मृत्यु!

hindi poetry on life -मृत्यु!

मृत्यु!

( Mrityu )

**

कभी आकर चली जाती है,
कभी बेवक्त चली आती है।
जरूरी हो तब नहीं आती,
कभी बरसों बरस इंतजार है कराती।
हाय कितना यह है सताती?
कितना है रूलाती ?
कब आएगी?
यह भी तो नहीं बताती!
एकदम से अचानक कभी आ धमकती है,
जाने कहां से आ टपकती है?
आकर अपनों को पीड़ा अनंत दे जाती है,
रूलाती है;
तो गैरों को खुशियां दे जाती है!
सपने किसी के तोड़ जाती है,
किसी को मालामाल कर जाती है।
आना है इसका निश्चित,
कब कहां कैसे ?
यह नहीं सुनिश्चित।
चलती है उसकी मर्जी,
लगाए कोई कितनी भी अर्जी।
है बड़ी बेदर्द!
ना ही किसी की सुनती,
ना समझती।
करे लाख कोई विनती,
नहीं किसी को छोड़ती;
बंद करती सबकी बोलती।
लिए संग उड़ जाती,
मिटा अस्तित्व खाक में मिलाती।
फिर भी दुनिया समझ न पाती,
माया मोह ही अक्सर हमें है सताती।

बड़ी हठीली
बड़ी अलबेली
है जीवन में सबके आती
मजा सबको चखाती
हुए बिना जज़्बाती
साथ अपने है ले जाती
ना करती भेदभाव
चाहे दीन हो या साव
देती तनिक न भाव
रहें शहर में या गांव
इसे ना किसी से लगाव
ना देखे धूप छांव
इंसाफ बराबर है करती
नहीं किसी से डरती
गजब की इसमें स्फूर्ति
भनक इसकी न लगती
कब आती?
कब ले जाती?
दुनिया देखती रह जाती!
कहानियां पीछे अनंत छोड़ जाती।

?

नवाब मंजूर

लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें :

hindi kavita -फिर वही बात!

Similar Posts

  • नहीं होती | Nahi Hoti Kavita

    नहीं होती ( Nahi hoti )   जिन्दगी कहानी नहीं होती । एक सी रबानी नहीं होती ।।   उधारी बाप और बेटे में । आज मुंह जबानी नहीं होती ।।   इबादत खाली हाथ करने से । कोई मेहरबानी नहीं होती ।।   आज के दौर में पहले जैसी । हकीकत बयानी नहीं होती…

  • क्या होता है पिता

    क्या होता है पिता क्या होता है पिता, यह अहसास होता है तब। बनता है जब कोई पिता, अनाथ कोई होता है जब ।। क्या होता है पिता—————————।। रहकर मुफलिसी में पिता, बच्चों को भूखे नहीं रखता। छुपा लेता है अपने दर्द और आँसू, खुश बच्चों को वह रखता।। भूलाकर बच्चों की गलती ,पिता ही…

  • पर्व पर गर्व | Kavita Parv par Garv

    पर्व पर गर्व  ( Parv par Garv )   भले जली होलिका आज भी जल रही है जिंदा है आज भी हिरण कश्यप रावण आज भी जिंदा है बच गया हो प्रहलाद भले बच गई हों सीता भले अहिल्या को मिल गई हो मुक्ति तब भी आज भी स्थिति वही है खुशियां मनाएं किस बात…

  • प्रसाद | भोग | Prasad kavita

    प्रसाद | भोग ( Prasad | Bhog )   छप्पन भोग चढ़े सांवरा रुचि रुचि भोग लगाओ। मीरा गाए भजन बैठकर प्यारे माधव मुस्काओ।   भक्ति भाव से भक्त तिहारे मोदक प्रसाद लगाए। माखन मिश्री कृष्णा प्यारा ठुमक ठुमककर खाए।   खीर चूरमा भोग चढ़े जय बजरंगबली हनुमान। संजीवन लेकर पवनसुत लक्ष्मण के बचाए प्राण।…

  • संसार न होता | Kavita Sansar na Hota

    संसार न होता….! ( Sansar na hota )   मन का चाहा यदि मिल जाता, तो फिर यह संसार न होता। हार न होती, जीत न होती, सुख दु:ख का व्यापार न होता। रोग-शोक-संताप न होता, लगा पुण्य से पाप न होता। क्यों छलकाते अश्रु नयन ये, जो उर में परिताप न होता। स्नेह स्वार्थ…

  • अनुपम खेर | Anupam Kher par kavita

    “अनुपम” खेर ( Anupam Kher )  –> क्या उपमा दूँ मैं “अनुपम” की …….|| 1. हैं अनुपम जी खुशहाल बडे,इन्डस्ट्री मे नाम अमर उनका | सूट करे किरदार कोई भी,आवाज बुलंद हुनर उनका | है सिर पर हांथ माँ दुलारी का,आशीष सदा बरसाती है | खट्टी-मीठी सी नोक-झोंक,सबके मन को हर्षाती है | –> क्या…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *