ये क्या हुआ

ये क्या हुआ

तू सत्य की खोज में चल मानव,
क्योंकि हर तरफ दिख रहा है दानव।।

सब एक दूसरे को खाने में लगे हुए हैं,
रईस गरीब को सताने में लगे हुए हैं।।

मानवता बिकी पड़ी है बाजार में,
यह दुनिया फंसी फरेबी मक्कार में।।

ये बाप और बेटे रिश्ते भूल गए हैं,
बच्चे संस्कार वाले बस्ते भूल गए हैं।।

ये दुनिया अंधे बहरों की लग रही है,
मानवता ही मानवता को ठग रही है।।

प्यार,मोहब्बत,जज्बात सब दिखावे के हैं,
झूठी दिलासा, सच्चा प्यार बहकावे के हैं।।

अब मानवता खत्म हो गई जग से,
प्यार भी खत्म हो प्यार के उपवन से।।

हम लोगों को झूठी दिलासा दे रहे हैं,
हम खुद को ही गुमराह कर रहे हैं।।

प्रभात सनातनी “राज” गोंडवी
गोंडा,उत्तर प्रदेश

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