( Aag )   जीवन में आग का महत्व……|| 1.एक दम पवित्र एक दम तेज, देवों मे भी एक है | खुद मे हर चीज मिलाती, काम भी उसके नेक है | सुख-दुख मे काम आती, रोशनी उज्वलित होती है | अपनी छाप छोड़ती जब, अग्नी प्रज्वलित होती है | जीवन में आग का…

  • पछतावा

    पछतावा *** नहीं हो सका तुझसे कुछ भी अच्छा! रहा बच्चा का बच्चा, दिल का सादा और सच्चा। ईर्ष्या द्वेष वैमनस्य न जाना, ज़माने की दस्तूर न माना; देते हैं लोग अब ताना। मूर्ख ! तू इतना भी न जाना? छल कपट का है जमाना। कुछ कराने को ‘कुछ’ करना पड़ता है, वरना फाइल ठंडे…

  • दिवाली फिर आई | Deepawali kavita in Hindi

    दिवाली फिर आई 1 हर दिल अज़ीज, सदियों पुरानी, त्यौहारों की रानी, दिवाली फिर आई। 2 उर्ध्वगामी लौ से, सतत विकास करने, पुरातन को शोधने, दिवाली फिर आई। 3 ज्ञान के आलोक से, अज्ञान-तम मिटाती, हृदय ज्ञान जगाती, दिवाली फिर आई। 4 मति-देव का पूजन, महालक्ष्मी आरती, दरिद्रता दूर भगाती, दिवाली फिर आई। 5 सकल…

  • इंसान और पेड़ में अंतर

    इंसान और पेड़ में अंतर ****** वो कहीं से भी शुरूआत कर सकता है, सदैव पाज़िटिव ही रहता है। उसे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता मौत के मुंह में जाकर भी त्यागता नहीं जीजिविषा सदैव जीवन की है उसे लालसा कभी हिम्मत न हारता बना लेता हूं कहीं से भी कैसे भी जतन कर…

  • दीपावली | Deepawali kavita

    दीपावली ( Deepawali )     आ गई दीवाली, आ गई दीवाली ……|| 1.नव रात्र गये गया दशहरा, लो आ गई दीवाली | साल में सबसे हिन्दुस्तानी, त्यौहार बड़ा दीवाली | करो सफाई सारे घर की, है थोड़े दिन में दीवाली | रंग भर दो दीवारों में, रंगमय हो जाये दीवाली | आ गई दीवाली,…

  • दें गयी इश्क़ में मात वो | Shayari Ishq mein

    दें गयी इश्क़ में मात वो ( De Gayi Ishq Mein Maat Wo )   दें  गयी  इश्क़  में मात वो कह गयी कुछ ऐसी बात वो   आज वो हो रही ख़ुश बहुत छेड़कर दिल के नग्मात वो   अनसुना  करती  रहा  रोज़ ही कब समझें दिल के जज्बात वो   जो  नहीं  यार …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *